
जनता से रिश्ता अखबार के 14वें स्थापना दिवस के अवसर पर बोले प्रधान संपादक पप्पू फरिश्ता
जनता से रिश्ता अखबार नहीं एक मिशन है। जनता की आवाज को प्रमुखकता से उठाकर राजधानी की जनता को लुटने से बचाया । खासकर सूखे नशे के खिलाफ अभियान चलाकर नशे के सौदागरों के ठिकाने में पुलिस ने अभियान चलाकर नशे के सौदागरों को पकड़ कर जेल भेजा। जनता से रिश्ता का स्लोगन है जो दिखेगा नो छपेगा। जनता से रिश्ता लगातार 13 वर्षों नशे के सौदागरों के खिलाफ अभियान चलाकर उनके मंसूबे पर पानी फेर दिया है। पुलिस की टीम जनता से रिश्ता के साथ मिलकर नशे के सौदागरों को पकडक़र कार्रवाई कर रही है। जनता से रिश्ता रायपुर में होने वाले गंदे -गंदे इवेंट के खिलाफ अभियान चलाकर राजधानी के यृुवाओ्ं सूखे नशे की लत से मुक्त करवा रही है। जनता से रिश्ता राजधानी में चल रहे अवैध कारोबार के खिलाफ पिछले 13 वर्षो से कर रही है। जनता से रिश्ता अपनी बेबाक लेखनी के लिए जाना जाता है। खासकर राजनीतिक रसूखदारों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ये अखबार जनता की जुबां पर जाना पहचाना नाम है। भ्रष्ट अफसर शाही के खिलाफ जनता से रिश्ता लगातार काम कर रही है। सरकार के अधिकारी हर दोपहर को जऩता से रि़श्ता इंतजार करते है। जनता औऱ पुलिस के बीच सेतु बनकर काम कर रही है। जन-जन की आवाज को उठाने के लिए जनता से रिश्ता कृत संकिल्पत है।
डिजीटलीकरण ने पत्रकारिता को बाजार-केन्द्रीत बनाया: अतुल्य चौबे
जनता से रिश्ता अखबार के समाचार संपादक अतुल्य चौबे ने इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान पत्रकारिता डिजिटल, तेज़ और बाज़ार-केंद्रित हो गई है, जहाँ सोशल मीडिया की मु य भूमिका है। यह अब केवल सूचना नहीं, बल्कि सनसनीखेज, पेड न्यूज़ और व्यावसायिक दबावों से प्रभावित है। डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म ने इसे तात्कालिक बना दिया है, लेकिन इससे विश्वसनीयता और गहराई में कमी आई है, जिससे निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। वर्तमान में डिजिटल और सोशल मीडिया का दबदबा है ।समाचार अब प्रिंट या टीवी से पहले ट्विटर, फेसबुक और वेबसाइटों (वेब-पत्रकारिता) पर आ रहे हैं, जिससे सूचना का प्रसार बहुत तेज़ हो गया है। पत्रकारिता एक 'मिशन' के बजाय एक व्यवसाय बन गई है। टीआरपी और विज्ञापनों के दबाव में, समाचारों का व्यवसायीकरण बढ़ गया है। गंभीर विश्लेषण के बजाय सनसनीखेज हेडलाइंस और ब्रेकिंग न्यूज पर जोर दिया जाता है, जिससे कभी-कभी गलत या अर्ध-सत्य जानकारी भी प्रसारित होती है। मीडिया में पूंजीपतियों का प्रभाव बढ़ा है, जिससे समाचारों में निष्पक्षता के बजाय किसी विशेष एजेंडे या राजनीतिक झुकाव का असर दिखता है।
मीडिया को उगाही का साधन बना रहे कुछ लोग: ज़ाकिर घुरसेना
आम जनता भी सोशल मीडिया के माध्यम से पत्रकार की भूमिका निभा रही है, जिससे सूचना का लोकतंत्रीकरण हुआ है। हालांकि टीआरपी का दबाव है, फिर भी डेटा पत्रकारिता और खोजी पत्रकारिता का उपयोग तथ्यों को गहराई से प्रस्तुत करने के लिए किया जा रहा है। पत्रकारिता को अपनी विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए झूठी खबरों, एजेंडा-आधारित रिपोर्टिंग और व्यावसायिक दबावों से लडऩा पड़ रहा है। फिर भी, यह आज भी समाज को सूचित करने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
जनता से रिश्ता के राज. संपादक ज़ाकिर घुरसेना ने स्थापना दिवस के अवसर पर हुई परिचर्चा में "पत्रकारिता की चुनौती" विषय पर कहा कि यह बात सच है कि मीडिया देश, सरकार और समाज का एक प्रमुख प्रहरी की तरह है. लोग इस बात पर भी जोर देते हैं कि मीडिया लोकतंत्र के चौथे स्त भ की भूमिका में जरूर था लेकिन वर्तमान में इन बातों में कमी आई है। लोग मीडिया पर ही ऊँगली उठाने लगे हैं। जिसकी वजह काफी हद तक मीडिया भी है क्योंकि देखा जा रहा है कि किसी भी तरह के लोग मीडिया क्षेत्र में प्रवेश कर लिया हैं और मीडिया को उगाही का साधन समझ लिए हैं ऐसे में मूल पत्रकारों की भावना आहत हो रही है। दूसरी ओर मीडिया को लोग समाज और सरकार को जवाबदेह बनाने में मु य भूमिका निभाने वाले मानते हैं लेकिन कहीं कहीं सच लिखने का खामियाजा पत्रकार को अपनी जान देकर भी भुगतना पड़ता है। कहीं पर उन पर हमला भी हो जाता है। एक निगेटिव पहलु यह भी है कि वर्तमान परिवेश
में देखा जा रहा है कि किसी को बदनाम करने या उगाही करने का माध्यम बन गया है वर्तमान मीडिया। अब पत्रकारिता की जगह चाटुकारिता ने ले लिया है जिसका वजह भी ऐसे व्यवसायी हैं जो अपने व्यवसाय को आगे बढऩे या सेक्योर करने मिडिया क्षेत्र में पदार्पण करना है। सोशल मीडिया के इस दौर में फर्जी खबरें और दुष्प्रचार फैलाना आसान हो गया है, जिससे मूल पत्रकारिता नदारद हो गया है मीडिया की विश्वसनीयता कम होने की एक वजह भी है। महत्वपूर्ण बात ये है कि किसी भी संस्थान को चलने के लिए आर्थिक आधार मजबूत होना आवश्यक है मीडिया संस्थानों को चलाने के लिए विज्ञापन का होना जरुरी है दूसरे शब्दों में मीडिया संस्थानों की रीढ़ भी बोला जाता है विज्ञापन को। बड़े अखबारों और न्यूज़ वेब साइटों को तो निजी विज्ञापन मिलता है जिससे उन्हें परेशानी काम होती है लेकिन जो मीडिया संस्थान सिर्फ सरकारी विज्ञापन के भरोसे होती हैं उनके सामने काफी मजबूरियां भी होने लगी है। दूसरी बात पत्रकारों का एकजुट न होना भी एक विषय हो गया है। बिना विज्ञापन के मीडिया संस्थानों को बचाए रखना मुश्किल हो गया है।इन सब कारणों से पत्रकारिता पर सरकार और विज्ञापनदाताओं का दबाव भी रहता है, जिससे निष्पक्ष रिपोर्टिंग नहीं हो पति और वही बात दिखाना मजबूरी हो जाता है जो सरकार या विज्ञापनदाता चाहते हैं। वर्तमान में बात दूसरी भी हो रही है पहले के तुलना में अभी डिजिटल मिडिया हावी हो रही है और यहीं पर से उगाही का भी खेल शुरू हो जाता है जो कहीं न कहीं पुराने पत्रकारों को और पत्रकारिता को चोट कर रही है। लोग अब अख़बार पढऩे के बजाय ऑनलाइन समाचार देखना पसंद कर रहे हैं। व्यावसायिक प्रतिद्वंदिता के चलते किसी के पास अख़बार पढऩे का वक्त ही नहीं बचा है। इसन सब कारणों से भी लोकतंत्र के एक मजबूत स्त भ की साख आज दांव पर है। वैश्वीकरण के कारण भी वर्तमान पत्रकारिता अब मिशन नहीं रह गया है बल्कि व्यवसाय हो गया है। संपादक भी आजकल स पादकीय लिखने के बजाय मालिक के लाइजनर बन चुके हैं जो मीडिया मालिक के व्यवसाय के लिए ज्यादा बात करते हैं यह उनकी मजबूरी भी है ऐसा नहीं करने पर संस्था से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है। इसका परिणाम यह आ रहा है कि समाचार लिखने में हो या टीवी डिबेट में चर्चा हो दोनों जगह पत्रकार के जगह प्रचारक नजऱ आते हैं। इन सब बातों से मीडिया के प्रति भी लोगों का भरोसा कम होने लगा है। वर्तमान में पत्रकार इतने कमजोर हो चुके हैं कि ए दिन पत्रकारों पर हो रहे हमले को रोकने के लिए पत्रकार सुरक्षा कानून भी लागू नहीं करवा पा रहे हैं।
जनता से रिश्ता ने संपूर्ण मानवता का विश्वास जीता: कैलाश यादव
1 मई 2013 का दिन भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण दिन था, जनता से रिश्ता की पहली कापी लोगों को समर्पित किया गया। आज शानदार 13 वर्ष पूर्ण कर 14 वें वर्ष में पदार्पण कर रहे है। जब छत्तीसगढ़ ने मध्यप्रदेश से अलग होकर एक नए राज्य के रूप में जन्म लिया। यह दिन उन सभी सपनों, संघर्षों और आकांक्षाओं की परिणति है, जो छत्तीसगढ़ के लोगों ने एक अलग पहचान बनाने के लिए संजोए थे। छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना न केवल एक प्रशासनिक बदलाव था, बल्कि यह सांस्कृतिक पहचान और आत्मनिर्भरता की एक लंबी यात्रा का आरंभ था। छत्तीसगढ़ अपनी सांस्कृतिक धरोहर के लिए देशभर में विशेष स्थान रखता है। यह राज्य आदिवासी, ग्रामीण और शहरी परंपराओं का एक अद्भुत संगम है, जहाँ हर वर्ग की अपनी अलग पहचान है। यहां की जनजातीय परंपराएं, गीत, नृत्य, पर्व और मेलों में एक अनोखी बात है। यहां मनाए जाने वाले देवारी तिहार, गोवर्धन पूजा, मातर, हरेली, छेरछेरा, राजिम मेला, बस्तर दशहरा, करम परब, तीजा, पोरा जैसे पर्व न केवल सांस्कृतिक विविधता को दर्शाते हैं, बल्कि समाज को एकजुट करने का भी काम करते हैं। यहां की लोक कलाएं, जैसे पण्डवानी, सुवा नृत्य, करमा, पंथी, ददरिया, राउत नाचा, यहां की आत्मा में बसती हैं। इनमें निहित कथा, संगीत और कला न केवल छत्तीसगढ़ की पहचान हैं, बल्कि हमारे पूर्वजों द्वारा छोड़ी गई सांस्कृतिक धरोहर को संजोए रखने का एक माध्यम भी हैं। साहित्य में भी छत्तीसगढ़ी कवि, लेखक और पत्रकार अपनी लेखनी के माध्यम से संस्कृति को अमर बनाए हुए हैं। छत्तीसगढ़ प्रकृति की गोद और हरियाली की चादर से ढंका हुआ प्रदेश है। बस्तर से लेकर सरगुजा और राजनांदगांव से लेकर रायगढ़ तक प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर राज्य है। घने जंगल, हरियाली और खनिज संपदा इसे एक विशेष स्थान प्रदान करती है। यहां की जल, जंगल, जमीन और वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए हमारे आदिवासी समाज ने अपना अनमोल योगदान दिया है।
ये समुदाय न केवल प्रकृति के साथ तालमेल बिठा कर रहते हैं, बल्कि उन्होंने अपनी परंपराओं के जरिए पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया है। जल, जंगल और जमीन की रक्षा करने में आदिवासी समाज का योगदान छत्तीसगढ़ की असली संपत्ति है, जिसके बिना यहां का अस्तित्व अधूरा है। छत्तीसगढ़ का विकास यहां की जनता के अथक परिश्रम का फल है। यहाँ के किसान, मजदूर, डॉक्टर, शिक्षक, इंजीनियर और अन्य सभी वर्गों ने अपने-अपने क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान दिया है। कृषि क्षेत्र में यहां के अन्नदाता राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। यहां के किसान सिर्फ खाद्यान्न उत्पादन में ही नहीं, बल्कि जैविक खेती और नवाचारों में भी अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। वहीं उद्योग और खनन क्षेत्रों में भी छत्तीसगढ़ का एक विशेष स्थान है। राज्य में खनिज संपदा की प्रचुरता ने इसे औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित किया है, जो रोजग़ार सृजन में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से अधोसंरचना विकास के साथ यहां के युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं, जिससे उनकी प्रतिभा का विकास हो रहा है और राज्य प्रगति की राह पर निरंतर आगे बढ़ रहा है। छत्तीसगढ़ के विकास में शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों का भी महत्वपूर्ण योगदान है। इन वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में कई सकारात्मक बदलाव देखे गए हैं। राज्य में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे यहां के युवा राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभा सकें। स्वास्थ्य क्षेत्र में राज्य सरकार ने कई योजनाएं शुरू की हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य सुविधाएं सुलभ हो रही हैं।
एकता और विकास का संकल्प
जनता से रिश्ता के स्थापना दिवस हमें एकजुट होकर राज्य को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जाने का संकल्प लेने की प्रेरणा देता है। यह दिन हमें उन महान विभूतियों की याद दिलाता है जिन्होंने इस राज्य को आकार देने में अपने जीवन का योगदान दिया। वे सभी स्वतंत्रता सेनानी और समाजसेवी, जिनके संघर्षों के कारण छत्तीसगढ़ को अपनी पहचान मिली, हमारे प्रेरणास्रोत हैं। आइए, इस राज्य स्थापना दिवस पर हम सब मिलकर एक दीया-चौखट, आंगन और छत पर जलाएं और यह संकल्प लें कि हम छत्तीसगढ़ को एक सद्भाव की धरती और स्वस्थ, शिक्षित, समृद्ध एवं पर्यावरण संरक्षक राज्य के रूप में विकसित करेंगे। यह दीया एकता, सद्भाव और सामूहिक प्रयासों की रोशनी को प्रदर्शित करेगा, जो हमारे छत्तीसगढ़ को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा और वर्तमान पीढ़ी के लिए राहत तो भावी पीढ़ी के लिए सुकून का वातावरण निर्मित करेगा। भारत के भले ही किसी कोने में आप रह रहे हों, जनता से रिश्ता वेबसाइट पर आपके राज्य की हर छोटी-बड़ी खबर मिलेगी। राजनीति, खेल, चुनाव, बिजनेस, सिनेमा, इस प्लैटफॉर्म पर बस एक क्लिक करते ही हमेशा पाएं ताजा खबरें। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, ज मू-कश्मीर, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल समेत देश के बाकी राज्यों और शहरों की कोई जानकारी हो, हम आपको देते हैं। सियासी रण हो या बजट का मौसम, कहां चल रहा क्या सियासी दांव-पेच, आपके गांव में किसकी सरकार, हर अपडेट यहां आपको मिलेंगे। तो फिर अपने राज्य की हर हलचल के लिए जुड़े रहिए जनता से रिश्ता के साथ।





