छत्तीसगढ़
महतारी सदन महिलाओं की आर्थिक समृद्धि और समरसता की नई पहचान बनेगी: मंत्री बघेल
Shantanu Roy
23 Sept 2025 6:24 PM IST

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Mahasamund. महासमुंद। राज्य स्तरीय महतारी सदन लोकार्पण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय करेलीबाड़ी धमतरी से वर्चुअल रूप से जुड़कर 51 महतारी सदनों को मातृशक्ति को समर्पित किया। मुख्यमंत्री ने वर्चुअल संबोधित करते हुए कहा कि प्रत्येक ग्राम पंचायतों में ग्रामीण महिलाओं को स्वावलंबी एवं आत्मनिर्भर बनाने तथा आपसी समरसता स्थापित करने सामायिक कार्यक्रमों में सामूहिक भागीदारी तथा महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य से महतारी सदन का निर्माण किया गया है। उन्होंने 17 जिलों के 51 महतारी सदनों का वर्चुअल माध्यम से लोकार्पण किया तथा सभी महिलाओं को बधाई दी।
इस अवसर पर महासमुंद जिले के ग्राम खट्टी में आयोजित महतारी सदन लोकार्पण कार्यक्रम में राज्य खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री दयाल दास बघेल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए तथा श्री बघेल ने फीता काटकर महतारी सदन का शुभारम्भ किया। तत्पश्चात उन्होंने महतारी सदन का अवलोकन भी किया। इस दौरान महासमुंद विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा, बसना विधायक सम्पत अग्रवाल, छत्तीसगढ़ राज्य बीज निगम के अध्यक्ष चंद्रहास चंद्राकर, स्काउट एवं गाइड जिलाध्यक्ष येतराम साहू,जिला पंचायत अध्यक्ष मोंगरा पटेल, उपाध्यक्ष भीखम ठाकुर, जनपद पंचायत महासमुंद अध्यक्ष दिशा दीवान, उपाध्यक्ष हुलसी चंद्राकर,नगर पालिका उपाध्यक्ष देवीचंद राठी, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष पवन पटेल, जिला पंचायत सदस्य जागेश्वर चंद्राकर, महेन्द्र सिक्का, प्रकाश शर्मा, आनंद साहू, दिग्विजय साहु, खट्टी की सरपंच अनिता मेहरा उपस्थित रहे।
इस अवसर पर खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने कहा कि मातृशक्ति के सशक्तिकरण के लिए प्रदेश सरकार ने जो महतारी सदन की परिकल्पना की है, वह वास्तव में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक मील का पत्थर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व से आज हमारी बहन-बेटियों को न सिर्फ काम करने का अवसर मिल रहा है, बल्कि उन्हें सामूहिक निर्णय लेने और अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने का भी मौका मिल रहा है। महतारी सदन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने और सामाजिक समरसता बढ़ाने का सशक्त माध्यम बनेगा। छत्तीसगढ़ सरकार हर कदम पर महिलाओं के साथ खड़ी है।
विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा ने कहा कि आज का यह शुभ अवसर महिलाओं की उन्नति और ग्राम पंचायतों की प्रगति दोनों को एक साथ जोड़ने वाला है। महतारी सदन केवल एक भवन नहीं, बल्कि यह हमारी बहन-बेटियों के सपनों को साकार करने का केन्द्र बनेगा। यहाँ से महिलाएँ स्वावलंबन की दिशा में नए आयाम तय करेंगी और गांव की अर्थव्यवस्था को नई ऊँचाई पर ले जाएँगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के आत्मनिर्भर भारत अभियान और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जी की प्रतिबद्धता से यह पहल महिलाओं के जीवन में नये उत्साह और आत्मविश्वास का संचार करेगी। उन्होंन सभी ग्रामवासियों से अपील किया कि वे इस महतारी सदन को अपनी साझा शक्ति और सहयोग का केन्द्र बनाएं।
बसना विधायक संपत अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रयासों से प्रदेश में महिलाओं के लिए यह विशेष पहल संभव हो सकी है। उनके दूरदर्शी नेतृत्व और संवेदनशील सोच के कारण ही मातृशक्ति को संगठित और सशक्त बनाने की दिशा में ऐसा ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। यह सदन उनके संकल्प और महिलाओं के सम्मान, संस्कार तथा प्रगति के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक है। महतारी सदन के माध्यम से हमारी माताओं और बहनों को बैठकर अपनी बात कहने, सीखने, सिखाने और आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। कार्यक्रम को चंद्रहास चंद्राकर, येतराम साहू, भीखम साहू ने भी संबोधित किया।
कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने बताया कि दूसरे चरण में महासमुंद जिले में कुल 17 महतारी सदन का निर्माण किया जाएगा। प्रत्येक महतारी सदन की लागत राशि 24 लाख 70 हजार रुपए है। पहले चरण में 08 एवं द्वितीय चरण में 09 महतारी सदन का निर्माण किया जाएगा।जिसमें महासमुंद विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बिरकोनी व भोरिंग में, बागबाहरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत खम्हारिया और खल्लारी में, बसना अंतर्गत ग्राम पंचायत गढ़फुलझर, सिंघनपुर और भंवरपुर तथा सरायपाली विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत केंदुआ और तोषगांव में महतारी सदन का निर्माण होगा। आज के कार्यक्रम में लखपति दीदियों को चेक वितरण किया गया। साथ ही पंचायतों में क्यूअर कोड का जारी किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में महिला समूह के सदस्य, ग्रामीण महिलाएं, नागरिक मौजूद थे।
उल्लेखनीय है कि प्रत्येक महतारी सदन का क्षेत्रफल लगभग 2500 से 2507 वर्गफुट होता है, जिससे महिलाओं को पर्याप्त जगह मिलती है। इसमें हॉल, कमरा, किचन, स्टोर रूम, दुकान, बरामदा, सामुदायिक शौचालय, और ट्यूबवेल की व्यवस्था होती है। सुरक्षा के लिए बाउंड्रीवाल बनाई जाती है। महिलाओं के लिए उत्पादों के निर्माण व बिक्री हेतु किचन और दुकान की सुविधा उपलब्ध रहती है। विशेष रूप से हस्तशिल्प, घरेलू सामान, लोक कला आदि विक्रय की सुविधा उपलब्ध है जिससे ग्रामीण महिलाओं को रोजगार मिले। प्रत्येक सदन में पानी के लिए ट्यूबवेल, स्वास्थ्य सुविधाएं और सीमित अवधि के लिए कौशल प्रशिक्षण की व्यवस्था जाएगी। सामुदायिक समरसता एवं महिला सक्रियता को बढ़ावा देने के लिए ये सदन सामूहिक बैठकों के केंद्र के रूप में भी उपयोग किए जाएंगे।
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