छत्तीसगढ़

औषधीय खेती से संवर रही किसानों की तकदीर

Nil dhankar
29 July 2026 5:54 PM IST
औषधीय खेती से संवर रही किसानों की तकदीर
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रायपुर। औषधीय और सुगंधित पौधों की खेती पारंपरिक फसलों की तुलना में कम लागत और कम पानी में अधिक मुनाफा देती है। इसमें तुलसी, अश्वगंधा और लेमन ग्रास जैसी प्रमुख फसलें शामिल हैं। छत्तीसगढ़ में पारंपरिक फसलों के साथ-साथ अब औषधीय और सुगंधित पौधों की खेती का चलन तेजी से बढ़ रहा है। राज्य के किसानों की आय दोगुनी करने के मिशन के तहत छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड (वन विभाग) द्वारा एक सराहनीय पहल की जा रही है। इस योजना के तहत 30 जुलाई को धमतरी जिले के ग्राम दुगली में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें वन मंत्री श्री केदार कश्यप एवं बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम द्वारा नारायणपुर (अबूझमाड़) और धमतरी के औषधि कृषकों को 54 लाख 36 हजार रुपये की अग्रिम प्रोत्साहन राशि वितरित की जाएगी।

बिना कर्ज की चिंता, निश्चिंत होकर खेती करेंगे किसान

योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि किसानों को खेती शुरू करने के लिए किसी से कर्ज लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अग्रिम वित्तीय सहायतारू बोर्ड द्वारा अनुबंधित संस्थाएं सीजी स्टीविया तथा इंस्टा हर्बल किसानों को खेती शुरू करने से पहले ही अग्रिम राशि दे रही हैं। लागत खर्च की पूर्ति के लिए किसान अपने खेतों में बोर खनन, सिंचाई पंप, पाइप फिटिंग, खेत की जुताई, रोपाई और निंदाई जैसे आवश्यक कार्य बिना किसी आर्थिक तंगी के कर सकेंगे। फसल तैयार होने के बाद किसानों को उपज बेचने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा, अनुबंधित संस्थाएं खेत से ही पूरी उपज की खरीदी की शप्रतिशत गारंटी करेंगी।

तीन प्रमुख मॉडलों के माध्यम से क्रियान्वयन

बोर्ड द्वारा औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती को तीन अलग-अलग तरीकों से बढ़ावा दिया जा रहा है। क्लस्टर मॉडल (समूह खेती) में मुख्य गांव के 1-2 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले किसानों को जोड़कर बड़े पैमाने पर खेती कराई जाती है। इससे उपज अधिक मात्रा में प्राप्त होती है और परिवहन व खरीदी में आसानी होती है। व्यक्तिगत किसान मॉडल में जो किसान पारंपरिक खेती के अलावा अधिक मुनाफा कमाने का विकल्प तलाश रहे हैं, उन्हें ब्राह्मी, खस, सतावर आदि की खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है। महिला स्व.सहायता समूह मॉडल में पंचायतों एवं शासन की अनुपयोगी भूमि पर महिला समूहों द्वारा औषधीय पौधों की खेती कराई जा रही है। धमतरी में महानदी के तट पर खस की सफल खेती इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण है।

क्षेत्रवार एवं फसलवार प्रोत्साहन राशि का विवरण

नारायणपुर (किहकाड़) कस्टम फार्मिंग 13 एकड़ (12 किसान) ब्राह्मी (9 एकड़), वच (1 एकड़), खस (3 एकड़) 78 हजार रूपए, नारायणपुर (5 ग्राम) व्यक्तिगत किसान 18.5 एकड़ (13 किसान) ब्राह्मी (12 एकड़), खस (6.5 एकड़) 1 लाख 05 हजार रुपए, धमतरी (आमदी) कस्टम फार्मिंग 40 एकड़ (18 किसान) लेमनग्रास (40 एकड़) 10 लाख 70 हजार 352 रुपए, धमतरी (9 ग्राम) व्यक्तिगत किसान 16.25 एकड़ (22 किसान) ब्राह्मी (2 एकड़), खस (6 एकड़), सतावर (3.75 एकड़), वच (4.5 एकड़) 2 लाख 93 हजार 620 रुपए और धमतरी (25 ग्राम) स्व-सहायता समूह 115 एकड़ (45 स्व-सहायता समूह) खस (80 एकड़), सतावर (20 एकड़), ब्राह्मी (9 एकड़) को 38 लाख 89 हजार 760 रुपए प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी।

बोर्ड द्वारा दी जाने वाली अतिरिक्त सुविधाएं

निःशुल्क पौध वितरण के रूप में किसानों को गुणवत्तापूर्ण औषधीय पौधे और बीज पूरी तरह मुफ्त उपलब्ध कराए जाते हैं। किसानों के लिए विशेष तकनीकि प्रशिक्षण शिविर एवं अध्ययन भ्रमण आयोजित किए जाते हैं। पूर्व-अनुबंध करके फसल बोने से पहले ही बिक्री की शत-प्रतिशत गारंटी दी जाती है। छत्तीसगढ़ शासन की यह दूरदर्शी योजना वनांचल और ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण का एक नया स्वर्णिम अध्याय लिख रही है।

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