छत्तीसगढ़

मध्य भारत में रायपुर ड्रग डंपिंग का बड़ा केंद्र

Nil dhankar
10 Aug 2025 11:05 AM IST
मध्य भारत में रायपुर ड्रग डंपिंग का बड़ा केंद्र
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हेरोइन तस्करी मामले में दो और तस्कर पुलिस के हत्थे चढ़े

छग से बाहर भी सप्लायरों का नेटवर्क, आईबी-एनसीबी की एंट्री से जांच में तेजी

सभी क्लब-पब-कैफे में लगातार नशे का सामान उपलब्ध कराने की शिकायत, बना नशे का अड्डा

पाकिस्तानी ड्रग खुले आम छग में हर रेस्ट्रोरेंट -कैफे के जरिए उपलब्ध

विगत पांच वर्षों से ड्रग का अवैध कारोबार का चरम सीमा पर कल्ब-पब वाले छग के युवाओं को नशे के अंधेरे खाई में झोंक रहे हैं

रायपुर। छत्तीसगढ़ में पाकिस्तान से जुड़े ड्रग सिंडिकेट के खिलाफ रायपुर पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। सिंडिकेट के मास्टरमाइंड से पूछताछ के बाद 2 और आरोपियों की गिरफ्तारी की है। पकड़े गए आरोपियों के नाम रविंद्र कुमार साहू और अभिषेक रजक है। दोनों आरोपी डिलीवरी बॉय का काम करते थे।

रायपुर पुलिस की पूछताछ में दोनों आरोपियों ने ड्रग्स सप्लाई की बात कबूल की है। इनकी गिरफ्तारी के बाद ड्रग्स सिंडिकेट केस में अब गिरफ्तार आरोपियों की संख्या 11 हो गई है। पुलिस जल्द ही गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर मामले का खुलासा करेगी। टिकरापारा पुलिस और एसीसीयू की टीम ने छापेमारी कर 9 आरोपियों को पकड़ा है। इनके पास से 1 करोड़ की हेरोइन जब्त की गई है।

पाकिस्तान ड्रग्स केस की 4एजेंसियां कर रही जांच

वर्चुअल नेटवर्क बनाकर पिछले 8 महीने से रायपुर में ड्रग्स सिंडिकेट ऑपरेट कर रहे इस गिरोह के खिलाफ रायपुर पुलिस के साथ-साथ आईबी, एनसीबी और एटीएस भी जांच कर रही है।आईबी के अफसर पुलिस रिमांड पर लाए गए मास्टर माइंड लवजीत सिंह उर्फ बंटी से पूछताछ कर चुके हैं। लवजीत सिंह से नेटवर्क, सप्लाई और सिंडिकेट से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। इन जानकारियों के आधार पर जांच एजेंसियां आगे की कार्रवाई कर रही हैं।आरोपियों से जब्त हेरोइन, जिसकी कीमत 1 करोड़ रुपए आंकी गई है। राजधानी में दो और ड्रग तस्कर को पुलिस ने छापा मारकर पकड़ लिया है। दोनों आरोपी भी गिरोह के सदस्य हैं, जो खुद भी ड्रग्स का नशा करते हैं और दूसरों को बेचते भी हैं। आरोपियों के खाते में 70 से ज्यादा बार ट्रांजेक्शन हुआ है। ड्रग्स का पैसा आरोपियों के खाते से होकर गिरोह तक जाता था। दोनों कुरियर बॉय की तरह काम करते थे।

पुलिस ने बताया कि रविंद्र साहू और अभिषेक रजक दोनों गिरोह से जुड़े हुए हैं। पहले आरोपी सुवित से ड्रग्स खरीदते थे। फिर उनके गिरोह में जुड़ गए और ड्रग्स सप्लाई का काम करने लगे। आरोपी अपने ही खाते से पैसों का लेन-देन भी करते हैं। दोनों को टिकरापारा थाना में रखा गया है, जहां अधिकारी उससे पूछताछ कर रहे हैं। प्रारंभिक जांच में दोनों से चौंकाने वाली जानकारी मिली है। उसके आधार पर कुछ और लोगों की तलाश की जा रही है। छत्तीसगढ़ में पंजाब के रास्ते पाकिस्तान से आने वाले ड्रग्स मामले में पुलिस ने जांच तेज कर दी है। पिछले चार दिनों में पुलिस तीन अलग-अलग एंगल पर जांच कर रही है। ये जांच का मुख्य हिस्सा है, जिसके तहत तस्करों का लोकल कनेक्शन खंगाला जा रहा है। बता दें कि क्राइम ब्रांच की टीम ने 4 अगस्त को 42.87 ग्राम हैरोइन के साथ 9 लोगों को गिरफ्तार किया था।

इनमें से पुलिस ने तीन तस्कर लवजीत सिंह, सुवित श्रीवास्तव और जुनैद खान उर्फ सैफ चिल्ला को पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया है। आरोपी सैफ चिल्ला वीआईपी रोड स्थित हाइपर क्लब में बाउंसर था। वहां की सुरक्षा की जिम्मेदारी उसकी थी। तीनों आरोपियों से अलग-अलग एंगल पर पूछताछ जारी है। पूछताछ में कई तरह के खुलासे भी हुए हैं। इसमें बड़ी बात ये है कि रायपुर में वीकेंड में क्लब्स और पार्टियों में ड्रग्स की सप्लाई होती थी। ड्रग्स की सप्लाई में किन-किन लोगों की भूमिका थी, इसकी जांच जारी है। खासकर जुनैद खान उर्फ सैफ चिल्ला के बारे में पुलिस ज्यादातर जानकारी जुटा रही है। क्योंकि जुनैद वीआईपी रोड स्थित हाइपर क्लब में बाउंसर के रूप में काम करता था। जुनैद ने पिछले कई महीनों में बड़ी मात्रा में ड्रग्स खरीदा है। इसलिए पुलिस जांच कर रही है कि क्या जुनैद पैडलर के रूप में काम करता था या फिर यहां होने वाली पार्टियों में इसकी सप्लाई होती थी।

किसकी क्या भूमिका और पुलिस किस एंगल पर जांच कर रही

लवजीत सिंह पंजाब के गुरदासपुर का रहने वाला है। अब तक की जांच में ये सामने आया है कि वह उसे पाकिस्तान से ड्रग्स मिलता था, जिसे वह छत्तीसगढ़ में सप्लाई करता था।

इस एंगल पर जांच

लवजीत का पाकिस्तान कनेक्शन क्या है? वह पाकिस्तान में किसके संपर्क में था? वह ड्रग्स कैसे लाता था या उस तक इसकी सप्लाई किस तरह से होती थी? क्या उसके संपर्क में छत्तीसगढ़ के अन्य सप्लायर भी हैं? क्योंकि वर्तमान में केवल एक ही जानकारी ही पुलिस को मिली है।

लवजीत के जरिए सुवित तक ड्रग्स पहुंचता था। सुवित के जरिए ही रायपुर में ड्रग्स की सप्लाई होती थी। सुवित इसके लिए बाउंसर व अन्य लोगों के संपर्क में था।

नए एंगल पर जांच

सुवित का लोकल कनेक्शन क्या है? क्या वह लवजीत के अलावा किसी और बड़े तस्कर के जरिए उस तक ड्रग्स की सप्लाई होती थी? सुवित के लिए पैडलर के रूप में कौन-कौन काम करते थे? कौन-कौन ग्राहक थे, क्योंकि प्रारंभिक जांच में केवल 250 लोगों के ही नंबर पुलिस को मिले हैं।

पुलिस की जांच में अब तक जो बात सामने आई है, उसके अनुसार सैफ ने बड़ी मात्रा में ड्रग्स की खरीदी की है। उसने करीब 40 हजार का ड्रग्स खरीदा है।

इस एंगल पर जांच

सैफ चिल्ला के संपर्क में कितने बाउंसर थे? क्या सैफ पैडलर की तरह काम करता था? क्योंकि सैफ जिस हाइपर क्लब में बाउंसर के रूप में काम करता था, वहां वीकेंड में कई तरह के ऑफर चलाए जाते थे। क्या ऑफर की आड़ में ही युवाओं को क्लब में बुलाकर नशे का सामान परोसा जाता था।

ड्रग्स नेटवर्क

पंजाब के गुरदासपुर का रहने वाला लवजीत सिंह उर्फ बंटी इस इंटरनेशनल ड्रग्स सिंडिकेट का मास्टरमाइंड है। शुरुआती जांच में पता चला कि वह पाकिस्तान के तस्करों से ड्रग्स मंगवाता था, जिसे सीक्रेट तरीके से इंटरनेशनल बॉर्डर पार कराया जाता था।

भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पार होने के बाद हेरोइन पंजाब बॉर्डर एरिया में सुरक्षित ठिकानों पर छुपाया जाता था। यहीं से लवजीत का मुख्य ऑपरेशन चलता था। वह वहां से भारत के अलग-अलग राज्यों में ड्रग्स की थोक सप्लाई करता था, जिनमें छत्तीसगढ़ भी शामिल है। छत्तीसगढ़ में सुवित श्रीवास्तव हेरोइन खपाता था।

विदेशी नंबरों से बनाया नेटवर्क

ड्रग सिंडिकेट के आरोपियों ने सुरक्षा एजेंसियों को धोखा देने के लिए आरोपियों ने वर्चुअल नेटवर्क और इंटरनेशनल वर्चुअल नंबर का सहारा लिया। नेट कॉलिंग, वॉट्सऐप और टेलीग्राम पर वीडियो कॉल, लाइव लोकेशन और फोटो के जरिए ग्राहकों को ड्रग्स की डिलीवरी कन्फर्म की जाती थी।

इससे न केवल निगरानी से बचा जाता, बल्कि पहचान छुपाकर नेटवर्क को तेजी से फैलाया जा रहा था।

रायपुर में कमल विहार था ‘सप्लाई हब’

पंजाब से आने के बाद हेरोइन रायपुर के कमल विहार सेक्टर-4 स्थित एक फ्लैट में स्टोर होती थी। यह ठिकाना सुवित श्रीवास्तव का था, जो लवजीत से माल लेकर आगे सप्लाई करने का स्थानीय नेटवर्क चला रहा था। यह फ्लैट पूरे नेटवर्क का लॉजिस्टिक सेंटर था।जहां से माल छिपाकर अलग-अलग थोक डीलरों और पेडलर्स तक भेजा जाता था, और हर सदस्य को पहले से तय जिम्मेदारी सौंपी जाती थी।

क्लब की सप्लाई का लिंक तलाश रहे हैं।

ड्रग्स तस्करी में पकड़ा गया एक आरोपी हाइपर क्लब में बाउंसर था। शक है कि वह क्लब की पार्टियों में ड्रग्स की सप्लाई करता था। इसलिए क्लब व नाइट पार्टी में शामिल होने वालों के लिंक तलाश रहे हैं।

डॉ. लाल उमेद सिंह,

एसएसपी रायपुर

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