छत्तीसगढ़
दुर्ग यूनिवर्सिटी में 18.87 लाख की कार खरीदी पर ऑडिट की बड़ी आपत्ति
Shantanu Roy
12 July 2026 2:20 PM IST

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छग
Durg. दुर्ग। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग में करीब 18.87 लाख रुपये की कार खरीदी को लेकर राज्य संपरीक्षा (ऑडिट) ने गंभीर आपत्तियां दर्ज की हैं। ऑडिट रिपोर्ट में वाहन खरीदी प्रक्रिया में पांच प्रमुख वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार विश्वविद्यालय ने न केवल वित्त विभाग की पूर्व स्वीकृति के बिना वाहन खरीदा, बल्कि निर्धारित वित्तीय सीमा से लगभग तीन गुना अधिक राशि भी खर्च कर दी। ऑडिट में इस पूरी प्रक्रिया को वित्तीय नियमों और भंडार क्रय नियमों के विपरीत बताया गया है। साथ ही संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों से खर्च की गई राशि की वसूली करने की अनुशंसा भी की गई है।
बिना वित्त विभाग की अनुमति खरीदी गई कार
ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, नए वाहन की खरीदी से पहले छत्तीसगढ़ शासन के वित्त विभाग से आवश्यक अनुमति नहीं ली गई। शासन के प्रचलित नियमों के तहत किसी भी सरकारी संस्था द्वारा नया वाहन खरीदने से पहले वित्त विभाग की स्वीकृति अनिवार्य होती है। संपरीक्षा दल ने इसे वित्तीय संहिता का उल्लंघन मानते हुए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की सिफारिश की है।
वाहन किसके लिए खरीदा गया, यह भी स्पष्ट नहीं
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि विश्वविद्यालय ने उच्च शिक्षा संचालनालय से वाहन उपयोग की अनुमति भी प्राप्त नहीं की। इतना ही नहीं, दस्तावेजों में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि नई कार किस अधिकारी के उपयोग के लिए खरीदी गई या उसका उद्देश्य क्या था। ऑडिट के अनुसार वाहन खरीदी प्रस्ताव में उपलब्ध वाहनों की संख्या, पात्र अधिकारियों की जानकारी और वाहन की आवश्यकता का स्पष्ट उल्लेख किया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
निर्धारित सीमा से तीन गुना अधिक खर्च
ऑडिट की सबसे बड़ी आपत्तियों में वाहन की कीमत भी शामिल है। वित्त विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार संबंधित श्रेणी के अधिकारियों के लिए वाहन खरीद की अधिकतम वित्तीय सीमा 6.50 लाख से 7.50 लाख रुपये निर्धारित थी। इसके बावजूद विश्वविद्यालय ने 18 लाख 87 हजार 956 रुपये का वाहन खरीद लिया। ऑडिट ने इसे निर्धारित सीमा से लगभग तीन गुना अधिक खर्च बताते हुए वित्तीय अनियमितता माना है।
रद्दी बिक्री की राशि से खरीदी गई कार
ऑडिट रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि वाहन खरीदने के लिए रद्दी सामग्री की बिक्री से प्राप्त राशि का उपयोग किया गया। नियमों के अनुसार ऐसी आय को विश्वविद्यालय के सामान्य निधि (जनरल फंड) में जमा किया जाना चाहिए था। रिपोर्ट के अनुसार इस राशि को निर्धारित पूंजीगत व्यय योजना में शामिल किए बिना सीधे वाहन खरीदी में खर्च कर दिया गया, जिसे वित्तीय पारदर्शिता और बजटीय नियंत्रण के सिद्धांतों के विपरीत माना गया है।
खुली निविदा और क्रय समिति की प्रक्रिया का पालन नहीं
राज्य संपरीक्षा ने वाहन खरीद प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार वाहन खरीदी के लिए काइजन टोयोटा ऑटोमोबाइल्स, रिंग रोड सरोना, रायपुर को भाव-पत्र भेजा गया था। हालांकि, भंडार क्रय नियम 2002 के अनुसार तीन लाख रुपये से अधिक की खरीदी के लिए खुली निविदा (ओपन टेंडर) प्रक्रिया अपनाना अनिवार्य है। इसके अलावा 50 हजार रुपये से अधिक की खरीदी में क्रय समिति की अनुशंसा भी आवश्यक होती है। ऑडिट में कहा गया कि इन दोनों प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया, जिससे प्रतिस्पर्धी और पारदर्शी खरीद प्रक्रिया प्रभावित हुई।
ऑडिट ने की वसूली की अनुशंसा
राज्य संपरीक्षा ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कार्यपरिषद की स्वीकृति के आधार पर वाहन खरीदी को प्रशासनिक मंजूरी भले मिली हो, लेकिन वित्त विभाग की अनुमति के अभाव में यह व्यय नियमों के अनुरूप नहीं माना जा सकता। रिपोर्ट में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से अनियमित रूप से खर्च की गई राशि की वसूली करने तथा भविष्य में सभी खरीद प्रक्रियाओं को वित्तीय एवं भंडार क्रय नियमों के अनुसार करने के निर्देश देने की अनुशंसा की गई है।
विश्वविद्यालय प्रबंधन ने नहीं दी आधिकारिक प्रतिक्रिया
मामले में जब विश्वविद्यालय के जिम्मेदार अधिकारियों से पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो किसी ने भी स्पष्ट जवाब नहीं दिया। विश्वविद्यालय प्रबंधन का कहना है कि यह वाहन खरीदी पूर्व कुलपति के कार्यकाल में हुई थी। वर्तमान में विश्वविद्यालय में नए कुलपति पदभार संभाल चुके हैं। प्रबंधन ने यह स्वीकार किया कि ऑडिट रिपोर्ट की जानकारी उन्हें है, लेकिन फिलहाल इस विषय पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। अब यह देखना होगा कि ऑडिट की अनुशंसाओं पर आगे क्या कार्रवाई होती है और जिम्मेदारी किस स्तर पर तय की जाती है।
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