छत्तीसगढ़

अफीम खेती मामला: झारखंड से चौथा आरोपी गिरफ्तार

Shantanu Roy
10 April 2026 9:24 PM IST
अफीम खेती मामला: झारखंड से चौथा आरोपी गिरफ्तार
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Balrampur. बलरामपुर। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में अफीम की अवैध खेती और तस्करी मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। कोरंधा क्षेत्र में अफीम की खेती कराने और उसके बाद अफीम की खरीद-बिक्री में शामिल एक और आरोपी को पुलिस ने झारखंड से गिरफ्तार किया है। इस गिरफ्तारी के साथ ही इस पूरे नेटवर्क में अब तक चार आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला कोरंधा थाना क्षेत्र के खजूरी तुर्रीपानी गांव का है, जहां पुलिस ने करीब ढाई एकड़ क्षेत्र में अवैध रूप से लगी
अफीम
की फसल को जब्त किया था। यह कार्रवाई कुसमी थाना क्षेत्र के त्रिपुरी में अफीम की खेती पकड़े जाने के तीन दिन बाद 12 मार्च को की गई थी। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने करीब 2 करोड़ रुपये मूल्य की अफीम की फसल को बरामद किया था।
शुरुआती जांच में पुलिस ने अफीम की खेती करने वाले दो किसानों सहादुर नगेशिया (34) और दुईला राम (40) को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह खेती सामान्य फसल के नाम पर नहीं बल्कि अफीम उत्पादन के लिए की जा रही थी। इसके बाद पुलिस ने झारखंड के चतरा जिले के निवासी भूपेंद्र उरांव (36) को भी गिरफ्तार किया था। भूपेंद्र उरांव पर आरोप है कि उसने दोनों किसानों को “मसाले की खेती” के नाम पर अफीम की खेती करने के लिए प्रेरित किया और पूरे नेटवर्क को संचालित किया।
रिमांड के दौरान पूछताछ में भूपेंद्र उरांव ने कई अहम खुलासे किए। उसने बताया कि कोरंधा के खजूरी क्षेत्र में तैयार की गई अफीम को आगे राजन यादव नामक व्यक्ति को बेचा गया था, जो झारखंड के एक कुख्यात अफीम तस्कर गिरोह से जुड़ा हुआ है। इसके बाद पुलिस ने राजन यादव की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी शुरू की, लेकिन वह लगातार अपने ठिकाने बदलता रहा। तकनीकी इनपुट और लोकेशन ट्रैकिंग के आधार पर पुलिस ने आखिरकार उसे झारखंड से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी राजन यादव चतरा जिले के ग्राम चाया का रहने वाला है।
पूछताछ में राजन यादव ने अफीम खरीदने की बात स्वीकार की है। साथ ही उसने यह भी बताया कि उसने इस अफीम को आगे बड़े तस्करों को बेच दिया था। इससे स्पष्ट होता है कि यह नेटवर्क केवल स्थानीय स्तर पर नहीं बल्कि अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह पूरा मामला एक संगठित तस्करी नेटवर्क की ओर इशारा करता है, जिसमें किसान, स्थानीय एजेंट और बाहरी तस्कर सभी शामिल हैं। अफीम की खेती से लेकर उसकी खरीद और आगे सप्लाई तक की पूरी श्रृंखला एक सुनियोजित तरीके से संचालित की जा रही थी।
बलरामपुर एसपी वैभव बैंकर ने बताया कि मामले में “एंड टू एंड” जांच की जा रही है और पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए लगातार कार्रवाई जारी है। उन्होंने यह भी कहा कि इस केस में शामिल अन्य आरोपियों की भी जल्द गिरफ्तारी की जाएगी। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस अवैध नेटवर्क का विस्तार किन-किन राज्यों तक फैला हुआ है और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
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