छत्तीसगढ़
शराब घोटाला: चैतन्य बघेल की हाईकोर्ट में याचिका पर बहस पूरी, फैसला सुरक्षित
Shantanu Roy
8 Dec 2025 9:11 PM IST

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Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में शराब घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की हाईकोर्ट में याचिका पर बहस पूरी हो गई है। इस मामले की सुनवाई जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की सिंगल बेंच में हुई। कोर्ट ने सुनवाई पूरी करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है, जिससे राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। चैतन्य बघेल, जिन्हें 18 जुलाई से रायपुर सेंट्रल जेल में रखा गया है, ने अदालत में ईडी की गिरफ्तारी को चुनौती दी थी और राहत की मांग की थी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इसके जवाब में मनी लॉन्ड्रिंग और शराब घोटाले में चैतन्य के संलिप्त होने के आरोपों का विस्तार से विवरण प्रस्तुत किया। ईडी के अनुसार, शराब घोटाले की रकम में से चैतन्य बघेल को लगभग 16.70 करोड़ रुपए मिले, जो ब्लैक मनी के माध्यम से रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में निवेश किए गए। जांच में यह भी सामने आया कि लगभग 1000 करोड़ रुपए की वित्तीय हेराफेरी की गई थी।
ईडी ने अपनी जांच में विल ग्रीन प्रोजेक्ट (बघेल डेवलपर्स) में चैतन्य बघेल द्वारा घोटाले की रकम का निवेश किए जाने का खुलासा किया। प्रोजेक्ट से जुड़े अकाउंटेंट के ठिकानों पर छापेमारी कर रिकॉर्ड जब्त किए गए। जांच में पाया गया कि प्रोजेक्ट का वास्तविक खर्च 13-15 करोड़ रुपए था, जबकि रिकॉर्ड में केवल 7.14 करोड़ रुपए दिखाए गए। डिजिटल डिवाइस और दस्तावेजों से यह भी पता चला कि कंपनी ने एक ठेकेदार को 4.2 करोड़ रुपए कैश पेमेंट किया, जो रिकॉर्ड में नहीं था। ईडी के वकील सौरभ पाण्डेय ने अदालत को बताया कि शराब घोटाले के पैसे को अलग-अलग लेयरिंग के जरिए चैतन्य बघेल तक पहुंचाया गया। इसमें कई लोगों के माध्यम से लेनदेन किया गया, जिसमें पप्पू बंसल ने अपने बयान में खुलासा किया कि पैसे अनवर ढेबर के जरिए दीपेंद्र चावड़ा, फिर केके श्रीवास्तव और कांग्रेस कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल के माध्यम से चैतन्य बघेल तक पहुंचते थे। इसके अलावा, मोबाइल चैट और रिकॉर्डिंग से भी यह सबूत मिले हैं कि लेन-देन में कई लोगों का आपस में कनेक्शन था।
बचाव पक्ष के वकील फैजल रिजवी ने अदालत में कहा कि पप्पू बंसल के बयान के आधार पर चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी सही नहीं है। उन्होंने दावा किया कि पप्पू बंसल के खिलाफ नॉन बेलेबल वारंट जारी है और वह खुलेआम घूम रहे हैं। रिजवी ने कहा कि 2022 से शराब घोटाले की जांच चल रही है, और चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी से पहले उनके समन नहीं दिए गए। मार्च में जब उनके घर में छापेमारी हुई थी, तो सभी डिजिटल डिवाइस जब्त कर लिए गए थे और डॉक्यूमेंट्स एजेंसी को चैतन्य के जरिए ही उपलब्ध कराए गए थे।
वकील ने आगे कहा कि चैतन्य बघेल ने जांच में लगातार सहयोग किया है, कई बार पूछताछ में भाग लिया और सभी आवश्यक दस्तावेज़ उपलब्ध कराए। उनके खिलाफ गिरफ्तारी का एकमात्र कारण यह है कि वह पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र हैं। इस मामले ने छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और प्रशासनिक परिदृश्य में हलचल पैदा कर दी है। शराब घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे के शामिल होने से राजनीतिक पार्टियों और जनता में व्यापक चर्चा हो रही है। हाईकोर्ट का फैसला सुरक्षित रखने के बाद सभी की निगाहें अब न्यायालय की तरफ लगी हैं। इस केस की कानूनी जटिलता, ईडी की जांच और राजनीतिक संवेदनशीलता इसे हाई प्रोफाइल मामला बनाती है।
अदालत के फैसले से न केवल चैतन्य बघेल की भविष्य की कानूनी स्थिति तय होगी, बल्कि छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में आने वाले मामलों के लिए भी अहम मिसाल बनेगी। हाईकोर्ट में बहस के दौरान पक्षों ने दस्तावेज़, डिजिटल रिकॉर्ड और गवाहों के बयान अदालत में प्रस्तुत किए। ईडी ने जोर देकर कहा कि मामले में संलिप्त लोगों के आपसी कनेक्शन और वित्तीय हेराफेरी के प्रमाण पर्याप्त हैं। वहीं बचाव पक्ष ने आरोपों और गिरफ्तारी प्रक्रिया पर सवाल उठाए और न्यायिक जांच की मांग की। इस हाई प्रोफाइल केस से यह स्पष्ट हो गया है कि छत्तीसगढ़ में मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय घोटालों की जांच में राजनीतिक दबाव और संवेदनशीलता के बावजूद कानूनी प्रक्रिया चलती रहती है। न्यायालय का अंतिम फैसला न केवल चैतन्य बघेल की स्थिति तय करेगा बल्कि राज्य में भ्रष्टाचार और वित्तीय अपराध के मामलों में भी दिशा-निर्देश का काम करेगा।
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