
रायपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब, कोल लेवी और कस्टम मिलिंग घोटाले के आरोपी रामगोपाल अग्रवाल 17 जुलाई तक EOW के रिमांड में रहेंगे। आज EOW ने मेडिकल जांच के बाद रामगोपाल अग्रवाल को विशेष न्यायधीश सुमित कपूर के कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने उन्हें 17 जुलाई तक EOW की कस्टोडियल रिमांड पर भेज दिया है। इस दौरान EOW की टीम उनसे मामले में पूछताछ करेगी। रामगोपाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व कोषाध्यक्ष थे। 3 साल से फरार चल रहे अग्रवाल ने कल रायपुर स्थित EOW ऑफिस पहुंचकर सरेंडर किया। कोर्ट परिसर में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।
रायपुर
— Anshuman Sharma (@anshuman_sunona) July 9, 2026
छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब, कोल लेवी और कस्टम मिलिंग घोटाले के आरोपी रामगोपाल अग्रवाल 17 जुलाई तक EOW के रिमांड में रहेंगे।
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चौकाने वाला खुलासा: नकटी गांव का नाक कटवाने वाले भ्रष्ट हाउसिंग बोर्ड के बड़े अफसर के साथ मिलीभगत
शराब घोटाले का मास्टरमाइंड भूपेश सरकार का अवैध शराब कारोबार का कर्ताधर्ता के सरेंडर करने की पीछे की कहानी बहुत निराली है अपने कथित रिश्तेदार नेता के सहारे पूरी प्लानिंग के तहत सरेंडर की कहानी बनाई गई है अंदर की बात बहुत जल्द सामने आने वाली है नकटीगांव के कारण भाजपा सरकार की नाक काटने वाला प्रकरण भी रामगोपाल अग्रवाल ने ही कांग्रेस शासन काल में अपने रिश्तेदार के सहारे बोया था हाउसिंग बोर्ड के तत्कालीन भ्रष्ट अधिकारी जो भूपेश बघेल के रिश्तेदार थे, हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर पहले नकटी गांव के आसपास पुरी जमीनों को राम गोपाल अग्रवाल के समर्पित बिल्डर और रिश्तेदार लोगों ने जमकर खरीदी की। जिसमें भूपेश परिवार के भी सदस्य शामिल थे।
हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों ने भी जमकर खरीदी की। फिर वहीं पर हाउसिंग बोर्ड का प्रोजेक्ट शासकीय जमीनों को अधिकरण कर बनाने का योजना बनाई। यह पूरी योजना कांग्रेस शासन काल में भूपेश बघेल के रिश्तेदार हाउसिंग बोर्ड के भ्रष्ट अधिकारी के द्वारा अमली जामा पहनाया गया।
बाजार की चर्चा के अनुसार नकटी गांव के आसपास अधिकांश भूमाफियाओं ने जमीन की खरीदी बिक्री कांग्रेस शासन काल में जमकर की है। इसी वजह से हाउसिंग बोर्ड का प्रोजेक्ट शासकीय भूमि का अधिकरण कर लाया गया। उस प्रोजेक्ट के उपरांत आसपास की भूमि के रेट अनाप-शनाप बेतहाशा बढ़ जाते हैं। जिससे लाखों करोड़ों की कमाई भू माफियों को होती है। अधिकांश भूमिया गैर छत्तीसगढिय़ा होने के कारण और छत्तीसगढ़ के बाहर के होने के बावजूद छूटभैया नेताओं के सहारे यह बड़ा कारनामा को अंजाम दे जाते हैं।





