छत्तीसगढ़
टाउन प्लानिंग का बड़ा एक्शन, अनंत रियल्टी की विकास अनुज्ञा निरस्त
Shantanu Roy
10 Sept 2026 8:47 PM IST

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छग
Raipur/Bilaspur. रायपुर/बिलासपुर। बिलासपुर के अज्ञेय नगर स्थित बहुमंजिला आवासीय प्रोजेक्ट में सामने आई विसंगतियों के बाद नगर तथा ग्राम निवेश संचालनालय ने मेसर्स अनंत रियल्टी की विकास अनुज्ञा निरस्त कर दी है। संस्था को भागीदार नमन गोयल के माध्यम से जारी विकास अनुज्ञा क्रमांक 1456 को छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 के नियम 25 के तहत प्रतिसंहृत किया गया है। अंतिम आदेश में मुख्य रूप से पहुंच मार्ग के उपयोग और स्वीकृत मानचित्र में प्रकोष्ठों की संख्या से जुड़ी विसंगतियों का उल्लेख किया गया है।
जानकारी के अनुसार प्रोजेक्ट के लिए विकास अनुज्ञा 25 जून 2025 को जारी की गई थी। बाद में संयुक्त संचालक, नगर तथा ग्राम निवेश, बिलासपुर की ओर से इसके निरस्तीकरण का प्रस्ताव संचालनालय को भेजा गया। इसके बाद संबंधित संस्था को अपना पक्ष रखने और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया। 31 जुलाई 2026 को सुनवाई के लिए बुलाए जाने पर संस्था ने जवाब देने के लिए 15 दिन का अतिरिक्त समय मांगा। इसके बाद भागीदार नमन गोयल ने 7 अगस्त को उपस्थित होकर अपना जवाब और दस्तावेज प्रस्तुत किए। जांच समिति ने प्रकरण और संस्था की ओर से दिए गए जवाबों का परीक्षण किया। 24 अगस्त को जवाब पर विचार करने के बाद आगे की कार्रवाई की गई।
पहुंच मार्ग के इस्तेमाल पर उठे सवाल
अंतिम आदेश में दर्ज पहली महत्वपूर्ण विसंगति प्रोजेक्ट के पहुंच मार्ग से संबंधित है। जांच समिति के अनुसार जिस भूखंड का उपयोग नए विकास के लिए पहुंच मार्ग के रूप में किया जा रहा था, वह पूर्व में स्वीकृत अभिन्यास का हिस्सा था और सामान्य सार्वजनिक मार्ग नहीं था। समिति के मुताबिक इस भूमि को नए प्रोजेक्ट में पहुंच मार्ग के रूप में शामिल करने से पहले पूर्व स्वीकृत अभिन्यास में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत संशोधन कराया जाना आवश्यक था। जांच में इस प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने की बात सामने आई। इसी आधार पर संबंधित पहुंच मार्ग को लेकर संस्था द्वारा प्रस्तुत पक्ष को पर्याप्त नहीं माना गया।
60 प्रकोष्ठ की अनुमति लेकिन नक्शे से बन रही 90 की संख्या
दूसरा महत्वपूर्ण मामला स्वीकृत मानचित्र और प्रकोष्ठों की संख्या से जुड़ा है। विकास अनुज्ञा के अनुसार प्रोजेक्ट में 15 ब्लॉक प्रस्तावित थे। प्रत्येक ब्लॉक में चार तल और प्रत्येक तल पर एक प्रकोष्ठ के हिसाब से कुल 60 प्रकोष्ठ प्रस्तावित बताए गए थे। इसके विपरीत स्वीकृत मानचित्र में कुछ स्थानों पर छह तल दर्शाए जाने की बात आदेश में दर्ज है। इस गणना के आधार पर प्रकोष्ठों की कुल संख्या बढ़कर 90 हो जाती है। इस अंतर का असर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS और निम्न आय वर्ग यानी LIG के लिए निर्धारित प्रकोष्ठों की गणना पर भी पड़ने की बात कही गई है।
लिपिकीय त्रुटि वाला जवाब स्वीकार नहीं
अनंत रियल्टी की ओर से इस अंतर को सलाहकार द्वारा की गई लिपिकीय नंबरिंग त्रुटि बताया गया। जांच समिति ने इस जवाब को स्वीकार नहीं किया। समिति ने अपने परीक्षण में कहा कि स्वीकृति से पहले अभिन्यास पर आवेदक के हस्ताक्षर होते हैं। ऐसे में मानचित्र में दर्ज विवरण की जिम्मेदारी से आवेदक संस्था को अलग नहीं माना जा सकता। प्रकरण की जांच और जवाबों के परीक्षण के बाद संचालनालय ने संस्था के स्पष्टीकरण को असंतोषजनक माना और विकास अनुज्ञा की शर्तों का उल्लंघन पाए जाने पर अनुमति निरस्त करने की कार्रवाई की।
अन्य पहलुओं पर भी आधिकारिक सूत्रों के दावे
जांच प्रक्रिया से परिचित उच्च पदस्थ आधिकारिक सूत्रों ने प्रोजेक्ट से जुड़े कुछ अन्य पहलुओं पर भी सवाल उठने का दावा किया है। सूत्रों के मुताबिक प्रक्रियाओं में कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए एक आर्किटेक्ट की वैधता, EWS-LIG दायित्वों से जुड़े शपथ-पत्र, पहुंच मार्ग की चौड़ाई, पार्किंग और ओपन स्पेस से संबंधित विवरण भी जांच के दौरान चर्चा में आए। सूत्रों ने स्वीकृतियां प्राप्त करने के दौरान कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों को कथित तौर पर छिपाने या गलत तरीके से प्रस्तुत करने का भी दावा किया है। हालांकि इन दावों को अंतिम तीन पृष्ठ के निरस्तीकरण आदेश में स्वतंत्र निष्कर्ष के रूप में दर्ज नहीं किया गया है। इसलिए इन बिंदुओं को आधिकारिक सूत्रों के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
RERA और कलेक्टर समेत अधिकारियों को भेजा आदेश
विकास अनुज्ञा निरस्त करने के अंतिम आदेश की प्रतियां संबंधित विभागों और अधिकारियों को भी भेजी गई हैं। इनमें आवास एवं पर्यावरण विभाग, कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त, छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (CG RERA), अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, संयुक्त संचालक नगर तथा ग्राम निवेश और उप पंजीयक सहित संबंधित अधिकारी शामिल हैं। आदेश की प्रतियां सूचना एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई हैं। विकास अनुज्ञा निरस्त होने के बाद अब प्रोजेक्ट से संबंधित आगे की कार्रवाई संबंधित विभागों और प्राधिकरणों के स्तर पर नियमों के अनुसार होने की संभावना है।
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