छत्तीसगढ़

बस्तर की रेल कनेक्टिविटी को बड़ा झटका, ट्रेनों की बहाली का इंतजार बढ़ा

Shantanu Roy
19 Oct 2026 6:33 PM IST
बस्तर की रेल कनेक्टिविटी को बड़ा झटका, ट्रेनों की बहाली का इंतजार बढ़ा
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Jagdalpur. जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर में मानसून के दौरान हुई भारी बारिश और भूस्खलन का असर अब भी रेल यातायात पर बना हुआ है। बस्तर की लाइफलाइन कही जाने वाली केके (कोत्तावलसा-किरंदुल) रेललाइन पर 24 सितंबर को मल्लीगुड़ा और छत्रिपुत के बीच हुए भूस्खलन के बाद रेल परिचालन प्रभावित है। पहले इस मार्ग पर 22 अक्टूबर तक रेल सेवाएं बहाल होने की उम्मीद जताई गई थी, लेकिन अब रेलवे ने बहाली की समयसीमा बढ़ाकर 28 अक्टूबर कर दी है। इससे यात्रियों के साथ-साथ औद्योगिक और माल परिवहन क्षेत्र की परेशानियां भी बढ़ गई हैं। अनुमानित आंकड़ों के अनुसार, 35 दिनों में करीब 411 करोड़ रुपए मूल्य का माल परिवहन प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।

24 सितंबर को हुआ था भूस्खलन
जानकारी के मुताबिक, मानसून सीजन में लगातार हुई बारिश के कारण बस्तर और आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ तथा भूस्खलन की घटनाएं सामने आई थीं। इसी दौरान 24 सितंबर को मल्लीगुड़ा और छत्रिपुत के बीच पहाड़ी क्षेत्र में भूस्खलन होने से केके रेललाइन पर ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित हो गई। रेलवे ने शुरुआत में 22 अक्टूबर तक परिचालन बहाल होने की उम्मीद जताई थी। हालांकि अब इस समयसीमा को बढ़ाकर 28 अक्टूबर किया गया है। इससे बस्तर की रेल कनेक्टिविटी सामान्य होने का इंतजार और लंबा हो गया है।

रोजाना करीब 36 मालगाड़ियों की आवाजाही
केके रेललाइन बस्तर के औद्योगिक विकास और खनिज परिवहन के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस मार्ग के जरिए किरंदुल, बचेली, नगरनार और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों से खनिज तथा माल का परिवहन किया जाता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, लोकल और विशाखापट्टनम रूट को मिलाकर इस रेलमार्ग पर प्रतिदिन करीब 36 मालगाड़ियों की आवाजाही होती है। भूस्खलन के कारण रेल सेवाएं प्रभावित होने से माल परिवहन की नियमित व्यवस्था पर असर पड़ रहा है।

411 करोड़ रुपए के परिवहन का अनुमान
माल परिवहन से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक, किरंदुल और बचेली साइडिंग से निकलने वाली 18 मालगाड़ियों का प्रति ट्रेन मालभाड़ा करीब 60 लाख रुपए बताया गया है। वहीं, नगरनार से विशाखापट्टनम जाने वाली मालगाड़ी का किराया लगभग 50 लाख रुपए और आरापुर से जाने वाली मालगाड़ी का किराया करीब 45 लाख रुपए बताया गया है। इन आंकड़ों के आधार पर 28 अक्टूबर तक की 35 दिनों की अवधि में करीब 411 करोड़ रुपए के माल परिवहन का अनुमान लगाया गया है। हालांकि यह आंकड़ा अनुमानित परिवहन मूल्य से संबंधित है। इसे रेलवे का वास्तविक आर्थिक नुकसान या राजस्व हानि नहीं माना जा सकता। वास्तविक प्रभाव प्रभावित मालगाड़ियों की संख्या और परिचालन की स्थिति पर निर्भर करेगा।

खनिज परिवहन पर पड़ रहा असर
बस्तर में खनिज आधारित औद्योगिक गतिविधियों के लिए केके रेललाइन महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस मार्ग से लौह अयस्क सहित अन्य माल को विभिन्न औद्योगिक केंद्रों तक पहुंचाया जाता है। रेलमार्ग प्रभावित होने के कारण नियमित माल परिवहन में बाधाएं आ रही हैं। ऐसे में रेल परिचालन बहाल होने में देरी से औद्योगिक गतिविधियों पर भी प्रभाव पड़ सकता है।

पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन बनी चुनौती
केके रेललाइन पहाड़ी और भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों से होकर गुजरती है। भारी बारिश के दौरान पहाड़ी ढलानों से मिट्टी और चट्टानें खिसकने की घटनाएं रेल यातायात के लिए गंभीर चुनौती पैदा करती हैं। ऐसी परिस्थितियों में रेलवे ट्रैक की सुरक्षा, पहाड़ी ढलानों को मजबूत बनाने और संवेदनशील स्थानों की नियमित निगरानी आवश्यक है। विशेषज्ञ स्तर पर स्थायी सुरक्षा उपाय अपनाने से भविष्य में इस तरह की घटनाओं के जोखिम को कम किया जा सकता है।

अब 28 अक्टूबर तक बहाली का इंतजार
रेलवे की ओर से परिचालन बहाली की नई समयसीमा 28 अक्टूबर निर्धारित किए जाने के बाद यात्रियों और माल परिवहन से जुड़े लोगों को अभी और इंतजार करना पड़ेगा। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि रेलवे निर्धारित समयसीमा के भीतर प्रभावित रेलमार्ग पर यातायात सामान्य कर पाता है या नहीं। इसके साथ ही भविष्य में भूस्खलन से रेललाइन को सुरक्षित रखने के लिए स्थायी उपायों की आवश्यकता भी सामने आई है।
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