छत्तीसगढ़

पार्किंग माफिया का आतंक, खुलेआम GST चोरी

Nilmani Pal
8 Oct 2025 11:47 AM IST
पार्किंग माफिया का आतंक, खुलेआम GST चोरी
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पार्किंग मालिकों का गिरोह सरकार को हर साल लगा रहा करोड़ों का चूना

बिना जीएसटी नंबर के पार्किंंग टेंडर कैसे पास, जीएसटी नंबर है तो जीएसटी की वसूली क्यों नहीं...?

रायपुर (जसेरि)। पार्किंग माफिय़ा प्रदेश में जीएसटी की चोरी बेखौफ होकर कर रहे है। शासकीय कार्यालय कलेक्टर कार्यालय जिला अस्पताल में अ बेडकर अस्पताल डीकेएस हॉस्पिटल बस स्टैंड ए स हॉस्पिटल की तहसील कार्यालय कलेक्टर द ़तर, बिजली ऑफि़स गुढिय़़ारी कार्यालय और एयरपोर्ट सभी जगह में करोड़ों के टेंडर पार्किंग माफिय़ाओं के द्वारा लिया जाता है लेकिन किसी भी पार्किंग माफिय़ा ने जीएसटी नंबर नहीं लिया हो वो तो सीधे जीएसटी चोरी कर रहे हैं वर्षों से पार्किंग ठेका करोड़ का हो रहा है लेकिन दुर्भाग्य हमारे प्रदेश का और हमारे जनता का जो करोड़ों रुपया पार्किंग के नाम पर माफिय़ा वसूला कर रहे है और सरकार को चूना लगा रहे हैं ।

राज्योत्सव के नाम पर ठेकेदार जीएसटी नहीं पटा रहे जिसके सरकार को सीधे राजस्व को नुकसान हो रहा है। सालाना 3-4 करोड़ के पार्किंग माफिय़ाओं का ठेका प्रति साइकिल स्टैंड के अनुसार होता है। इसके अनुसार पार्किंग माफिय़ा जो छुटभैये नाड़ा पायजामा छाप नेता को अपने अधीन किसी कर्मचारी को रखकर सायकल स्टैंड का संचालन करते हैं यानी वसूली करते है। मसल पावर और गुंडों-बदमाशों का स्टैंड में भरपूर उपयोग हो रहा है या उपयोग किया जा रहा है। साइकिल स्टैंड में किसी प्रकार की वाहन मालिक द्वारा रसीद या बिल माँगे जाने पर सीधे गुंडागर्दी पर उतर आते है। ये सिलसिला लगातार वर्षों से जारी है। पुलिस भी पार्किंग माफिय़ाओं की इस आतंक से अच्छी तरीक़े से वाकिफ़़ है । उसके बावजूद किसी प्रकार क़ानूनी व्यवस्था पार्किंग स्थल में नहीं होने से वाहन मालिकों को माफिय़ाओ्ं के दुव्र्यहार का सामना पड़ता है। उल्टा पार्किंग माफिय़ा के इशारों पर साइुिकल या कार मालिकों को दंडित किया जाता है चमकाया जाता है । पूरे प्रदेश में पार्किंग माफिय़ाओं का दबदमा चरम सीमा पर सिर चढक़र बोल रहा है । कांग्रेस के छुटभैये नेताओं ने अपनी गेंग बनाकर 2014 के बाद से पार्किंग माफिय़ा गिरोह बनाया और निरंतर कांग्रेस की सरकार में गिरोह ने ज़बरदस्त तरीक़े से सभी साइकल स्टैंडों में अपना क़ब्ज़ा जमा लिया है अब किसी भी प्रकार के बाहरी या अन्य राजनीतिक दल के नेताओं के किसी भी सदस्य को साइिकल स्टैंड का ठेका लेना नामुनकिन जैसा हो गया है । खुलेआम नाड़ा पायजामा छाप छुटभैया कांग्रेसी नेताओं पार्किंग माफिय़ाओ्ं ने गिरोह बनाकर जीएसटी चोरी कर रहे । जीएसटी विभाग को भी अभी तक पार्किंग माफिय़ा की इस कारस्तानी और जीएसटी चोरी का बिलकुल भी ध्यान नहीं आया जिसके कारण पार्किंग माफिय़ाओं का जीएसटी चोरी करने का मनोबल बढ़ गया है । ए स हॉस्पिटल के ठेकेदार ने तो हद ही पार कर दी तालिबानी हुक्म जारी कर पत्रकारों को प्रेस की गाड़ी को हॉस्पिटल के परिसर आने से मना कर दिया और यहाँ तक जीएसटी चोरी करने का सबसे बढ़ा रिकॉर्ड भी बनाते चले आ रहे । बिना जीएसटी नंबर के बिना रसीद में उल्लेख किए बिना धड़ाधड़ साइिकल मोटरसाइकल और कार मालिकों से मोटी रक़म वसूल रहे है।

ग़ौरतलब है कि ए स में प्रतिदिन छह हज़ार से ज़्यादा साइिकल मोटरसाइकल कारें पार्किंग में खड़ी होती है इस हिसाब से करोड़ों की जीएसटी चोरी खुलेआम ए स हॉस्पिटल के संरक्षण में हो रही है और ए स प्रशासन गुंडों का सहारा ले का अख़बार के बाद पत्रकारों से लेकर सभी प्रकार के पत्रकारों को प्रतिबंधित कर दिया है जो पूर्णता ग़ैर क़ानूनी है और लोकतंत्र के ख़िलाफ़ है

जीएसटी चोरी का खेल सालों से जारी

जानकारों के अनुसार, पार्किंग माफियाओं ने वर्षों से इस प्रणाली को अपने कब्जे में ले रखा है। कई ठेकेदार छोटे-छोटे राजनीतिक नेताओं, विशेष रूप से छुटभैये कांग्रेसी नेताओं, के संरक्षण में यह कारोबार चला रहे हैं। इन नेताओं ने अपने विश्वस्त लोगों को कर्मचारी के रूप में रखकर शहर के साइकिल, बाइक और कार पार्किंग स्टैंडों पर नियंत्रण जमा लिया है। बताया जा रहा है कि मसल पावर और गुंडों के सहारे ये ठेकेदार पार्किंग वसूलते हैं। यदि कोई वाहन मालिक या उपभोक्ता उनसे रसीद मांगता है, तो वे खुलेआम गाली-गलौज और मारपीट पर उतर आते हैं। कई स्थानों पर पार्किंग स्टाफ द्वारा लोगों को धमकाने की घटनाएं सामने आई हैं, लेकिन प्रशासन की कार्रवाई अब तक न के बराबर रही है।

एस हॉस्पिटल बना पार्किंग माफिया का केंद्र

सबसे हैरान करने वाली स्थिति ए स रायपुर परिसर में देखी जा रही है। यहां के पार्किंग ठेकेदार ने न केवल जीएसटी चोरी में नया रिकॉर्ड बनाया है, बल्कि उसने पत्रकारों और प्रेस वाहनों को पार्किंग क्षेत्र में प्रवेश से प्रतिबंधित कर दिया है। स्थानीय पत्रकारों के अनुसार, ए स परिसर में पार्किंग ठेकेदार ने तालिबानी फरमान जारी करते हुए मीडिया वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी है। वहीं, पार्किंग स्टाफ बिना किसी रसीद या प्रिंटेड टिकट के साइकिल, बाइक और कार मालिकों से मोटी रकम वसूल कर रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, ए स हॉस्पिटल में प्रतिदिन लगभग 6,000 से अधिक वाहन पार्क होते हैं। यदि प्रति वाहन औसतन 20 से 30 की वसूली मानी जाए, तो केवल ए स परिसर से ही हर महीने कई करोड़ रुपए की नकद आमदनी होती है। परंतु, इसमें से एक भी रुपया जीएसटी या सरकारी खजाने में नहीं जाता।

प्रशासन और पुलिस की आंखों के सामने चल रहा खेल

आम नागरिकों और पार्किंग उपभोक्ताओं का कहना है कि पुलिस और नगर निगम प्रशासन इन माफियाओं की गतिविधियों से पूरी तरह वाकिफ है। फिर भी कोई स त कार्रवाई नहीं होती। जब कभी पुलिस को शिकायत की जाती है, तो उल्टा वाहन मालिकों पर ही जुर्माना या कार्रवाई कर दी जाती है। कई स्थानों पर पार्किंग माफियाओं के गुंडों ने वाहन चालकों और दुकानदारों से झगड़े किए, मारपीट की और उन्हें डराया-धमकाया भी। बावजूद इसके, किसी पर भी कठोर कार्रवाई नहीं हुई। जानकारों का कहना है कि राजनीतिक संरक्षण मिलने के कारण ये माफिया अब खुलेआम सरकारी परिसरों में वसूली का जाल बिछाए बैठे हैं।

जीएसटी विभाग और नगर निगम की भूमिका पर सवाल

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जीएसटी विभाग ने अब तक इन पार्किंग ठेकेदारों की जांच नहीं की है। जबकि, नियमों के अनुसार हर ठेकेदार को जीएसटी पंजीयन कराना आवश्यक है। इसके तहत हर वाहन मालिक को रसीद देना और मासिक टैक्स जमा करना होता है। मगर, रायपुर समेत पूरे प्रदेश में यह व्यवस्था सिर्फ कागजों पर है। विशेषज्ञों के अनुसार, पार्किंग माफियाओं द्वारा हो रही इस कर चोरी से राज्य सरकार को हर साल करोड़ों रुपए का नुकसान हो रहा है। यदि इन सभी ठेकों की सही ऑडिट और जांच की जाए, तो यह घोटाला बड़े पैमाने पर सामने आ सकता है।

राजनीतिक गठजोड़ बना मुख्य वजह

सूत्रों का कहना है कि 2014 के बाद से पार्किंग व्यवस्था को लेकर कांग्रेस से जुड़े कुछ स्थानीय नेताओं ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए एक संगठित गिरोह बना लिया है। इस गिरोह ने शहर के लगभग सभी प्रमुख पार्किंग स्थलों पर कब्जा कर लिया है। अब स्थिति यह है कि यदि कोई बाहरी व्यक्ति या अन्य राजनीतिक दल से जुड़ा व्यक्ति पार्किंग ठेका लेने की कोशिश करता है, तो उसे तरह-तरह की प्रशासनिक और राजनीतिक अड़चनों का सामना करना पड़ता है। धीरे-धीरे पूरा सिस्टम इन माफियाओं के नियंत्रण में आ गया है।

जनता में आक्रोश, कार्रवाई की मांग

इस पूरे प्रकरण को लेकर आम नागरिकों में आक्रोश है। लोगों का कहना है कि सरकार को इन पार्किंग ठेकेदारों की जीएसटी चोरी, गुंडागर्दी और राजनीतिक संरक्षण की जांच करनी चाहिए। नागरिक संगठनों ने मांग की है कि सरकार एक विशेष जांच दल बनाकर पूरे प्रदेश में पार्किंग ठेकों की समीक्षा करे और संबंधित अफसरों की जि मेदारी तय करे। इसके अलावा, पत्रकार संगठनों ने भी ए स परिसर में प्रेस वाहनों पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर तीखी नाराजगी जताई है और इसे लोकतंत्र व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया है।

राज्य की साख पर सवाल

छत्तीसगढ़ की राजधानी में सरकारी परिसरों के भीतर इस तरह के माफिया नेटवर्क का सक्रिय रहना राज्य की प्रशासनिक साख पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही इस मुद्दे पर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह आने वाले समय में एक बड़ा राजस्व घोटाला और कानून व्यवस्था का संकट बन सकता है। आने वाले दिनों में भी राज्योत्सव का ठेका परदेशिया जीएसटी चोर मिलकर लेने की तैयारी में। नाड़ा पैजामा छाप नेता परदे के पीछे।

प्रदेश सहित राजधानी में पार्किंग माफियाओं की करतूतें सुर्खियों में

राजधानी की जनता पार्किंग माफियों के आतंक से त्रस्त है। जिला प्रशासन पुलिस प्रशासन और राजनेताओं के संज्ञान में होने के बावजूद आएदिन आम जनता से अवैध वसूली और गुंडागर्दी की जाती है। शहर के सरकारी कार्यालयों से लेकर बड़े अस्पतालों और सार्वजनिक स्थलों तक, पार्किंग के नाम पर करोड़ों रुपए की अवैध वसूली की जा रही है। खास बात यह है कि इन माफियाओं ने न तो जीएसटी नंबर लिया है और न ही किसी प्रकार का टैक्स जमा किया जा रहे है। इस कारण यह पूरा नेटवर्क राज्य और केंद्र सरकार दोनों के राजस्व को भारी नुकसान पहुंचा रहा है। मिली जानकारी के अनुसार, पार्किंग का ठेका राजधानी रायपुर में हर साल 3 से 4 करोड़ रुपए प्रति स्टैंड के हिसाब से दिया जाता है। मगर, ठेका लेने वाले पार्किंग संचालक और उनसे जुड़े माफिया किसी भी स्तर पर जीएसटी नंबर का उल्लेख पावती में नहीं करते है। शहर में कलेक्टर कार्यालय, जिला अस्पताल, अंबेडकर अस्पताल, टीबी हॉस्पिटल, ए स, बस स्टैंड, एयरपोर्ट, कलेक्टर ऑफिस, बिजली विभाग का गुढिय़ारी कार्यालय और तहसील कार्यालय जैसे दर्जनों शासकीय परिसरों में यह अवैध वसूली बेखौफ जारी है। यहां भी जीएसटी चोरी।

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