छत्तीसगढ़

प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय 9.37 प्रतिशत बढ़ी

Nilmani Pal
16 Sept 2025 1:00 PM IST
प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय 9.37 प्रतिशत बढ़ी
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रायपुर। साय सरकार बनने के बाद से प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय 9.37 प्रतिशत बढ़ गई है, यह वृद्धि दर राष्ट्रीय औसत से अधिक है और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रही है। वहीं प्रचालित भावों में विकास दर 10.89 फीसदी होने का अनुमान है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ में प्रति व्यक्ति आय में 9.37 फीसदी की वृद्धि हुई है। इससे प्रति व्यक्ति आय 1 लाख 48 हजार 922 रुपए से बढ़कर 1 लाख 62 हजार 870 हो गई है। जबकि भारत के प्रति व्यक्ति की आय में 8.66 फीसदी की ही वृद्धि दर्ज हुई थीं। छत्तीसगढ़ में आर्थिक प्रगति उत्साहजनक है। कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के कारण प्रदेश की अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है। साथ ही, राज्य की कैपिटल इनकम में भी वृद्धि देखी जा रही है। बता दें कि छत्तीसगढ़ के सकल राज्य घरेलू उत्पाद स्थिर भाव में कृषि एवं संबंद्ध क्षेत्र के अलावा उद्योग में अच्छी ग्रोथ हुई है।



ताजा आंकड़े के अनुसार छत्तीसगढ़ ने 2024-25 में 7.51 फीसदी की विकास दर हासिल की, जो राष्ट्रीय औसत 6.37 फीसदी से अधिक है। कृषि में 16.80 फीसदी, उद्योग में 47.90 फीसदी और सेवा में 35.30 फीसदी क्षेत्रों में राज्य का विशिष्ट योगदान आर्थिक सशक्तिकरण को दर्शाता है। प्रति व्यक्ति आय में भी राज्य की वृद्धि दर राष्ट्रीय औसत से अधिक है। छत्तीसगढ़ की साय सरकार 2047 विजन डॉक्यूमेंट के तहत अल्पकालिक, मध्यमकालिक, दीर्घकालिक लक्ष्य निर्धारित किए हैं। सरकार ने 5 साल में जीडीपी को दो गुना करने का लक्ष्य रखा है, जिसमें निवेश आकर्षित करने, पर्यटन-हैल्थकेयर को बढ़ावा देने व वेडिंग डेस्टिनेशन बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

देश की जीडीपी में कृषि की अहम भूमिका है और छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था पूरी तरह खेती-किसानी पर निर्भर है। इसलिए छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है। बीते डेढ़ साल में किसानों के लिए जो फैसले लिए गए हैं उनसे खेती को नई ताकत मिली है। इससे किसानों का मनोबल बढ़ा है और आर्थिक स्थिति में सुधार आया है।

खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 में राज्य सरकार ने 24.75 लाख किसानों से 144.92 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा, जो अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। इसके बदले किसानों को समर्थन मूल्य के तौर पर 32 हजार करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। इसके अलावा किसान समृद्धि योजना के तहत अंतर की राशि के रूप में 13,320 करोड़ रुपये सीधे खातों में भेजे गए। वहीं, खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में 149.25 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी कर 34,500 करोड़ रुपये का भुगतान किसानों को किया गया और 12 हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि सीधे खातों में भेजी गई। राज्य सरकार ने किसानों से किया वादा निभाते हुए प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदी और दो साल का बकाया धान बोनस 3716 करोड़ रुपये का भी भुगतान किया। इससे किसानों में खुशी की लहर दौड़ गई है। किसान मानते हैं कि साय सरकार ने दिखा दिया कि खेती से ही राज्य की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और किसानों का जीवन बेहतर बनेगा।

ऑयल पाम एक दीर्घकालिक आमदनी देने वाली फसल

रोपण के तीसरे वर्ष से उत्पादन शुरू होकर लगातार 25-30 साल तक चलता है। प्रति हेक्टेयर औसतन 20 टन उपज मिलती है, जिससे किसान को हर साल ढाई से तीन लाख रुपये की आमदनी हो सकती है। सरकार किसानों को हर संभव सहयोग दे रही है। ऑयल पाम योजना के अंतर्गत प्रति हेक्टेयर 29 हजार रुपये मूल्य के 143 पौधे निःशुल्क दिए जाते हैं। पौधरोपण, फेंसिंग, सिंचाई और रखरखाव की लागत लगभग 4 लाख रुपये आती है, जिस पर केंद्र से 1.30 लाख और राज्य से 1.29 लाख रुपये का अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके साथ ही बोरवेल, पम्प सेट, वर्मी कम्पोस्ट यूनिट, पॉम कटर और ट्रैक्टर ट्रॉली जैसी सुविधाओं पर भी सब्सिडी दी जा रही है।

छत्तीसगढ़ में किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर अल्पकालीन कृषि ऋण की सुविधा 1 अप्रैल 2014 से मिल रही है। 5 लाख रुपये तक का कर्ज शून्य ब्याज पर दिया जा रहा है। खरीफ 2024 में 15.21 लाख किसानों को 6912 करोड़ रुपये का कृषि ऋण दिया गया। वर्ष 2025 में यह लक्ष्य बढ़ाकर 7800 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जिसमें अभी तक 5124 करोड़ रुपये वितरित हो चुके हैं। किसानों को सिंचाई सुविधा देने के लिए प्रधानमंत्री सिंचाई योजना के साथ-साथ सौर सुजला योजना भी चलाई जा रही है। जिन इलाकों में बिजली नहीं है, वहां सौर पंप के जरिए सिंचाई की सुविधा दी जा रही है। राज्य सरकार किसानों और भूमिहीन मजदूरों की स्थिति सुधारने के लिए पूरी ताकत से काम कर रही है। सरकार ने कृषि बजट में 33% की बढ़ोतरी की है। वर्ष 2024-25 में 13,435 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए किसान उन्नति योजना के लिए 10,000 करोड़ रुपये रखे गए हैं और 5 एचपी तक के कृषि पंपों को मुफ्त बिजली देने के लिए 3,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

भूमिहीन कृषि मजदूरों को सालाना 10,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। इसके लिए 600 करोड़ रुपये का प्रावधान है। दलहन और तिलहन की खरीदी के लिए 80 करोड़ रुपये, फसल बीमा योजना के लिए 750 करोड़ रुपये और कृषक समग्र विकास योजना के लिए 150 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। प्रदेश के 26 लाख से ज्यादा किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ मिल रहा है, जिसमें सालाना 6000 रुपये सीधे खातों में ट्रांसफर किए जाते हैं। इसके अलावा केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ से केन्द्रीय पूल में 78 लाख मीट्रिक टन चावल जमा करने का लक्ष्य तय किया है।

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