छत्तीसगढ़

आंगनबाड़ी सेवाओं से कुपोषित शिवांश हुआ स्वस्थ

Nilmani Pal
9 Oct 2025 6:00 PM IST
आंगनबाड़ी सेवाओं से कुपोषित शिवांश हुआ स्वस्थ
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मनेंद्रगढ़। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ की दिशा में चल रहे प्रयासों का प्रभाव अब जमीनी स्तर पर दिख रहा है। मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर जिले के ग्राम चौनपुर के आंगनबाड़ी केन्द्र नवापारा से जुड़े बालक शिवांश ने आंगनबाड़ी सेवाओं और परिवार के समन्वित प्रयासों से कुपोषण पर विजय पाई।

शिवांश का जन्म 12 जुलाई 2024 को हुआ था। जन्म के समय उसका वजन 2.700 किलोग्राम था। जन्म के बाद पोषण की उचित देखभाल न होने से उसका वजन घटकर कुपोषण की श्रेणी में पहुँच गया था। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और मितानिन ने नियमित वजन मापन के दौरान स्थिति की पहचान की और तत्काल गृहभेंट कर परिवार को उचित परामर्श दिया। लालसा कुमारी को समझाया गया कि वे अपने भोजन में अंकुरित अनाज, मौसमी फल, मुनगा भाजी, दूध, हरी सब्जियाँ और प्रोटीनयुक्त भोजन शामिल करें। बच्चे को स्तनपान के साथ-साथ ऊपरी आहार जैसे दलिया, खिचड़ी, गाढ़ी दाल, पंजीरी, लपशी और हलुआ प्रतिदिन 4-5 बार हल्के रूप में देने की सलाह दी गई। आंगनबाड़ी केन्द्र से मिलने वाले रेडी टू ईट आहार का नियमित सेवन कराया गया। साथ ही परिवार को स्वच्छता, टीकाकरण और समय पर वजन मापन के लिए प्रेरित किया गया।

शिशु अवस्था के दौरान तेज़ी से विकास और वृद्धि के लिए उचित पोषण अत्यंत महत्वपूर्ण है। शुरुआती छह महीनों तक केवल स्तनपान कराने के बाद, स्तनपान बंद करने वाले या पूरक आहार देना ज़रूरी है। ये आहार पोषक तत्वों से भरपूर होने चाहिए, जिनमें मसले हुए फल, सब्ज़ियाँ और अनाज शामिल हों, ताकि शिशु को पर्याप्त विटामिन और खनिज मिल सकें। लगातार देखरेख और पौष्टिक आहार के सेवन से शिवांश का वजन धीरे-धीरे बढ़ने लगा। कुछ ही महीनों में उसका वजन सामान्य श्रेणी में पहुँच गया। अब वह स्वस्थ और सक्रिय है। यह सफलता इस बात का उदाहरण है कि यदि आंगनबाड़ी की सेवाओं, मितानिन और परिवार को संयुक्त प्रयास करने से कुपोषण जैसी चुनौती पर सफलतापूर्वक नियंत्रण पाया जा सकता है। महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि शिवांश जैसी प्रेरक कहानियाँ बताती हैं कि जागरूकता, सामुदायिक सहयोग और पोषण आहार के नियमित उपयोग से “सुपोषित छत्तीसगढ़” का सपना साकार हो रहा है।

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