छत्तीसगढ़
PM जनमन योजना से पीव्हीटीजी परिवारों को मिल रहा है आधारभूत सुविधाएं
Shantanu Roy
30 March 2026 7:06 PM IST

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Mahasamund. महासमुंद। जिले में निवासरत विशेष पिछड़ी जनजाति कमार समुदाय का जीवन कभी अभावों और कठिनाइयों से घिरा हुआ था। ये लोग गांव और शहरों की मुख्य बसाहटों से दूर छोटे-छोटे डेरों में रहते थे। ऐसे में पक्की सड़क, बिजली, स्वच्छ पेयजल, स्कूल और स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव की स्थिति में इनका जीवन पूरी तरह जंगल और मजदूरी पर निर्भर था। वनोपज संग्रह, बांस के सामान बनाना और पारंपरिक खेती ही इनके जीविकोपार्जन के साधन थे। मुख्यधारा से दूरी के कारण इनकी बड़ी आबादी शासकीय योजनाओं के लाभ से भी वंचित थी। अधिकांश लोगों के पास आधार कार्ड, राशन कार्ड, बैंक खाता या आयुष्मान कार्ड जैसे जरूरी दस्तावेज नहीं थे। आदिम जाति अनुसंधान केंद्र के आधारभूत सर्वेक्षण 2015-16 के आधार पर महासमुंद जिले में इनका सर्वे कार्य किया गया था जिसके आधार पर वर्तमान में कुल 923 कमार परिवार में कुल जनसंख्या 3309 है, जिनमे पुरुष जनसंख्या 1614 एवं महिला जनसंख्या 1695 है। सर्वे के अनुसार महासमुंद विकासखंड में 41 ग्राम, बागबाहरा विकासखंड में 33 ग्राम एवं पिथौरा विकासखंड में 2 ग्राम कुल 76 ग्राम में कमार परिवार निवासरत है। जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर शुरू हुई प्रधानमंत्री जनजातीय न्याय महा अभियान (पीएम-जनमन) योजना पीव्हीटीजी समुदाय के लिए उम्मीद की किरण बनकर आई।
जिला प्रशासन द्वारा इस योजना को गंभीरता से लागू करते हुए सबसे पहले कमार जनजाति के हर परिवार तक पहुंचने का प्रयास किया। जिससे जिले के 26 सड़क विहीन बसाहटों में पक्की सड़कों का निर्माण किया गया है। इससे दूर-दराज के डेरों का संपर्क मुख्य गांवों और शहरों से जुड़ने लगा। नल-जल योजना के माध्यम से सभी घरों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाया जा रहा है। जिन घरों में कभी अंधेरा रहता था, वहां अब बिजली पहुंच चुकी है, अब बच्चे रात में भी पढ़ाई कर पा रहे हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 678 कच्चे घरों की जगह पक्के मकानों का निर्माण हुआ, जिससे इन परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन मिला। बहुद्देशीय केंद्रों की स्थापना से एक ही स्थान पर आंगनवाड़ी, स्वास्थ्य सेवाएं और आजीविका से जुड़ी गतिविधियां शुरू हुईं, जिससे महिलाओं और बच्चों को विशेष लाभ मिला। मोबाइल मेडिकल यूनिट के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाएं अब सीधे इन बस्तियों तक पहुंच रही हैं, जिससे इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ता। आधारभूत सुविधाओं के साथ लोगों को उनके अधिकारों से भी जोड़ा गया। विशेष शिविरों के माध्यम से शत प्रतिशत पात्र हितग्राहियों के आधार कार्ड, राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, बैंक खाते और जाति प्रमाण पत्र बनवाए गए। किसान सम्मान निधि हेतु 1461 का लक्ष्य था जिसे शत प्रतिशत पूर्ण कर लिया गया है। अब हर परिवार को नियमित रूप से राशन मिल रहा है। आयुष्मान कार्ड से मुफ्त इलाज की सुविधा मिलने लगी है और बैंक खाते खुलने से शासकीय योजनाओं की राशि सीधे उनके खातों में पहुंच रही है। आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। जहां पहले जीवन संघर्ष और अभावों में बीतता था, वहीं अब आत्मविश्वास और आशा की नई रोशनी दिखाई देती है तथा धीरे-धीरे यह समुदाय विकास की मुख्यधारा से जुड़ता जा रहा है।
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