शराब घोटाला : कई आरोपी अधिकारियों तक नहीं पहुंची जांच की आंच

नेताओं-अफसरों का संरक्षण, आज भी मलाईदार पदों पर काबिज
एफआईआर में दर्ज आरोपी क्रमांक 20 आशीष श्रीवास्तव किसकी मेहरबानी से अतिरिक्त डिप्टीकमिश्नर आबकारी बने
बड़े अधिकारी और बड़े नेता जानते हुए भी शराब घोटाले के अपराधियों को बड़े पदों पर बनाए रखे है
भाजपा के लिए सबसे बड़ा मुद्दा कांग्रेस का शराब घोटाला अब गले की फांस बनते जा रहा
भाजपा सरकार को बदनाम करने के लिए विभागीय मंत्री और विभाग के वरिष्ठतम अधिकारी के संज्ञान में आने के बावजूद आरोपी अधिकारी पद पर बरकरार
आबकारी विभाग के अधिकारी नकली शराब, एक्सपायरी शराब, मिलावटी शराब, ओवर रेटिंग बिक्री शराब के लिए विभागीय बदनामी को भी नजर अंदाज कर रहे और भाजपा सरकार को बदनाम कर रहे
रायपुर (जसेरि)। छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला प्रवर्तन निदेशालय के मुताबिक छत्तीसगढ़ की ये वो काली सच्चाई है, जिसके खुलासे से राज्य की सियासत में भूचाल आ गया। इसकी सबसे धमाकेदार कड़ी जुड़ी पूर्व मु यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की गिर तारी,जमानत और अब रामगोपाल अग्रवाल की गिर तारी से। ईडी की जांच रिपोर्ट किसी सियासी क्राइम ड्रामा जैसी है, जिसमें हर मोड़ पर घूस, घोटाले और तत्कालीन सरकार की मिलीभगत के सुराग मिलते हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 2019 से 2023 के बीच छत्तीसगढ़ में जो शराब व्यापार चला, वह एक सरकारी लूट मशीन थी, ऊपर से नीति का चोला, लेकिन अंदर से ताक़तवरों की कमाई का खेल। और इस खेल का किंगपिन कौन था? ईडी के मुताबिक़, तत्कालीन मु यमंत्री का बेटा चैतन्य बघेल, जो न केवल काली कमाई के तार जोड़ रहा था, बल्कि उसे रियल एस्टेट में बदलकर एक ऐसी दुनिया बना रहा था जहाँ कैश के बदले सत्ता मिलती थी। इन सबके बावजूद भाजपा सरकार में भी बड़े-बड़े अफसरों और नेताओं को बचाने की लगातार कोशिशें जारी है। यही कारण है कि जांच एजेंसियां एफआईआर में आरोपी बनाए गए कई अफसरों से न तो पूछताछ कर रही है और न ही उनके खिलाफ निलंबन की विभागीय कार्रवाई ही की गई है। इतना ही नहीं उन्हें बाकायदा उच्च मलाईदार पदों पर बिठाया गया है। ईडी के प्रोविजनल अटैचमेंट में आवकारी विभाग के वर्तमान अतिरिक्त आयुक्त आशीष श्रीवास्तव जो कि इस प्रकरण में आरोपी क्रमांक 20 बनाए गए हैं उन्हें नकली होलोग्राम वाली शराब की सप्लाई करने में संलिप्त बताया गया है। उससे जांच एजेंसियों ने आजतक पूछताछ नहीं की और न ही उसके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई। विभाग के शीर्ष अधिकारी इस मसले पर सरकार और जांच एजेंसियां जाने कहकर मामले से पल्ला झाड़ रहे हैं।
राज्य के पूर्व मुख्य सचिव के संरक्षण में चल रहा था शराब सिंडिकेट
इस घोटाले को और खौफनाक बनाता है ईडी का वो खुलासा जिसमें कहा गया है कि ये पूरा शराब सिंडिकेट — अनवर ढेबर, अनिल टुटेजा और अरुण पति त्रिपाठी — दरअसल राज्य के पूर्व मु य सचिव और रिटायर्ड ढ्ढ्रस् अधिकारी विवेक ढांड के संरक्षण में चल रहा था। ईडी का दावा है कि विवेक ढांड सिर्फ पर्यवेक्षक नहीं, बल्कि सीधे लाभार्थी थे। यानी पूरी अफसरशाही पर एक संगठित गिरोह ने कब्जा कर लिया था। ये घोटाला सिर्फ कागज़ों की हेराफेरी नहीं सिस्टम के हाइजैक की कहानी है।
पूरा खेल तीन हिस्सों में बंटा था
पार्ट ए: डिस्टिलरीज़ से 75 प्रति शराब केस की उगाही, जो सरकार के नाम पर वसूला जाता था लेकिन सीधा सिंडिकेट की जेब में जाता। इस चैनल से कमाए गए 319 करोड़। पार्ट बी: डुप्लीकेट होलोग्राम, नकली स्टॉक्स और नकद बिक्री से बनी एक शराब अर्थव्यवस्था। 2022-23 में हर महीने 400 ट्रक बिना सरकारी रिकॉर्ड के शराब ले जाते रहे। एक केस पर 3,880 वसूला गया, जिसमें से केवल 590 सरकार को मिलता, बाकी 3,000 सीधे काले धन में बदल जाता। पार्ट सी: विदेशी शराब की सप्लाई में स्नरु-10ए लाइसेंस के ज़रिए एक्सक्लूसिव कंपनियों को लाइसेंस दिए गए। इन कंपनियों ने पुरानी दरों पर शराब खरीदी और ऊंची कीमतों पर बेची। इस मॉडल से 211 करोड़ का काला मुनाफ़ा कमाया गया, जिसमें 60 फीसदी हिस्सा सीधे राजनीतिक आकाओं को गया।
घोटाले के कैश कलेक्टर का कबूलनामा- हजार करोड़ से अधिक मैंने मैनेज किए
सबसे चौंकाने वाला खुलासा सामने आया लक्ष्मीनारायण बंसल उर्फ पप्पू के कबूलनामे से — जो इस पूरे घोटाले का कैश कलेक्टर था। उसने ईडी को बताया कि 1,000 करोड़ से अधिक की नकद राशि उसने खुद मैनेज की और चैतन्य बघेल के निर्देश पर 80-100 करोड़ नकद केके श्रीवास्तव को पहुंचाए। अनवर ढेबर के फोन से मिली चैट्स भी इस लिंक को पु ता करती हैं।
अब रामगोपाल से पूछताछ
हालाकि इस मामले में ज्यादातर बड़े आरोपी गिर तार किए जा चुके हैं और ज्यादातर अब जमानत पर हैं। ऐसे में कुछ दिन पहले कांग्रेस के कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को ईओडब्ल्यू ने गिर तार किया है, और उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है। पूछताछ में ईओडब्ल्यू के अधिकारी कई इनपुट मिलने का दावा कर रहे हैं, जांच एजेंसी के मुताबिक, भिलाई के कारोबारी लक्ष्मीनारायण बंसल उर्फ पप्पू ने बयान में कहा है कि दीपेन चावड़ा के जरिये करीब 800 करोड़ रुपए कांग्रेस भवन पहुंचाये गये थे। दूसरी ओर निखिल चंद्राकर ने भी अपने बयान में कोल लेवी की रकम अग्रवाल तक पहुंचाने की बात कबूल की है। इसके साथ ही सूर्यकांत तिवारी के पास मिली डायरी में रकम का जिक्र है। अन्य माध्यमों से भी टुकड़ों में रकम दिए जाने के इनपुट मिले हैं। गवाहों के बयान को को लेकर क्रॉस वेरिफिकेशन कराया जा रहा है।





