शराब घोटाला : जांच एजेंसियों की कार्यवाही पर उठ रहे सवाल

2023 में कांग्रेस शासन के दौरान 2161 करोड़ का शराब घोटाला
रायपुर (जसेरि)। छत्तीसगढ़ के चर्चित 2161 करोड़ के शराब घोटाला जिसको पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान प्रधानमत्री सहित बीजेपी के सभी बड़े नेताओं ने जोर-शोर से उठाया था और दोषियों पर कार्रवाई की बात कही गई थी उस घोटाले पर अब लीपा-पोती की कोशिश हो रही है। प्रवर्तन निदेशालय समेत राज्य के आर्थिक अपराध अन्वेषण व्यूरो द्वारा अब तक की जांच-पूछताछ और कोर्ट में पेश किए गए आरोप पत्रों के आधार पर घोटाले में लिप्त किसी भी नेता-अफसर को दोषी नहीं ठहराया जा सका है। इतना ही नहीं घोटाले में लिप्त कई बड़े अधिकारियों को जांच एंजेसिंयों ने न तो तलब किया और न ही उनसे पूछताछ ही की। इससे ईडी और ईओडव्ल्यू के जांच पर सवाल उठ रहे हैं।
गौरतलब है कि घोटाले में ईओडब्ल्यू द्वारा दर्ज एफआईआर में आरोपी क्रमांक 20 आबकारी विभाग के तत्कालिन अतिरिक्त आयुक्त आशीष श्रीवास्तव व कई अन्य अफसरों को न तो तलब किया गया है और ऩ उनसे पूछताछ की गई। इतना ही नहीं ऐसे दागी अफसरों को विभाग में उच्च पदों पर पदस्थ कर उपकृत किया जा रहा है। इससे साफ पता चलता है कि इतने बड़े घोटाले जिसके कारण कांग्रेस को सत्ता खोनी पड़ी और भाजपा को सरकार बनाने का मौका मिला उसमें लीपा-पोती कर अब नेताओं-अफसरों को बचाने की पूरी बंदोबस्त की जा रही है। दोषियों को बड़े नेताओं और उच्चाधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है जिसके कारण ऩ तो जांच एंजेसियों ने उनसे पूछताछ की और न ही विभागीय कार्रवाई की गई। इस पूरे मामले में तानाखार विधायक तुलेश्वर हीरा सिंह मरकाम ने विधानसभा के मौजूदा सत्र में एक ध्यानाकर्षण सूचना के माध्यम से तत्कालिन अतिरिक्त आबकारी आयुक्त आशीष श्रीवास्तव पर विभाग द्वारा कार्रवाई नहीं किए जाने पर सरकार से जवाब मांगा है। प्रवर्तन निदेशालय द्वारा इस मामले में पेश किए गए प्रोविजनल अटैचमेंट में उक्त अधिकारी को नकली होलोग्राम वाली शराब सप्लाई करने में संलिप्त बताया गया है।
2161 करोड़ की अवैध कमाई : घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा प्रोविजनल अटैचमेंट आदेश क्रमांक 03/2023 संलग्न किया गया है। प्रवर्तन निदेशालय के उपरोक्त जानकारी मुख् शासकीय अधिकारियों के विरूद्ध पद के दुरूपयोग एवं आसमानुपातिक संपत्ति अर्जित करने आरोपों की है। पद का दुरूपयोग एवं असमानुपातिक संपत्ति के आरोपों का गोपनीय सत्यापन पृथक पृथक किया जाना आवश्यक होने से पद का दुरूपयोग की जानकारी का गोपनीय सत्यापन किय गया। सूत्रों से जानकारी प्राप्त हुयी है कि छ.ग राज्य में अनिल टुटेजा. (भा.प्र.से.) संयुक्त सचित्र छ.ग. शात्तन वाणिज्य एवं उद्योग विभाग द्वारा अनवर ढेबर एवं अरूणपति त्रिपाठी (आई.टी एस.), विशेष सचिव, आबकारी विभाग रायपुर एम.डी. छ.ग. राज्य मार्केटिंग कार्पोरेशन लिमीटेड रायपुर के साथ सिंडिकेट के रूप में कार्य कर अनवर ढेबर के सहयोगी विकास अग्रवाल उर्फ सुब्बू, अरविंद सिंह, संजय दिवान, देशी शराब आसवनी मालिक तथा विभिन्न जिलों एवं मु यालय में पदस्थ आबकारी अधिकारियों के साथ मिलकर राज्य में मदिरा की ब्रिकी में अवैधानिक कमिशन की उगाही कर तथा बिना हिसाब के मदिरा की शासकीय मदिरा दुकानों में सप्लाई कर लगभग 2161 करोड़ रू. की अवैध कमाई कर शासन को क्षति पहुंचायी गयी है। इसी अवैध रकम से उच्च पदस्थ अधिकारी अनिल टुटेजा, अरूणपति त्रिपाठी एवं अनवर ढेबर द्वारा बहुत से अचल संपत्ति अर्जित की गयी है, जिसे प्रवर्तन निदेशालय द्वारा प्रादिजनन्न अटैचमेंट आदेश कमा 03/2023 के तहत् अटैच भी किया गया है।
आबकारी अधिकारियों को प्रति केस 150 रुपए का कमीशन : इसी तरह देशी मदिर के सप्लाई हेतु राज्य में बनायी गयी शासकीय शराब दुकाना की व्यवस्था के समानांतर नयी व्यवस्था बनाकर आसवनी संचालकों से बिना रिकार्ड के देशी मदिरा का निर्माण कराकर डुप्लीकेट होलोग्राम लगाकर शासकीय मदिरा दुकानों के माध्यन से पृथक से बिकी कराकर उससे करोडों रूपयों की अवैध कमाई की गयी है। इस कृत्य में आसवनी मालिको बोतल सप्लाईकर्ता एजेंसी, डुप्लीकेट होलोग्राम प्रदायकर्ता एजेंसी, बी-पार्ट की शराब बिकी के पैसे कलेक्ट करने वाली एजेंसी, आबकारी विभाग के अधिकारीगण, सी एस एम सी एल के अरुणपने त्रिपाठी के संलिप्त रहे है। प्रवर्तन निदेशालय द्वारा इसे बी पार्ट के कमिशन के रूप में आरोपित किया गया है। इस प्रकार के विकय वर्ष 2019-2020, 2020-21, 2021-2022 में किया गया। इस अवैध मदिरा की बिकी से प्राप्त अवैध वसूली राशि का कार्य विकास अग्रवाल उर्फ सुब्बू के माध्यम से किया जाता था जो अनवर ढेबर एवं अरूणपति त्रिपाठी को इसकी जानकारी देता था। सूत्रों के अनुसार प्रति माह लगभग 200 ट्रक, जिसमें प्रति ट्रक लगभग 800 मदिरा के केस होते थे जो कि शराब निर्माताओं द्वारा सिंडीकेट को प्रदान किये जाते थे। सूत्रों के अनुसार 2019-2020 अवैध मदिरा 560 रू प्रति प्रकरण के हिसाब से शराब निर्माताओं से प्राप्त की जाती थी जिसे 2892 रू एम.आर.पी. पर बेचा जाता था जो बाद में 3880 रूपये तक बेचा गया। इस स पूर्ण कार्य के लिए शराब निर्माताओं को 560-600 रूपये प्रति केस तथा आबकारी अधिकारियों को लगभग 150 रू प्रति केस दिया जाता था। शेष स पूर्ण राशी अनवर ढेबर द्वारा विकास अग्रवाल उर्फ सूब्बू के माध्यन से ली जाती थी। सूत्रों के अनुसार इसी राशी का लगभग 15 प्रतिशत शेयर अनिल टुटेजा अनवर ढेडर स्वयं रख लेते थे तथा शेष हिस्सा राजनेताओं को बाँट देते थे। राशि लेने-देने का कार्य भी अनवर ढेबर एवं उत्तके अधिनस्थ लोगों द्वारा किया जाता था। बी-पार्ट की देशी मदिर सप्लाई हेतु आसवनी नालिको को मेसर्स अदीप एन्पायर से जुड़े अमित सिंह, अनुराग ट्रेडर्स त जुडे अनुराग द्विवेदी, एवं नवनीत गुप्ता द्वारा बिना इन्चॉइस के नगद लेन-देन पर बोतल सप्लाय की गयी। अरविंद सिंह की पत्नि पिंकी सिंह के नाम पर मेसर्स अदीप ए पायर है। अरूणपति त्रिपाठी के निर्देशानुसार डुप्लीकेट होलोग्राम सप्लाई का कार्य प्रीज्म होलोग्राम एण्ड सिक्योरिटी प्राईवेट लिमीटेड के विधु गुप्ता द्वारा किया जाता रहा है। और इस कार्य में आबकारी अधिकारी जनार्दन कौरव महत्वपूर्ण रोल अदा कियें है। जनार्दन कौरव से प्राप्त जानकारी अनुसार दीपक दुआरी द्वारा आसवनी मालिकों को डुप्लीकेट होलोग्राम सप्लाई किया जाता था। डुप्लीकेट होलोग्राम लगी देशी मदिरा को योजनाबद्ध तरीके से आसवनियों से वहां पदस्थ आबकार अधिकारियों की देख-रेख में निकाला जाकर शासकीय मदिरा दुकानों में सप्लाई किया जाता था।
आबकारी अधिकारी ही कर रहे थे सप्लाई : डुप्लीकट होलोग्राम लगी मदिरा विक्रय का कारोबार प्रदेश के रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, राजनांदगांव, कबीरव-बालोद, महासमुंद, धमतरी, बलौदाबाजार, गरियाबंद, मुंगेली, जांजगीर-चांपा, कोरबा, बेमेतरा रायगढ जिलों में किया जाता रहा है। डुप्लीकेट होलोग्राम लगी मदिरा की सप्लाई में आबक विभाग के ततसमय पदस्थ जनार्दन कौरव, सहायक जिला आबकारी अधिकारी रायपुर, अनिमेष नेताम, डिप्टी कमिश्नर आबकारी धमतरी, विजय सेन शर्मा, डीप्टी कमिश्नर आबकारी. महासमुंद, प्रमोद कुमार नेताम, सहायक आयुक्त आबकारी, रामकृष्ण मिश्रा, सहायक आबकारी आयुक्त, विकास गोस्वामी, सहायक आबकारी आयुक्त, इकबाल खान, जिला आबकारी अधिकारी, नितिन खंडुजा, जिला आबकारी अधिकारी, नवीन प्रताप सिंह तोमर, सहायक आयुक्त आबकारी, मंजुश्री कसेर, जिला आबकारी अधिकारी, सौरभ ब शी, सहायक आयुक्त आबकारी, दिनकर वासनिक, सहायक आयुक्त आबकारी, आशीष श्रीवास्तव, अतिरिक्त आयुक्त आबकारी मु यालय, अशोक सिंह, जिला आबकारी अधिकारी, मोहित जायसवाल, जिला आबकारी अधिकारी, नीतू नोतानी, उपायुक्त आबकारी, रविश तिवारी, सहायक जिला आबकारी अधिकारी, गरीबपाल दर्दी, सहायक जिला आबकारी अधिकारी, नोहर सिंह ठाकुर, आबकारी अधिकारी, सोनल नेताम, सहायक आयुक्त की संलिप्तता पायी गयी है। उक्त संपूर्ण सिंडीकेट के मु य भूमिका सी.एस.एम.सी.एल. के ततकालीन प्रबंध संचालक अरूणपति त्रिपाठी द्वारा की गयी है, जिनके द्वारा आसवनी मालिकों की होटल वेनिंगटन में अनवर ढेबर से मुलाकात कराकर मदिरा के रेट में बढ़ोतरी किये जाने उसके एवज में भारी मात्रा में कमीशन देने हेतु दबाव बनाया गया। मेसर्स प्रीज्म होलोग्राम एण्ड सिक्योरिटीस प्राई. लिमीटेड के विधु गुप्ता से डुप्लीकेट होलोग्राम सप्लाई हेतु योजनाबद्ध तरीके से टेण्डर दिलवाकर पूर्व में इस्तेमाल हो चुके होलोग्राम के नबर पर ही डुप्लीकेट होलोग्राम तैयार कराकर उसके अधीनस्थ दिपक दुवारी से सहायक आयुक्त आबकारी जनार्दन कौरव के माध्यम से आसवनी मालिकों तक पहुंचाने की व्यवस्था करायी गयी। अरूणपति त्रिपाठी को उपरोक्त अपराधिक कृत्य से करोड़ो की अवैध राशि प्राप्त होने की जानकारी मिली है। जिसमे से लगभग 20 करोड़ के अवैध रकम डुप्लीकेट होलोग्राम युक्त देशी मदिरा बिक्री से कमिशन बतौर प्राप्त हुयी है।
विधायक तुलेश्वर सिंह का ध्यानाकर्षण
विधायक तुलेश्वर मरकाम ने अपने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव में कहा कि क्या यह कहना सही है कि छ0ग0 सरकार के आबकारी विभाग हमेशा से पूरे देश में भ्रष्टाचार अवैध शराब की बिक्री मिलावटी शराव नकली होलोग्राम अवैध तरीके से शराब की बिक्री के नाम पर प्रसिद्ध है। इसके कारण हमारा प्रदेश एवं प्रदेश की जनता गर्मशार कई बार हुई है इस संबंध में राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो रायपुर के द्वारा 2161 करोड़ के अवैध शराब की जांच का प्रथम सूचना पत्र क्रमांक 04/2024 धारा 7 एवं 12, 420, 467, 468, 471, 120 बी के तहत लगभग 70 संदेहियों एवं अन्य के विरुद्ध राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो रायपुर एवं ईडी के द्वारा जांच में लेकर जनता के स मुख में काफी प्रचार-प्रसार किया गया वर्तमान सरकार भ्रष्टाचार मुक्त एवं जीरो टारलेंस की बात कहती है उपरोक्त अपराध में संदेही क्रमांक 20 तत्कालीन अतिरिक्त आबकारी मु यालय रायपुर एवं अन्य व्यक्तियों के विरूद्ध आबकारी विभाग, राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्युरो एवं ईडी के द्वारा आज दिनांक तक इतने बड़े शराब घोटाले में संलिप्त नराफियाओं को उनके राजनीतिक प्रभाव व उच्चाधिकारियों से संबंध के कारण उनके विरूद्ध कोई कार्यवाही नहीं की गई है। उल्टे उन्हें आबकारी विभाग के मलाईदार पद पर बैठाकर भ्रष्टाचार करवाया जा रहा है। उपरोक्त उल्लेखित एजेंसिया के एवं आबकारी विभाग के द्वारा कार्यवाही नहीं करने के कारण आम जनता एवं शासन/प्रशासन के प्रति आक्रोश व्याप्त है।





