छत्तीसगढ़

MP-CG बॉर्डर में फोर्स का बड़ा ऑपरेशन जारी

Nilmani Pal
30 Nov 2025 4:32 PM IST
MP-CG बॉर्डर में फोर्स का बड़ा ऑपरेशन जारी
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राजनांदगांव। एमएमसी जोन के बचे हुए शीर्ष नक्सल नेताओं की तलाश में छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के सुरक्षा बल एक बड़ा सर्चिस अभियान चला रहे हैं। दो दिन पहले इस जोन के दर्रेकसा दलम से जुड़े एसजेडसी मेम्बर विकास नगपुरे ने 11 नक्सलियों के साथ महाराष्ट्र के गोंदिया में हथियार डाल दिया। बताया जा रहा है कि अब इस घटनाक्रम के बाद मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की फोर्स कवर्धा-बालाघाट (केबी) और साल्हेवारा-बैहर के घने जंगलों में टॉप नक्सल नेताओं की खोजबीन के लिए ताकत लगा रहे हैं। हालांकि पुलिस का उद्देश्य सिर्फ नक्सलियों से सशस्त्र मुकाबला नहीं है, बल्कि मुख्यधारा में वापसी की भी मंशा है। बहरहाल एमएमसी जोन में दो दर्जन नक्सली अभी भी सरकार के खिलाफ हथियारबंद होकर सक्रिय हैं।

मिली जानकारी के मुताबिक कवर्धा-बालाघाट और खैरागढ़ जिले की सरहदी इलाकों में हॉकफोर्स, डीआरजी और एसटीएफ की टुकड़ी नक्सलियों की खोजबीन में जोरदार अभियान चला रही है। उपरोक्त तीनों जिलों में नक्सल लीडर अपने-अपने दस्ते के साथ जंगल में मौजूद हैं। बताया जा रहा है कि पुलिस की ओर से शेष नक्सलियों को सरेंडर करने के लिए संदेश भी भेजे जा रहे हैं। पुलिस इस कोशिश के बीच अपना आपरेशन भी चला रही है। एक जानकारी के मुताबिक एमएमसी जोन के प्रभारी रामधेर, सुरेंदर उर्फ कबीर, देवचंद उर्फ चंदू, छोटा दीपक समेत अन्य नक्सलियों की घर वापसी का पुलिस का पूरा प्रयास है, लेकिन नक्सलियों की ओर से आत्मसर्पण को लेकर कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिले हैं। एसजेडसी नक्सल मेम्बर विकास ने भी जोन प्रभारी रामधेर और अन्य नक्सल नेताओं की रणनीति को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी है। कहा जा रहा है कि बचे हुए नक्सली हथियार छोडऩे के पक्ष में नहीं है। ऐसे में नक्सलियों की खोजबीन के लिए पुलिस के पास विकल्प नहीं है।

इस संबंध में राजनांदगांव रेंज आईजी अभिषेक शांडिल्य ने कहा कि नक्सलियों की तलाश के लिए आपरेशन जारी है। समर्पण करने पर उनका स्वागत किया जाएगा, लेकिन जंगल में हथियार लेकर घूमने की इजाजत नहीं दी जाएगी। आईजी का कहना है कि आत्मसर्पण एक बेहतर विकल्प है। उधर कवर्धा, खैरागढ़ और बालाघाट के अलावा मंडला जिले में भी नक्सलियों की सरगर्मी से तलाश की जा रही है। बताया जा रहा है कि पुलिस को नक्सलियों की पुख्ता मौजूदगी की गुप्त सूचनाएं भी मिल रही है। एमएमसी जोन में दर्रेकसा दलम के नक्सलियों के सरेंडर करने से संगठन को तगड़ा झटका लगा है। ऐसे में बचे हुए नेताओं पर मुख्यधारा में वापसी पर दबाव भी बढ़ा है।

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