छत्तीसगढ़
भ्रष्टाचार मामले में पूर्व सब-रजिस्ट्रार आरके नेताम को हाईकोर्ट से राहत, दोषसिद्धि और सजा रद्द
Shantanu Roy
7 Oct 2026 10:12 PM IST

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छग
Bilaspur. बिलासपुर। भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के मामले में दोषी ठहराए गए तत्कालीन दुर्ग सब-रजिस्ट्रार आरके नेताम को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की सिंगल बेंच ने ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई दोषसिद्धि और सजा को रद्द कर दिया है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष नेताम के खिलाफ लगाए गए आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर सका। इस मामले की खास बात यह है कि अपील लंबित रहने के दौरान 23 जुलाई 2022 को आरके नेताम का निधन हो गया था। इसके बाद उनकी पत्नी सुनीता नेताम ने कानूनी प्रक्रिया के तहत अपील जारी रखने की अनुमति मांगी थी। हाईकोर्ट ने 1 अप्रैल 2026 को सीआरपीसी की धारा 394(2) के तहत उन्हें अपील जारी रखने की अनुमति दी थी।
मामला वर्ष 2006 का है। अभियोजन के अनुसार गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने 9 फरवरी 2006 को एंटी करप्शन ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया था कि उनकी बहन आशा लता उर्फ आशा रानी के नाम पुलगांव, दुर्ग में करीब 27.3 एकड़ जमीन थी। आरोप था कि निर्मला देवी अग्रवाल ने अमेरिका में तैयार की गई कथित पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर उक्त जमीन की अलग-अलग सेल डीड कराई। अभियोजन ने तत्कालीन सब-रजिस्ट्रार आरके नेताम पर आरोप लगाया कि विदेश में तैयार पावर ऑफ अटॉर्नी पर आवश्यक स्टांप ड्यूटी जमा नहीं होने के बावजूद उन्होंने उसके आधार पर भूमि विक्रय दस्तावेजों का पंजीयन कर दिया। अभियोजन का दावा था कि इस प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की गई और शासन को करीब 6 लाख 8 हजार 115 रुपये की स्टांप ड्यूटी का नुकसान हुआ।
शिकायत मिलने के बाद एंटी करप्शन ब्यूरो ने मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान सब-रजिस्ट्रार कार्यालय के साथ स्टांप और पंजीयन से संबंधित विभिन्न कार्यालयों के रिकॉर्ड जुटाए गए। इसके बाद आरके नेताम और निर्मला अग्रवाल के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई। मामले की सुनवाई के बाद ट्रायल कोर्ट ने आरके नेताम को दोषी ठहराया था। इस फैसले को उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। अपील की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों, गवाहियों और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण किया। हाईकोर्ट ने पाया कि अभियोजन आरके नेताम की आपराधिक भूमिका और उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं रहा। इसी आधार पर अदालत ने ट्रायल कोर्ट की दोषसिद्धि और सजा को निरस्त कर दिया। आरके नेताम की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी द्वारा जारी रखी गई अपील में आए इस फैसले के बाद उनके खिलाफ ट्रायल कोर्ट का दोषसिद्धि आदेश अब प्रभावी नहीं रहेगा।
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