छत्तीसगढ़

बाढ़ आपदा को लेकर मॉकड्रिल का आयोजन, प्रशिक्षित रेस्क्यू डॉग ‘जैक’ ने दिखाया कमाल

Shantanu Roy
11 July 2025 6:49 PM IST
बाढ़ आपदा को लेकर मॉकड्रिल का आयोजन, प्रशिक्षित रेस्क्यू डॉग ‘जैक’ ने दिखाया कमाल
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Dhamtari. धमतरी। बारिश और बाढ़ की आशंका को देखते हुए धमतरी जिले में नगर सेना द्वारा एक विशेष मॉकड्रिल का आयोजन किया गया। यह अभ्यास रूद्री डैम और नरहरा जलप्रपात क्षेत्र में किया गया, जिसमें बाढ़ आपदा के समय बचाव कार्यों का प्रदर्शन किया गया। खास बात यह रही कि पहली बार एक प्रशिक्षित रेस्क्यू डॉग 'जैक' ने पानी में डूबते एक व्यक्ति का सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर सबका ध्यान खींचा। नगर सेनानी कमांडेंट शोभा मंडावी ने बताया कि यह मॉकड्रिल बरसात के मौसम में किसी भी आपात स्थिति से निपटने की तैयारी का हिस्सा है।

जिले में लगातार हो रही बारिश को देखते हुए यह अभ्यास बेहद जरूरी था। मॉकड्रिल में मां भारती फिजिकल एकेडमी ट्रेनिंग सेंटर के बच्चों को भी आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया गया। मॉकड्रिल में गंगरेल ब्लू एडवेंचर स्पोर्ट्स एसोसिएशन ने विशेष सहयोग किया। एसोसिएशन के सदस्य सतवंत कुमार महिलांग ने बताया कि उनके पास प्रशिक्षित रेस्क्यू डॉग 'जैक' सहित कुल तीन ऐसे कुत्ते हैं जो बाढ़ या जलप्रपात जैसे क्षेत्रों में फंसे लोगों को पहचानने और बचाने में सक्षम हैं। जैक ने मॉक अभ्यास के दौरान रूद्री डैम में डूबते एक व्यक्ति की पहचान कर उसे सुरक्षित बाहर निकाला।

नरहरा जलप्रपात में बनी 10 सदस्यीय समिति
नरहरा जलप्रपात में बढ़ती पर्यटक संख्या को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने 10 सदस्यों की एक आपदा प्रबंधन समिति बनाई है। इन सदस्यों को एसोसिएशन की टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन से संबंधित प्रशिक्षण दिया। इसमें बोट, ट्यूब और कबाड़ से बनाए गए उपकरणों की मदद से बचाव तकनीकों को समझाया गया। प्रशिक्षण के दौरान यह बताया गया कि किसी डूबते व्यक्ति को बचाते समय पहले खुद की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होती है। इसके अलावा, लाइफ जैकेट, बांस, और अन्य उपलब्ध संसाधनों से किस तरह सुरक्षित रेस्क्यू किया जाए, इसकी व्यावहारिक जानकारी दी गई। एक छात्रा ने बताया कि उन्हें इस दौरान बाढ़ आपदा प्रबंधन के कई जरूरी पहलुओं की जानकारी मिली। उन्होंने सीखा कि कैसे किसी को सुरक्षित बाहर निकालने से पहले आत्मसुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी होता है। नगर सेना और प्रशासन की इस संयुक्त पहल को स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों ने सराहनीय बताया है। मॉकड्रिल से जुड़े सभी प्रतिभागियों ने इसे ज्ञानवर्धक और जीवनरक्षक अभ्यास करार दिया।
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