छत्तीसगढ़
फिर सामने आया माओवादियों का शांति प्रस्ताव, सरकार से अनुकूल माहौल बनाने की मांग
Shantanu Roy
9 April 2025 8:06 PM IST

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Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ में माओवादियों ने एक बार फिर शांति वार्ता की पेशकश करते हुए सरकार से इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाने की अपील की है। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) उत्तर-पश्चिम सब जोनल ब्यूरो की ओर से जारी ताज़ा हिंदी बयान में कहा गया है कि वे आईईडी, गोलीबारी और हिंसा पर रोक लगाने को तैयार हैं, लेकिन इसके लिए सरकार को पहले वार्ता के लिए अनुकूल माहौल बनाना होगा। बयान में कहा गया है कि वार्ता की मुख्य मंशा बस्तर में जारी हिंसा को रोकना है। माओवादियों ने यह भी उल्लेख किया कि एक सप्ताह पूर्व भी केंद्रीय समिति ने तेलुगु में बयान जारी कर शांति वार्ता की पेशकश की थी, जो केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के छत्तीसगढ़ दौरे से ठीक पहले आया था। अब उसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए उत्तर-पश्चिम सब जोनल ब्यूरो ने हिंदी में नया बयान जारी किया है।
माओवादियों ने आरोप लगाया कि पूर्व में दिए गए वार्ता प्रस्ताव को राज्य के गृह मंत्री विजय शर्मा ने खारिज कर दिया, जिससे साफ होता है कि सरकार अपनी पुरानी नीति को ही आगे बढ़ाना चाहती है। साथ ही उन्होंने सरकार की 'आत्मसमर्पण नीति' को एकमात्र समाधान मानने के नजरिए का विरोध किया है। बयान में यह भी कहा गया है कि वार्ता प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें अपने नेतृत्वकर्ताओं से मिलने और स्थानीय राय जानने की ज़रूरत है, जो सुरक्षा बलों की कार्रवाई के चलते संभव नहीं हो पा रहा। ऐसे में सरकार को चाहिए कि वह अभियान रोककर वार्ता के लिए माहौल बनाए, क्योंकि यह उसकी जिम्मेदारी है। माओवादियों ने मानवाधिकार संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों और जनपक्षधर पत्रकारों से अपील की है कि वे इस प्रयास का समर्थन करें और सरकार पर सकारात्मक माहौल बनाने के लिए दबाव डालें। उन्होंने यह भी साफ किया कि बस्तर से नेतृत्व के अन्य राज्यों में भागने की खबरें बेबुनियाद हैं और इसे मानसिक युद्ध का हिस्सा बताया।
संगठन की एसजेडसी सदस्य कामरेड रेणुका उर्फ चैते का हवाला देते हुए कहा गया कि उन्होंने अस्वस्थता के बावजूद जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए जनता के लिए अपनी जान कुर्बान की। बयान में माओवादियों ने यह भी कहा कि वे केवल हिंसा की राजनीति तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, कुपोषण, पेयजल जैसे जनहित के मुद्दों को हल करने की बात कही, कुछ मामलों में हुई गलतियों के लिए जनता से माफी भी मांगी और पर्यावरण विरोधी परियोजनाओं के विरोध का इरादा जताया। इसके साथ ही माओवादियों ने अपनी पार्टी की उत्तर-पश्चिम सब जोन की कमेटियों, कमांडों और कैडरों से आह्वान किया है कि वे शांति वार्ता के माहौल को बनाने के लिए काम करें, लेकिन सरकार की प्रतिक्रिया को देखते हुए सतर्कता और सावधानी भी बरतें। उन्होंने मीडिया और पुलिस के "उकसाने वाले बयानों" से प्रभावित न होने की हिदायत भी दी है। माओवादियों की यह नई पहल छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति स्थापना की उम्मीद को फिर से जगाती है, लेकिन यह देखना अहम होगा कि राज्य सरकार इस प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाती है।
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