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Surajpur. सूरजपुर। नौकरी लगाने के नाम पर 16 लाख रुपये की ठगी के आरोप से जुड़े मामले में नया मोड़ सामने आया है। रिटायर्ड SECL कर्मी की शिकायत के बाद अब सरपंच प्रतिनिधि बृजलाल लकड़ा भी एसपी कार्यालय पहुंचे और अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को झूठा बताते हुए पूरे मामले को राजनीतिक षड्यंत्र करार दिया। वहीं सरपंच संघ ने निष्पक्ष जांच की मांग की है।
मामले की शुरुआत 25 सितंबर को हुई थी, जब तेजपुर निवासी रिटायर्ड SECL कर्मी बिरंजन ने एसपी कार्यालय पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई थी। अपनी शिकायत में उन्होंने गांव के ही बृजलाल लकड़ा और संतोषी लकड़ा पर परिजनों की नौकरी लगाने के नाम पर 16 लाख रुपये लेने का आरोप लगाया था।
शिकायत सामने आने के बाद मामला चर्चा में आ गया। अब बृजलाल लकड़ा ने अपने ऊपर लगे आरोपों को पूरी तरह गलत बताया है। वह 8 से 10 सरपंचों के साथ एसपी कार्यालय पहुंचे और पुलिस अधिकारियों को आवेदन सौंपकर मामले की जांच की मांग की। बृजलाल लकड़ा ने कहा कि वह तेजपुर गांव का सरपंच प्रतिनिधि है और उसके पास चारपहिया वाहन है। उनका कहना है कि वह किराए पर वाहन चलाते हैं और ड्राइवर की हैसियत से बिरंजन को कई बार कटघोरा लेकर गए थे।
लकड़ा के मुताबिक नौकरी लगाने से जुड़ा कथित लेनदेन बिरंजन और कटघोरा निवासी एक व्यक्ति के बीच हुआ था। उन्होंने दावा किया कि इस पूरे लेनदेन में उनकी कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक कारणों से उनका नाम मामले में जोड़कर उन्हें फंसाने का प्रयास किया जा रहा है। सरपंच प्रतिनिधि के साथ पहुंचे अन्य सरपंचों ने भी मामले में जल्दबाजी में कार्रवाई करने के बजाय निष्पक्ष जांच की मांग की। सरपंच संघ के जिला कोषाध्यक्ष ने कहा कि दोनों पक्षों की बात सुनी जानी चाहिए और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही कार्रवाई की जानी चाहिए।
मामले में पुलिस के पास अब दोनों पक्षों के आवेदन पहुंच चुके हैं। एक ओर रिटायर्ड SECL कर्मी ने नौकरी लगाने के नाम पर 16 लाख रुपये की ठगी का आरोप लगाया है, वहीं दूसरी ओर बृजलाल लकड़ा ने इस आरोप को खारिज करते हुए खुद को राजनीतिक षड्यंत्र का शिकार बताया है। पुलिस का कहना है कि दोनों आवेदनों की जांच की जाएगी। लेनदेन से जुड़े दस्तावेज, बैंक ट्रांजेक्शन, संबंधित व्यक्तियों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
फिलहाल मामले में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित तौर पर 16 लाख रुपये का लेनदेन किसके बीच हुआ, नौकरी लगाने के नाम पर किसने पैसे लिए और सरपंच प्रतिनिधि की भूमिका क्या थी। दोनों पक्षों के आमने-सामने आने के बाद अब यह मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है। स्थानीय स्तर पर भी इसे लेकर चर्चा तेज है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि पूरे प्रकरण की जांच के बाद तथ्यों के आधार पर ही कार्रवाई की जाएगी।
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