छत्तीसगढ़

प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना ने बदली दिव्यांग परस कमार की जिंदगी

Shantanu Roy
17 Sept 2026 9:19 PM IST
प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना ने बदली दिव्यांग परस कमार की जिंदगी
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छग
Baloda Bazar. बलौदाबाजार। कसडोल विकासखंड अंतर्गत ग्राम बल्दाकछार के निवासी परस कमार विशेष पिछड़ी जनजाति कमार समुदाय से संबंध रखते हैं। उनका जीवन संघर्ष, अभाव और कठिनाइयों से भरा रहा है। परस कमार पैर से दिव्यांग हैं, जिसके कारण रोजमर्रा के छोटे-छोटे कार्य भी उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं थे। पीएम जनमन योजना के तहत पक्का घर बन जाने से अब उनके जिंदगी मे काफ़ी बदलाव आया है। बचपन में ही पिता का साया सिर से उठ गया और उनकी माताजी भी अति वृद्ध हैं, जो उम्र और
कमजोरी
के कारण स्वयं सहारे की मोहताज हैं।आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि वर्षों तक वे एक कच्चे और जर्जर मकान में रहने को मजबूर थे। बरसात के दिनों में छत से टपकता पानी, ठंडी रातों में टूटती दीवारों से आती हवा, और गर्मी के मौसम में तपता हुआ घर यही उनकी जिंदगी की सच्चाई थी। हर मौसम उनके लिए एक नई परीक्षा लेकर आता था। रातों को कई बार यह डर सताता था कि कहीं कमजोर दीवारें ढह न जाएं। अपनी इस हालत को देखकर परस कमार का मन बार-बार टूट जाता था, लेकिन गरीबी के आगे वे बेबस थे।

एक पक्के और सुरक्षित घर का सपना उनके लिए किसी दूर के सपने जैसा था, जिसे पूरा करना लगभग असंभव लग रहा था। लेकिन प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना ने उनके जीवन में उम्मीद की एक नई किरण जगाई। जिला पंचायत के सतत मार्गदर्शन, जनपद पंचायत कसडोल के सहयोग एवं ग्राम पंचायत के प्रयासों से विशेष पिछड़ी जनजाति कमार वर्ग से होने के कारण उन्हें योजना के अंतर्गत आवास स्वीकृत हुआ। आवास निर्माण कार्य समय पर प्रारंभ हुआ और धीरे-धीरे उनका सपना आकार लेने लगा।साथ ही, मनरेगा अंतर्गत 90 मानव दिवस की मजदूरी राशि भी अभिसरण के माध्यम से उन्हें प्राप्त हुई, जिससे आवास निर्माण में आर्थिक सहयोग मिला। इस राशि ने उनके लिए निर्माण कार्य को और आसान बनाया तथा आत्मनिर्भरता का
संबल प्रदान
किया। परस कमार का पक्का मकान बनकर तैयार है। अब सुरक्षित छत के नीचे सुकून की सांस ले रहे हैं। बरसात की चिंता नहीं, ठंड की रातों का डर नहीं और गर्मी की तपिश का भय नहीं अब उनके जीवन में सुरक्षा, सम्मान और आत्मविश्वास है। यह घर केवल ईंट और सीमेंट से बना मकान नहीं, बल्कि उनके संघर्षों पर मिली सबसे बड़ी जीत है। अपनी आंखों में खुशी के आंसू लिए परस कमार कहते हैं-“मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरे जैसे गरीब और दिव्यांग व्यक्ति को भी पक्का घर मिलेगा।इस सुरक्षित पक्का घर में देखकर लगता है जैसे भगवान ने मेरी सबसे बड़ी इच्छा पूरी कर दी। अब हमें डर नहीं लगता, अब हमें लगता है कि हमारा भी इस दुनिया में एक सम्मानजनक ठिकाना मिल गया है।"
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