छत्तीसगढ़

सामुदायिक भवनों पर कब्जा, निगम कमिश्नर ने दिए जांच के आदेश

Nil dhankar
25 Oct 2025 11:27 AM IST
सामुदायिक भवनों पर कब्जा, निगम कमिश्नर ने दिए जांच के आदेश
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तीन सामुदायिक भवनों पर एजाज ढेबर के कब्ज़े का मामला

रायपुर (जसेरि)। राजधानी के एक नहीं तीन सामुदायिक भवन पर पूर्व महापौर एजाज ढेबर एयर उनके गुर्गे कब्ज़ा जमाने के मामले में निगम कमिश्नर ने तत्काल संज्ञान लेकर जांच के आदेश दिए है। साथ ही जब से कब्जा किया है उस पर मय ब्याज के राजस्व वसूली की जाएगी। नगर निगम कमिश्नर ने स्पष्ट कहा है कि निगम की संपत्ति पर कोई भी कब्जा या अतिक्रमण नहीं कर सकता। एैसे कब्जा करने वालों की निगम प्रशासन कुंडली निकाल रही है। जितने भी लोगों ने अवैध तरीके से निगम की संपत्ति पर कब्जा जमाया है जांच उपरांत उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

उत्कल सामुदायिक भवन विद्या नगर बैरन बाजार, छोटा मुस्लिम हाल मोतीबाग और नगर निगम मुख्यालय के पीछे स्थित कुतुबी सामुदायिक हाल में एजाज ढेबर का कब्ज़ा है। ये तीनों सामुदायिक भवन का पैसा उन्ही के द्वारा वसूला जा रहा है और सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं है कहने को तो एसी हाल है लेकिन उद्घाटन के एक सप्ताह बाद वहां की एसी जब से बंद हुआ है आज तक सुधारा नहीं गया है। और पैसा भी मनमाने तरीके से बेहिसाब लिया जा रहा है। सरकारी पैसे का निजी उपयोग गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है लेकिन अधिकारी भी चुपचाप बैठे हैं। कांग्रेस सरकार को गए लगभग दो साल होने को आ रहे हैं उसके बाद अब प्रदेश और नगर निगम में भाजपा की सरकार बैठी है उसके बाद भी सामुदायिक भवनों का जिम्मा एजाज ढेबर किस हैसियत से उठा रहे हैं जाँच का विषय है। हालांकि सामुदायिक भवनों का निजी हाथों में संचालन होने के कई कारण हैं, जैसे सरकारी नियंत्रण की कमी, संसाधनों की कमी और निजी संस्थाओं की व्यावसायिक रुचि आदि आदि लेकिन यहाँ इस तरह की कोई बात ही नहीं है सरकार खुद इसका जिम्मा उठा सकती है। लेकिन ये बात लोगो के गले नहीं उतर रही है। सरकारी सामुदायिक भवनों पर पूर्व महापौर एजाज ढेबर या उनके परिवार के सदस्यों का कब्ज़ा हो जाना बहुत ही गंभीर बात है सरकार को संज्ञान में लेकर तत्काल अपने हाथो में या कुछ लोगों की कमिटी बनाकर उनको सौप देना चाहिए। उदाहरण के लिए, छत्तीसगढ़ में एक सामुदायिक भवन पर सरपंच के बेटे ने कब्ज़ा करके कबाडख़ाना बना दिया था। वही हाल अब राजधानी के इन तीनो सामुदायिक भवनों का होने वाला है।

कहा जाता है कि जब सरकारी भवन निजी संस्थाओं या व्यक्तियों द्वारा चलाए जाते हैं, तो उनके दुरुपयोग की आशंका बढ़ जाती है, जिससे सरकार का मूल उद्देश्य गरीबों को या छोटे प्रोग्राम के लिए सुलभ दर में उपलब्ध कराने की मंशा विफल हो जाता है। नगर निगम को इन भवनों से आय भी बढ़ती है लेकिन इससे निगम की आय तो नहीं बढ़ी परन्तु एजाज ढेबर और उसके परिवार की आय जरूर बढ़ गई है। और ऐसा होने से आम जनता के लिए इन सुविधाओं का उपयोग महंगा हो गया है। वे इसका सही तरीके से उपयोग नहीं करते, तो निगम को हस्तक्षेप करना पड़ता है। लेकिन नगर निगम में शिकायत करने के बावजूद कुछ हासिल नहीं हो रहा है। एजाज ढेबर के इन सामुदायिक भवनों के सञ्चालन से हमेशा विवाद होते रहता है सामुदायिक भवनों के निर्माण के बाद, उनके उपयोग को लेकर समुदाय के विभिन्न वर्गों के बीच विवाद पैदा हो जाता है। अगर निजी हाथों में प्रबंधन जाता है, तो समुदाय के कुछ वर्ग इसका विरोध करते हैं, क्योंकि वे चाहते हैं कि इन भवनों का उपयोग केवल सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए हो।

ये राजनितिक सभा के लिए भी संचालित कर रहे हैं जिसका लोगों ने जमकर विरोध भी किया है. नगर निगम प्रशासन को चाहिए कि लोगों की इन समस्याओं का समाधान निकालने के लिए, सरकारी निकायों को इन भवनों के प्रबंधन पर कड़ा नियंत्रण रखना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इनका उपयोग सार्वजनिक हित के लिए ही हो।

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