छत्तीसगढ़
गांजा तस्करों पर बड़ी कार्रवाई, 3 तस्करों को 10-10 साल कठोर कारावास
Shantanu Roy
15 Nov 2025 6:30 PM IST

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छग
Raipur. रायपुर। गांजा तस्करी के खिलाफ चल रहे अभियान को बड़ी सफलता मिली है। रायपुर स्थित एनडीपीएस (NDPS) विशेष न्यायालय ने तीन गांजा तस्करों—सूर्यकांत नाग, उमेश मनहीरा और धीरेन्द्र मिश्रा—को कड़े दंड से नवाजते हुए 10-10 वर्ष के कठोर कारावास और 1-1 लाख रुपए के आर्थिक दंड की सजा सुनाई है। अदालत ने यह फैसला 16 गवाहों की गवाही, पुलिस की कार्रवाई और केस डायरी में दर्ज मजबूत साक्ष्यों के आधार पर सुनाया।
मुख्य आरोपी सूर्यकांत नाग आदतन तस्कर, राजनीतिक रिश्तेदारी भी उभरी
इस मामले में गिरफ्तार मुख्य आरोपी सूर्यकांत नाग को अदालत ने “आदतन तस्कर” माना है। जांच के दौरान सामने आया कि सूर्यकांत नाग की राजनीतिक पहुंच भी थी। वह सरायपाली के पूर्व कांग्रेस विधायक किस्मत लाल नंद का करीबी रिश्तेदार बताया गया है। हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सजा का आधार केवल अपराध के सबूत थे, न कि आरोपी की किसी राजनीतिक पहचान से उसका संबंध।
आमानाका थाना पुलिस ने 2020–21 में किया था गिरफ्तार
यह पूरा मामला वर्ष 2020–21 का है, जब आमानाका थाना पुलिस ने एक विशेष अभियान के दौरान आरोपियों को बड़ी मात्रा में अवैध गांजा ले जाते हुए गिरफ्तार किया था। पुलिस ने मौके से गांजा, वाहन और तस्करी में इस्तेमाल होने वाले अन्य सामान जब्त किए थे। जांच के बाद तीनों आरोपियों पर NDPS एक्ट की धाराओं के तहत केस दर्ज कर न्यायालय में चालान पेश किया गया। पुलिस की ओर से पेश किए गए सबूतों में बरामद गांजा, वाहन, मोबाइल कॉल डिटेल्स और तस्करी के नेटवर्क से जुड़े अहम लिंक शामिल थे। पुलिस की यह कार्रवाई उस दौर में हुई थी जब रायपुर सहित प्रदेश में गांजा तस्करी के कई बड़े रैकेट सक्रिय थे, जिन पर लगातार नकेल कसने के निर्देश जारी किए गए थे।
16 गवाहों की गवाही ने मजबूत किया मामला
विशेष कोर्ट के सामने कुल 16 गवाहों ने बयान दर्ज कराए। इनमें मामले की जांच करने वाले अधिकारी, गिरफ्तारी के दौरान मौजूद पुलिसकर्मी, और जब्ती पंचों के बयान महत्वपूर्ण रहे। गवाहों के सुसंगत बयानों और पुलिस द्वारा प्रस्तुत तकनीकी व भौतिक साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी माना।
NDPS विशेष जज पंकज कुमार सिन्हा ने सुनाया निर्णय
यह महत्वपूर्ण फैसला NDPS विशेष न्यायाधीश पंकज कुमार सिन्हा ने सुनाया। उन्होंने अपने निर्णय में कहा कि गांजा तस्करी गंभीर और समाज व युवा पीढ़ी को नुकसान पहुंचाने वाला अपराध है, इसलिए दोषियों को कठोर दंड देना आवश्यक है। अदालत ने NDPS एक्ट की कठोरता का हवाला देते हुए आरोपियों को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास और 1-1 लाख रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई।
प्रदेश में बढ़ते मादक पदार्थों पर सख्त कार्रवाई का संदेश
इस फैसले ने प्रदेश में सक्रिय गांजा व अन्य नशीले पदार्थों के तस्करों को एक स्पष्ट संदेश दिया है कि न्यायालय ऐसे अपराधों पर किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरतेगा। लगातार बढ़ रही तस्करी और युवाओं को नशे की लत से बचाने के लिए प्रशासन और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के बाद अदालत का यह फैसला एक अहम कदम माना जा रहा है। अदालत के इस कठोर निर्णय से पुलिस व एंटी-नारकोटिक्स एजेंसियों का मनोबल भी बढ़ा है। वहीं स्थानीय स्तर पर भी लोगों ने इस फैसले का स्वागत किया है, क्योंकि यह समाज में नशे के खिलाफ मजबूत संदेश देता है।
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