छत्तीसगढ़
पर्यावरण उल्लंघन पर आर्थिक दंड व्यवस्था को लेकर हाईकोर्ट पहुंचा मामला
Shantanu Roy
12 July 2026 5:42 PM IST

x
छग
Raipur. रायपुर। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 में वर्ष 2023 में किए गए संशोधनों के बाद पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन पर आपराधिक कार्रवाई के स्थान पर आर्थिक दंड लगाने की व्यवस्था लागू की गई है। इसी व्यवस्था के तहत अधिनियम में धारा 15C जोड़ी गई है, जिसके अंतर्गत प्रत्येक राज्य में निर्णायक अधिकारी (Adjudicating Officer) नियुक्त किए गए हैं। छत्तीसगढ़ में आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव को निर्णायक अधिकारी नियुक्त किया गया है। उनका कार्य पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों, अधिसूचनाओं और निर्देशों के उल्लंघन से जुड़े मामलों की सुनवाई कर कानून के अनुसार दंड निर्धारित करना है।
उल्लंघन पर 10 हजार से 15 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान
रायपुर के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. राकेश गुप्ता ने बताया कि संशोधित धारा 15 के तहत पर्यावरण कानून के उल्लंघन पर 10 हजार रुपये से लेकर 15 लाख रुपये तक का आर्थिक दंड लगाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि यदि उल्लंघन लगातार जारी रहता है तो प्रत्येक दिन के हिसाब से अतिरिक्त दंड लगाने का भी प्रावधान है। डॉ. गुप्ता के अनुसार, यदि किसी सरकारी विभाग या अधिकारी द्वारा पर्यावरण नियमों का उल्लंघन किया जाता है, तो संबंधित अधिकारी या विभागाध्यक्ष पर एक माह के वेतन के बराबर दंड लगाने का प्रावधान भी कानून में किया गया है। वहीं दंड राशि जमा नहीं करने पर तीन वर्ष तक की सजा, दोगुनी पेनल्टी या दोनों का प्रावधान है।
गणेश विसर्जन के दौरान ध्वनि प्रदूषण का मामला पहुंचा हाईकोर्ट
डॉ. राकेश गुप्ता ने बताया कि संशोधित कानून के तहत रायपुर में पहली बार पर्यावरण उल्लंघन से जुड़े मामलों में शिकायतें प्रस्तुत की गईं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में रायपुर के शंकर नगर चौक में गणेश स्थापना और गणेश विसर्जन कार्यक्रम के दौरान नॉइज पॉल्यूशन (रेगुलेशन एंड कंट्रोल) रूल्स के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था। इस मामले में रायपुर निवासी संदीप तिवारी ने अवंती विहार निवासी विक्की शदीजा के खिलाफ निर्णायक अधिकारी के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि ध्वनि प्रदूषण नियमों का सात बार उल्लंघन किया गया। इसके आधार पर प्रत्येक उल्लंघन के लिए 15 लाख रुपये के हिसाब से कुल 1 करोड़ 5 लाख रुपये की पेनल्टी लगाए जाने की मांग की गई थी।
करबला तालाब वेटलैंड नियम उल्लंघन का मामला भी शामिल
इसके अलावा डॉ. राकेश गुप्ता ने रायपुर के करबला तालाब के सौंदर्यीकरण कार्य में वेटलैंड (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम, 2017 के कथित उल्लंघन को लेकर भी शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत में संबंधित जोन कमिश्नर पर एक माह के वेतन के बराबर दंड लगाए जाने की मांग की गई थी। डॉ. गुप्ता के अनुसार, दोनों मामलों में निर्णायक अधिकारी ने शिकायतों के गुण-दोष पर फैसला देने के बजाय यह कहते हुए प्रकरण खारिज कर दिए कि पेनल्टी लगाने की प्रक्रिया निर्धारित नहीं है।
हाईकोर्ट में चुनौती, चार सप्ताह में जवाब देने का निर्देश
निर्णायक अधिकारी के आदेशों को चुनौती देते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में अलग-अलग रिट याचिकाएं दायर की गई हैं। हाईकोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद दोनों मामलों में निर्णायक अधिकारी को नोटिस जारी किया है। मामले क्रमांक WPC 3568/2026 और WPC 3456/2026 में अदालत ने चार सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
क्या बिना नियम बनाए लग सकता है आर्थिक दंड?
डॉ. राकेश गुप्ता का कहना है कि पेनल्टी लगाने की प्रक्रिया निर्धारित नहीं होने के आधार पर शिकायतों को खारिज करना उचित नहीं है। उनके अनुसार, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम की धारा 15 और 15C में दंड लगाने और शिकायतों के निपटारे की पर्याप्त व्यवस्था मौजूद है। उन्होंने कहा कि कानून में यह जरूर उल्लेख है कि केंद्र सरकार इस संबंध में नियम बना सकती है, लेकिन ऐसा कहीं नहीं कहा गया है कि नियम बनने तक निर्णायक अधिकारी अपने अधिकारों का प्रयोग नहीं कर सकते। यही कानूनी प्रश्न अब हाईकोर्ट के सामने विचाराधीन है।
प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो कानून का उद्देश्य होगा कमजोर
डॉ. गुप्ता ने कहा कि यदि यह मान लिया जाए कि प्रक्रिया निर्धारित नहीं होने के कारण पर्यावरण उल्लंघनों पर पेनल्टी नहीं लगाई जा सकती, तो पर्यावरण संरक्षण कानून का उद्देश्य कमजोर हो जाएगा। उन्होंने कहा कि आर्थिक दंड की व्यवस्था का उद्देश्य पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करने वालों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है। यदि यह व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू होती है तो ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले आयोजनों, प्रदूषण फैलाने वाले संस्थानों और पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों पर अंकुश लगाया जा सकेगा।
ध्वनि प्रदूषण और वेटलैंड संरक्षण में मददगार हो सकती है नई व्यवस्था
डॉ. गुप्ता ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण अधिनियम में किए गए संशोधन आने वाले समय में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। उनके अनुसार, यदि आर्थिक दंड की व्यवस्था प्रभावी तरीके से लागू होती है तो गणेशोत्सव, धार्मिक आयोजनों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। साथ ही तालाबों, वेटलैंड्स और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी। फिलहाल छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के निर्णय पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि यह फैसला पर्यावरणीय उल्लंघनों पर दंड व्यवस्था के भविष्य की दिशा तय कर सकता है।
Tagsछत्तीसगढ़ हाईकोर्टपर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986धारा 15Cपर्यावरण उल्लंघनआर्थिक दंडनिर्णायक अधिकारीध्वनि प्रदूषणनॉइज पॉल्यूशन नियमवेटलैंड संरक्षण नियमरायपुर पर्यावरण मामलाChhattisgarh High CourtEnvironment Protection Act 1986Section 15CEnvironmental ViolationPenaltyAdjudicating OfficerNoise PollutionNoise Pollution RulesWetland Conservation RulesRaipur Environment Matterछत्तीसगढ़ न्यूज हिंदीछत्तीसगढ़ न्यूजछत्तीसगढ़ की खबरछत्तीसगढ़ लेटेस्ट न्यूजछत्तीसगढ़ न्यूज अपडेटछत्तीसगढ़ हिंदी न्यूज टुडेछत्तीसगढ़ हिंदीन्यूज हिंदी न्यूज छत्तीसगढ़छत्तीसगढ़ हिंदी खबरछत्तीसगढ़ समाचार लाइवChhattisgarh News HindiChhattisgarh NewsNews of ChhattisgarhChhattisgarh Latest NewsChhattisgarh News UpdateChhattisgarh Hindi News TodayChhattisgarh HindiNews Hindi News ChhattisgarhChhattisgarh Hindi NewsChhattisgarh News Liveजनता से रिश्ता न्यूज़जनता से रिश्ताआज की ताजा न्यूज़हिंन्दी न्यूज़भारत न्यूज़खबरों का सिलसिलाआज की ब्रेंकिग न्यूज़आज की बड़ी खबरमिड डे अख़बारहिंन्दी समाचारजनताJanta Se Rishta NewsJanta Se RishtaToday's Latest NewsHindi NewsIndia NewsKhabron Ka SilsilaToday's Breaking NewsToday's Big NewsMid Day Newspaperjantasamachar newssamacharHindi news
Next Story





