
2004 के चेक, 2009 का पंजीयन, बिना डायवर्जन औद्योगिक उपयोग-शासकीय ज़मीन तक की बिक्री
भूपेश सरकार के कार्यकाल में दिखावे के लिए जांच टीम का गठन कर 2022 में सीमेंट फैक्ट्री के मामले को दबाया गया
छत्तीसगढ़ में प्राय: सभी सीमेंट फैक्ट्रियां अवैध लाइमस्टोन के माइनिंग में कार्यरत
सीमेंट कंपनी के मालिक पैसों के दम पर छत्तीसगढ़ के पर्यावरण को तहसनहस कर पर्यावरण असंतुलन बना रहे
छत्तीसगढ़ की ढाई करोड़ जनता पर्यावरण संरक्षण मंडल के भ्रष्टाचार और मनमाने माइनिंग और औद्योगिक करण के कारण वायु प्रदूषण के साथ जीने के लिए मजबूर
एनजीटी के नोटिफिकेशन औरअधिनियम को छत्तीसगढ़ में पर्यावरण मंडल ने रद्दी की टोकरी में डाला
खुलकर चोरी: शासकीय जमीन को रजिस्टर्ड डीड (सेल डीड) में बिक्री होना दर्शाया, किसकी अनुमति से शासकीय जमीन रजिस्ट्री हुई, अपराध तो बनता है....
रायपुर (जसेरि)। रिंगनी-नेवधा साइडिंग भूमि सौदे में संगठित तौर पर शासकीय ज़मीन हड़पने का गंभीर अपराध किया गया है। शासकीय ज़मीन की बिक्री नहीं की जा सकती लेकिन इनकी सेल डीड मैं स्पष्ट तौर पर शासकीय भूमि का खसरा दर्ज है। इतना ही नहीं सेल डीड में 2004 में ही चेक के द्वारा मुगतान होना बताया जाता है जबकि भूमि की रजिस्ट्री 2009 में की गई है। इसका मतलब साफ़ है भूमि खऱीदी बिक्री में बड़ा फर्जीवाड़ा करने के साथ स्टैम्प ड्यूटी की चोरी की गई है। जमीन का डायवर्सन किए बगैर ही बिक्रीनामा तैयार कर रजिस्ट्री कराई गई। जमीन ना हि संबंधित कंपनी को आबंटित हुई है और ना हि नामांतरण हुआ है। सेलडीड में जोड़े गए खसरों में कई घासमद और पब्लिक उपयोग का दर्शाया गया है। इतना ही नहीं बिना पर्यावरणीय स्वीकृति के साइडिंग का विस्तार किया गया। जो गंभीर अनियमितता को उजागर करता है। आवास एवं पर्यावरण विभाग के अवर सचिव डीआर सोन्टापर ने सितंबर 2021 में पर्यावरण संमति की सघन जांच कर इसे रद्द करने पर्यावरण संरक्षण मंडल के सचिव को निर्देश दिये थे जिस पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
रिंगनी - नेवधा साइडिंग भूमि सौदे में संगठित धांधली
पूर्व जिला पंचायत सदस्य और कांग्रेस नेता बसंत आडिल द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों के अनुसार प्रस्तुत प्रकरण रिंगनी-नेवधा प्राइवेट रेलवे साइडिंग से संबंधित है, जो मूलत: ग्रासिम सीमेंट द्वारा वर्ष 1994-95 में स्थापित की गई थी। इस साइडिंग का उपयोग रेलमार्ग से औद्योगिक सामग्री के लोडिंग- अनलोडिंग के लिए किया जाता रहा। वर्ष 2009 में रायपुर हैंडलिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड (क्र॥ढ्ढरु) को भूमि स्थानांतरित किए जाने के दौरान कई गंभीर विसंगतियाँ, अनियमितताएँ और संभावित धोखाधड़ी सामने आई हैं, जो अब तक न केवल विभागीय स्तर पर अनदेखी की गई बल्कि संबंधित विभागों की मिलीभगत की ओर भी संकेत करती हैं।
1) मुख्य विसंगतियाँ और पृष्ठभूमि
सेल-डीड दिनांक 27.11.2009 के अनुसार कुल 12.678 हेक्टेयर भूमि, ग्राम नेवधा की 33 खसरा संख्याओं पर आधारित है। इस दस्तावेज़ में भुगतान हेतु जिन चेकों का उल्लेख किया गया है, वे वर्ष 2004 के हैं। अर्थात्, भुगतान और पंजीयन के बीच पाँच वर्ष से अधिक का अंतर पाया गया है। यह अंतर संभावित रूप से गाइडलाइन वैल्यू से बचने और संपत्ति के मूल्य को कम दिखाने का प्रयास प्रतीत होता है।
पटवारी द्वारा तैयार बिक्री नकल में वर्ष 2008 की टीप दर्ज है, परंतु उसी पृष्ठ पर माह और तिथि को संशोधित कर 2009 किया गया है। नीचे तहसीलदार के प्रमाणन की तिथि 09.02.2009 दर्ज है, जिससे दस्तावेजों में बैक-डेटिंग और संशोधन की आशंका उत्पन्न होती है।
2) नामांतरण प्रक्रिया में त्रुटियाँ
नामांतरण रजिस्टर के अनुसार, भूमि का स्वामित्व परिवर्तन केवल विशेष ग्राम सभा बैठक दिनांक 23.09.2009 के प्रस्ताव के आधार पर किया गया। परंतु तहसीलदार द्वारा कोई विधिवत आदेश पारित नहीं किया गया। राजस्व संहिता के अनुसार ग्राम सभा का प्रस्ताव केवल अनुशंसा होता है, आदेश नहीं।
3) शासकीय भूमि का समावेश
सेल-डीड में जिन 33 खसरा संख्याओं का उल्लेख है, उनमें से खसरा क्रमांक 170/1, 170/3, 170 / 4 एवं 180/2 जैसी भूमियाँ घासमद और शासकीय भूमि हैं। इन खसरों को निजी स्वामित्व में जोड़ा जाना एक गंभीर उल्लंघन है और राजस्व नियमों की दृष्टि से अपराध की श्रेणी में आता है।
4) दो ग्रामों की भूमि - एक ग्राम में पंजीयन
साइडिंग का निर्माण ग्राम नेवधा एवं ग्राम रिंगनी दोनों की भूमि पर हुआ, परंतु पंजीयन प्रक्रिया में केवल नेवधा ग्राम का उल्लेख किया गया। रिंगनी ग्राम की भूमि छिपाया गया जिससे भूमि की वास्तविक स्थिति अस्पष्ट रही।
5 ) औद्योगिक डायवर्जन का अभाव
संपूर्ण भूमि 1994 से 2020 तक औद्योगिक उपयोग में रही, परंतु इसका कोई औद्योगिक डायवर्जन नहीं कराया गया। राजस्व अभिलेखों में भूमि अब भी कृषि प्रयोजन के रूप में दर्ज है, जो राजस्व व पर्यावरण कानूनों का उल्लंघन है।
6) संभावित आपराधिक उल्लंघन
यह प्रकरण की धाराओं 420, 467, 468, 471, 120-क्च तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत दंडनीय है। राजस्व, पंजीयन, पंचायत व उद्योग विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत स्पष्ट प्रतीत होती है।
7) आवश्यक कार्रवाई हेतु मांग
1) राजस्व विभाग द्वारा संपूर्ण नामांतरण, बिक्री नकल एवं डायवर्जन अभिलेख की फोरेंसिक जांच। 2) पंजीयन विभाग द्वारा भुगतान पंजीयन अंतर की जांच व अतिरिक्त स्टाम्प शुल्क वसूली ।
3) शासकीय भूमि की पुन: प्रविष्टि व अवैध पंजीयन निरस्तीकरण ।
4) आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (श्वह्रङ्ख) या सीबीआई द्वारा जांच।
5) ष्टश्वष्टक्च द्वारा जारी पर्यावरण स्वीकृतियों की पुन: समीक्षा ।
8) निष्कर्ष
यह मामला दर्शाता है कि एक निजी कंपनी ने प्रशासनिक संरक्षण में सरकारी भूमि का दुरुपयोग कर पंजीयन, नामांतरण व उपयोग में कई अनियमितताएँ कीं । संपूर्ण प्रकरण की निष्पक्ष जांच व जिम्मेदार अधिकारियों पर आपराधिक कार्रवाई आवश्यक है।
बिना डायवर्जन, शासकीय ज़मीन की बिक्री
1) संक्षिप्त सार
निर्माता: ग्रासिम सीमेंट (1994 से संचालन, दो ग्राम-नेवधा व रिंगनी - की भूमि पर निजी साइडिंग) क्रेता: रायपुर हैंडलिंग एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रा. लि. (क्र॥ढ्ढरु)
सेल-डीड: 27.11.2009 (उप-पंजीयक, सिमगा) - कुल 12.678 हे., 33 खसरे
घोर विसंगतियाँ:
1) डीड में भुगतान के चेक 2004 के, जबकि पंजीयन 2009 में - पाँच साल से अधिक का अप्राकृतिक गैप । 2) पटवारी बिक्री- नकल पर 2008 की टीप; उसी पन्ने पर तारीख / माह को री-राइट / ओवर राइट कर 2009 दर्शाया गया; नीचे तहसीलदारी प्रमाणन का दिनांक 09.02.2009 - अन्तर्विरोध 7
(3) नामांतरण रजिस्टर में आधार विशेष ग्राम सभा प्रस्ताव (23.09.2009) - तहसीलदार का विधिवत आदेश अनुपस्थित।
4) 33 खसरे में से कई खसरे शासकीय / आम-भूमि (घासमद/पब्लिक उपयोग) के - फिर भी उन्हें बिक्री- नकल / सेल - डीड में जोड़ा गया।
5) भूमि दो ग्रामों में फैली, मगर पंजीयन / विवरण एक ग्राम (नेवधा) के नाम से प्रमुख रूप में, डायवर्जन शून्य रहते हुए वर्षों तक औद्योगिक उपयोग।
2) क्रमवार तथ्य व समयरेखा
1994 से: ग्रासिम द्वारा नेवधा रिंगनी पर निजी साइडिंग, पर औद्योगिक डायवर्जन नहीं । 2004: अग्रिम/आंशिक भुगतान; सेल-डीड में चेक सूची (ढ्ढष्ठक्चढ्ढ/ ढ्ढष्टढ्ढष्टढ्ढ / ॥ष्ठस्नष्ट /अन्य)। 2008-09: बिक्री नकल में ओवर राइटिंग; 09.02.2009 तहसीली सत्यापन दिनांक । 23.09.2009: ग्राम सभा प्रस्ताव, नामांतरण अनुशंसा (आदेश नहीं)।
9-11.11.2009: नामांतरण प्रविष्टि ।
27.11.2009: सेल-डीड पंजीयन (12.678 हे., 33 खसरे, दो ग्रामों की भूमि, एक ग्राम प्रधान) ।
3) दस्तावेजी विसंगतियाँ
्र) 2004 के चेक बनाम 2009 पंजीयन - पाँच वर्ष का अंतर ।
क्च) बिक्री- नकल में तारीख़ी ओवर राइटिंग - बैक डेटिंग की संभावना ।
ष्ट) शासकीय/आम-भूमि का समावेश - अवैध निजी हस्तांतरण ।
ष्ठ) दो ग्राम (नेवधा व रिंगनी) की भूमि - पंजीयन में एक ग्राम प्रधान ।
श्व) डायवर्जन का सतत अभाव - 1994-2020 तक औद्योगिक उपयोग परंतु कोई वैध अनुमति नहीं।
4) प्रथम दृष्टया कानूनी उल्लंघन
1) नामांतरण बिना तहसीलदार आदेश ।
2) पंजीयन में 2004 भुगतान दर्शा 2009 पंजीयन -स्टाम्प वैल्यू से बचाव ।
3) शासकीय भूमि का अवैध विक्रय - सार्वजनिक संपत्ति का दुरुपयोग।
4) 420, 467, 468, 471, 120-क्च, व भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत जांच योग्य अपराध ।
5) माँगी जाने वाली कार्रवाई राजस्व विभाग द्वारा फोरेंसिक ऑडिट, शासकीय भूमि की पुन: प्रविष्टि व कब्ज़ा वापसी । पंजीयन विभाग द्वारा स्टाम्प ड्यूटी मूल्यांकन व आवश्यक निरस्तीकरण 7
संगठित भूमि हस्तांतरण अपराध की जांच।
भूमि वैधता की समीक्षा व औद्योगिक अनुमति पर रोक।
लोगों में आक्रोश, ग्रामवासी परेशान
हथबंद रेल्वे स्टेशन स्थित प्रायवेट रेल्वे साईडिंग लि. ग्राम इफा. नवधा- रिंगनी, तहसील सिमगा रायपुर हेंडलिंग जिला बलोदाबाजार-भाटापारा जिसे विगत 3 वर्षों से श्री रायपुर सीमेंट खपराडीह जिला बलादाबाजार-भाटापारा के द्वारा संचालित कर क्लिंकर, सीमेंट, कोयला, जिप्सम तथा स्लेग कारक लोड एवं अनलोड कार्य किया जा रहा है।कंपनी द्वारा पर्यावरण सम्मति प्राप्त करने एवं संचालन कार्य में उल्लेखित एवं आवश्यक शर्तों का उल्लंघन कर कानून तोड़ा जा रहा है। जिससे क्षेत्र में सीमेंट संयंत्र रेल्वे साईडिंग प्रबंधन के प्रति आक्रोश व्याप्त है। इस मामले में उपरोक्त उल्लेखीत पंक्तियों के आधार पर उच्चस्तरीय जॉच कराकर इस अनियमितता और मनमानी पर तत्काल रोक लगाने की जरूरत है।





