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Panduka. पांडुका। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के वन परिक्षेत्र पांडुका अंतर्गत ग्राम तौरेंगा में तेंदुए की दस्तक से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। गुरुवार तड़के करीब 5 बजे एक तेंदुआ घर के पास देव पूजा के लिए बांधकर रखे गए बकरे को अपना शिकार बनाकर ले गया। तेंदुआ बकरे को दरवाजे के छेद से घसीटते हुए करीब 300 मीटर दूर झाड़ियों में ले गया। सुबह जब परिवार के सदस्य उठे तो घर के मुख्य दरवाजे के पास खून के निशान देखकर उनके होश उड़ गए। घटना के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग से सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने और पीड़ित परिवार को मुआवजा देने की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, ग्राम तौरेंगा पंचायत के वार्ड क्रमांक 6 में रहने वाले भीखम ध्रुव और चुम्मन ध्रुव अपने परिवार के साथ रहते हैं। परिवार ने देव पूजा के लिए एक बकरा खरीदा था, जिसे घर के पास खूंटी से बांधकर रखा गया था। गुरुवार तड़के जंगल की ओर से आए तेंदुए ने बकरे पर हमला कर दिया। इसके बाद उसे घसीटते हुए झाड़ियों की ओर ले गया। घटना के समय परिवार के सदस्य घर में सो रहे थे। सुबह जब परिवार के लोग उठे तो बकरा अपनी जगह पर नहीं मिला। आसपास देखने पर मुख्य दरवाजे के पास खून के निशान दिखाई दिए। इसके बाद दोनों भाइयों ने आसपास तलाश शुरू की।
खून और घसीटे जाने के निशानों का पीछा करते हुए वे घर से लगभग 300 मीटर दूर झाड़ियों तक पहुंचे। वहां तेंदुआ बकरे को खा रहा था। दोनों भाई बकरे के कुछ हिस्से छुड़ाने में सफल रहे। हालांकि, तब तक बकरे की मौत हो चुकी थी। इस घटना से परिवार को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। पीड़ित परिवार का कहना है कि बकरे को विशेष रूप से देव पूजा के लिए खरीदा गया था। अब पूजा के लिए दूसरा बकरा खरीदना पड़ेगा। परिवार ने वन विभाग से उचित मुआवजा देने की मांग की है, ताकि धार्मिक आयोजन के लिए दूसरा बकरा खरीदा जा सके।
घटना के बाद आसपास के ग्रामीणों में भी डर का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि तौरेंगा गांव जंगल से लगा हुआ है। इस कारण जंगली जानवरों की आवाजाही बनी रहती है। विशेष रूप से रात और सुबह के समय वन्यजीवों के रिहायशी इलाकों में पहुंचने की आशंका रहती है। तेंदुए द्वारा घर के पास से बकरा उठा ले जाने की घटना ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव के आसपास खेतों, बाड़ियों और खलिहानों में बड़ी संख्या में झाड़ियां और खरपतवार उग आए हैं। लंबे समय से साफ-सफाई नहीं होने के कारण कई स्थानों पर घनी झाड़ियां बन गई हैं। ऐसे स्थान जंगली जानवरों के छिपने के लिए अनुकूल हो सकते हैं। ग्रामीणों को आशंका है कि तेंदुआ दोबारा आबादी वाले क्षेत्र में आ सकता है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि जंगलों में मानवीय गतिविधियों के बढ़ने, पेड़ों की कटाई और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास में बदलाव के कारण जंगली जानवरों का रिहायशी क्षेत्रों की ओर आना बढ़ सकता है। हालांकि, इस विशेष घटना में तेंदुए के गांव तक पहुंचने के कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों ने वन विभाग से गांव के आसपास निगरानी बढ़ाने, घनी झाड़ियों की सफाई कराने और वन्यजीवों की मौजूदगी को लेकर आवश्यक सुरक्षा उपाय करने की मांग की है। साथ ही पशुपालकों से रात के समय मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर रखने की अपील की जा रही है। तेंदुए की मौजूदगी की आशंका को देखते हुए ग्रामीणों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। वन्यजीव दिखाई देने पर उसका पीछा करने या उसके करीब जाने के बजाय सुरक्षित दूरी बनाकर वन विभाग को सूचना देना जरूरी है। फिलहाल घटना ने गांव में सुरक्षा और वन्यजीवों से होने वाले नुकसान के मुआवजे का मुद्दा फिर सामने ला दिया है।
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