छत्तीसगढ़

इस्पात मंत्रालय की प्राक्कलन समिति की बैठक में शामिल हुए सांसद बृजमोहन अग्रवाल

Nil dhankar
13 Nov 2025 4:12 PM IST
इस्पात मंत्रालय की प्राक्कलन समिति की बैठक में शामिल हुए सांसद बृजमोहन अग्रवाल
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रायपुर। सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित प्राक्कलन समिति की बैठक में शामिल हुए। बैठक में इस्पात मंत्रालय के प्रतिनिधियों द्वारा “भारतीय इस्पात प्राधिकरण लिमिटेड (SAIL) और इसकी सहायक कंपनियों के कार्य निष्पादन की समीक्षा” विषय पर साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। बैठक के दौरान सांसद अग्रवाल ने इस्पात क्षेत्र और विशेषकर भिलाई स्टील प्लांट (BSP) से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।

उन्होंने कहा कि भिलाई टाउनशिप कभी पूरे देश की सर्वश्रेष्ठ टाउनशिप मानी जाती थी। भिलाई का अस्पताल पूरे क्षेत्र का गौरव था, लेकिन आज उसकी स्थिति अत्यंत दयनीय है। SAIL को इसे फिर से आधुनिक, सुसज्जित और जनता के लिए उपयोगी बनाने की दिशा में तत्काल कदम उठाने चाहिए।

अग्रवाल ने आगे कहा कि भिलाई टाउनशिप का स्वरूप आज “खंडहर” जैसा हो गया है, जबकि यह कभी देशभर में मॉडल टाउनशिप के रूप में जानी जाती थी। उन्होंने टाउनशिप के पुनर्विकास (रीडेवलपमेंट) की सशक्त मांग की ताकि यह फिर से अपने पुराने गौरव को प्राप्त कर सके। उन्होंने SAIL की खदानों (माइंस) के संदर्भ में कहा कि सेल की जितनी भी माइंस हैं, वहां की टाउनशिप को भी पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है। साथ ही माइंस में पड़े वेस्ट और डंप मटेरियल को वैज्ञानिक तरीके से बेनिफिशियल प्रोसेसिंग के माध्यम से बाजार में लाने का प्रयास होना चाहिए। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण होगा, बल्कि SAIL के राजस्व और उत्पादन में भी वृद्धि होगी। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने यह भी कहा कि भिलाई स्टील प्लांट कभी SAIL का सबसे अधिक लाभ देने वाला प्लांट हुआ करता था। आज भी इसमें अपार संभावनाएं हैं, बशर्ते इसके आसपास और मध्य क्षेत्र में योजनाबद्ध इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक विकास पर ध्यान दिया जाए। उन्होंने इस अवसर पर यह भी सुझाव दिया कि देशभर के प्रमुख स्टील प्लांट्स में अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के मॉडल प्रोजेक्ट्स को पायलट के रूप में लागू किया जाना चाहिए, जिससे स्टील उद्योग का सतत विकास सुनिश्चित हो सके। अग्रवाल ने कहा कि SAIL को पुनः उस गौरवशाली स्थिति में लाने का समय आ गया है, जब उसका नाम भारत के औद्योगिक आत्मनिर्भरता का प्रतीक माना जाता था।

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