छत्तीसगढ़

ESIS में कमीशनखोरी, श्रममंत्री ने दवा खरीदी पर लगाई रोक

Nilmani Pal
17 Nov 2025 11:35 AM IST
ESIS में कमीशनखोरी, श्रममंत्री ने दवा खरीदी पर लगाई रोक
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जनता से रिश्ता की खबर पर त्वरित एक्शन, खबर का असर

संचालक को जांच के निर्देश, औषधालयों से दवाओं की जानकारी मांगी

ईएसआईएस में दवा खरीद में प्रति वर्ष पचास करोड़ का भ्रष्टाचार

दवा कंपनियों से सांठ-गांठ कर अधिकारी-कर्मचारी कर रहे कमीशनखोरी

जेनेरिक दवाओं की जगह, ब्रांडेड दवाइयों की खरीदी

पांच करोड़ दवा 50 करोड़ में खरीदकर सरकार को लगा रहे चूना

कमीशनखोरी के लिए बाजार में नहीं चलने वाली दवाइया खरीद रहे

ब्रांडेड दवा लिखने-वितरित करने पर रोक, फिर भी हो रही खरीदी

रायपुर। राज्य कर्मचारी बीमा सेवाएं के अधिकारियों द्वारा ब्रांडेड कंपनियों से दवाओं की खरीदी कर कमीशनखोरी करने की शिकायतों को देखते हुए श्रममंत्री लखन लाल देवांगन ने वर्ष 2025-26 में ब्रांडेड दवाओं की खरीदी के लिए मंगाए गए इंडेट को निरस्त करने के आदेश देते हुए संचालक, राज्य कर्मचारी बीमा सेवाएं को कमीशनखोरी की जांच कर इस अनियमितता में लिप्त अधिकारियों पर कार्रवाई कर जानकारी से अवगत कराने को कहा है। जनता से रिश्ता ने विगत 31 अक्टूबर के अपने अंक में पूर्व मंत्री और विधायक ननकीराम कंवर द्वारा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से की गई इस कमीशनखोरी की शिकायत के आधार पर यह मामला उठाया था। श्रममंत्री ने इस पर संज्ञान लेते हुए संचालक को वर्तमान सत्र के लिए दवा खरीदी पर रोक लगाने को कहा है।

दरअसल पूर्वमंत्री ननकीराम कंवर ने सीएम को लिखे पत्र में यह शिकायत की थी कि कर्मचारी राज्य बीमा सेवाएं द्वारा राज्य के कर्मचारियों और पंजीकृत श्रमिकों के संचालित डिस्पेसरियों में वितरित की जाने वाली दवाओं की खरीद में श्रम सचिव और संचालक के संरक्षण में बड़े पैमाने पर कमीशनखोरी की जा रही है। इन डिस्पेंसरियों में वितरित करने के लिए 2024-25 और 2025-26 में जेनेरिक दवाओं की जगह पर ब्रांडेड दवाइयों की खरीदी कर व्यापक भ्रष्टाचार किया गया है। छग भंडार क्रय नियमों को ताक में रखकर 5 करोड़ की दवाइयों को 50 करोड़ में खरीदा गया। उल्लेखनीय है कि राज्य के श्रम विभाग के अधीन आने वाली संस्था कमर्चारी राज्य बीमा सेवाएं रायापुर के द्वारा पंजीकृत श्रमिकों के इलाज के लिए डिस्पेंसरियों में उपयोग के लिए प्रति वर्ष कर्मचारी राज्य बीमा सेवाएं रायपुर द्वारा दवाइयां उपलब्ध कराई जाती हैं। केन्द्र सरकार ने लोगों को सस्ती दवा उपलब्ध कराने के लिए अस्पतालों में ब्रांडेड दवाओं के वितरण और डाक्टरों के ब्रांडेड दवा लिखने पर प्रतिबंध लगाया है। इतना ही नहीं सस्ती दवाओं के लिए जन औषधि केन्द्र खोले गए हैं. इसके बावजूद कमर्चारी राज्य बीमा सेवाएं के अधिकारी कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार के लिए ब्रांडेड दवाइयां खरीद रहे हैं। पूर्व मंत्री ने संस्था के भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी में लिप्त अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की थी।

संचालक ने औषधालयों से दवाओं की जानकारी मांगी

मंत्री के निर्देश के बाद संचालक ने बीमा चिकित्सा पदाधिकारियों से औषधालय में 2025-26 में प्राप्त किए गए औषधियों की गूगल सीट में जानकारी मांगी गई है साथ ही औषधि निर्माता संस्थानों द्वारा औषधालयों को भेजी गई दवा नहीं लेने भी निर्देशित किया है।

जिन पर कमीशन खोरी का आरोप उन्हीं से जांच पर सवाल

मंत्री ने दवा की खरीदी पर रोक लगाने का निर्देश अपने पत्र में संचालक को दिया है लेकिन इस पूरे मामले में कमीशन खोरी का आरोप राज्य कर्मचारी बीमा सेवाएं के संचालक समेत खरीदी प्रक्रिया में शामिल अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी है ऐसे में उन्हीं अधिकारियों से अनियमितता की जांच करवाऩा तर्कसंगत नहीं होगा। जबकि मुख्य सचिव को इस पूरे मामले की किसी अन्य अवर सचिव स्तर के अधिकारी से पूरे कमीशनखोरी की जांच करानी चाहिए, जिससे जांच पर सवाल न उठे।

2024-25 के दवा खरीद में हुई कमीशनखोरी का क्या..

शिकायतों के अनुसार राज्य कर्मचारी बीमा सेवाएं रायपुर के द्वारा वर्ष 2024-25 में कई ब्रांडेड कंपनियों से उन दवाइयों की खरीदी की गई है जो दवाइयां बाजार में नहीं चलती हैं और कंपनियों के पास निर्माण होकर एक्सापायरी हो जाती हैं। उन्हें बेचने के लिए कंपनियों के द्वारा 50 से 60 फीसदी कमीशन दिए जाते हैं। इसी कमीशनखोरी के लिए कर्मचारी-अधिकारी दवा कंपनियों से सांठगांठ कर ब्रांडेड दवाइयों की खरीदी की गई है। इस पर जांच के कोई दिशा-निर्देश नही दिए गए हैं। जबकि दवा खरीदी में कमीशन खोरी का यह खेल सालों से चल रहा है।

सीजीएमएससी के माध्यम से हो दवा खरीदी

सरकारी अस्पतालों में दवा उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार की अपनी एक संस्था है। सीजीएमएससी के माध्यम से दवाओं की खरीदी कर सभी सरकारी अस्पतालों में दवा उपलब्ध कराई जाती है। राज्य कर्मचारी बीमा सेवाएं को भी सीजीएमएससी के माध्यम से दवा खरीदी कर बीमा सेवाएं द्वारा संचालित औषधालयों में दवा उपलब्ध कराई जानी चाहिए, साथ ही केन्द्र व राज्य सरकार ने सभी सरकारी अस्पतालों में जेनेरिक दवा ही मरीजों को उपलब्ध कराने तथा डाक्टरों को भी जेनेरिक दवा ही लिखने को निर्देशित किया गया है बावजूद ब्रांडेड दवा ही खरीदी जा रही है जिस पर भी सवाल उठता है, ऐसे में इस पूरी खरीदी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।

राज्य भंडार क्रय नियमों का उल्लंघन

पूर्व मंत्री ने पत्र में बताया था कि छग भंडार क्रय नियमों में यह प्रावधान किया गया है कि राज्य शासन के विभागों को उच्च गुणवत्ता वाली सामाग्री उचित दरों पर निश्चित समायावधि में प्राप्त् हो सके, राज्य शासन को न्यूनतम दरों पर सामाग्री की आपूर्ति सुनिश्चित हो सके, स्थानीय लघु उद्योगों को प्रोत्साहन मिले तथा यदि किन्ही सामाग्रियों का उत्पदान राज्य के अनुसूचित जाति, जनजाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के उद्यमियों द्वारा किया जाता है तो मूल्य एवं गुणवत्ता सामान होने की दशा में सामग्रियां क्रय करने में ऐसे उद्योंगों को प्राथमिकता मिले।

भंडार क्रय नियम शासकिय विभागों द्वारा क्रय की जाने वाली वस्तुओं पर लागू होते हैं इसके उप नियम-2.1 समस्त शासकीय विभागों के अतिरिक्त छग राज्य विद्युत मंडल, प्रदेश के समस्त सार्वजनिक उपक्रम, मंडस, जिला पंचायत, जनपद पंचायत एवं नगरीय निकाय भी भंडार क्रय नियमों की परिधि में रहेंगे। इसी प्रकार विस्तृत रुप से छग शासन भंडार क्रय नियम 2002 में शासन को उपयोग होने वाली सामग्रियों को क्रय करने के लिए भी विस्तृत नियमावली उल्लेखित है जिसका पूर्ण रूपर से अवहेलना करते हुए कर्मचारी राज्य बीमा सेवाए रायपुर के द्वारा विगत कई वर्षों से जेनरिक दवाई न खरीदकर ब्रांडेड दवाइयां अधिक दर पर खरीदी जा रही हैं। उदाहरण के तौर पर जो ब्रांडेड दवाइयां इनके द्वारा 50 करोड़ में खरीदी जा रही हैं व दवाइयां जेनरिक में मात्र 5 करोड़ की है। इससे स्पष्ट है कि उपरोक्त खरीदी में कर्मचारी-अधिकारी एवं दवा कंपनियां मिलकर बड़ा भ्रष्टाचार करते हुए कमीशनखोरी कर रहे हैं।

दवा कंपनियों से सांठगांठ

कर्मचारी राज्य बीमा सेवाएं रायपुर के द्वारा वर्ष 2024-25 में कई ब्रांडेड कंपनियों से उन दवाइयों की खरीदी की गई है जो दवाइयां बाजार में नहीं चलती हैं और कंपनियों के पास निर्माण होकर एक्सापायरी हो जाती हैं। उन्हें बेचने के लिए कंपनियों के द्वारा 50 से 60 फीसदी कमीशन दिए जाते हैं। इसी कमीशनखोरी के लिए कर्मचारी-अधिकारी दवा कंपनियों से सांठगांठ कर ब्रांडेड दवाइयों की खरीदी की गई है। वर्तमान में वर्ष 2025-26 में भी इसी कमीशनखोरी के लिए कर्मचारी राज्य बीमा सेवाएं के अधिकारियों द्वारा पचास से ज्यादा ब्रांडेड कंपनियों से ब्राडेड दवाइयां खरीदने की तैयारी की जा चुकी हैं।

50 करोड़ से ज्यादा का भ्रष्टाचार

छत्तीसगढ़ सरकार के श्रम विभाग के अंतर्गत कर्मचारी राज्य बीमा सेवाएं रायपुर के द्वारा प्रतिवर्ष पचास सौ करोड़ से ज्यादा की ब्रांडेड द्वाइयां खरीदी जाती हैं, जिसमें 50 करोड़ से ज्यादा का भ्रष्टाचार हो रहा है। संस्थान में पंजीकृत श्रमिकों एवं उनके परिवार वालों का कर्मचारी राज्य बीमा सेवाएं रायपुर के अस्पताल एव डिस्पेसरियों के द्वारा मुफ्त इलाज व दवाइयां दी जाती है, इसके लिए कर्मचारी राज्य बीमा सेवाए रायपुर के द्वारा दवाइयों की खरीदी की जाती है। पिछले कई वर्षों से श्रम विभाग एवं कर्मचारी राज्य बीमा सेवाएं रायपुर के अधिकारी कर्मचारी व दवा निर्माता मिलकर ब्रांडेड दवाइयों की खरीदी कर 50 करोड़ से अधिक का प्रतिवर्ष भ्रष्टाचार कर रहे हैं।

डाक्टरों के ब्रांडेड दवाएं लिखने पर प्रतिबंध

केन्द्र एवं राज्य सरकार के द्वारा सरकारी व निजी डाक्टरों के ब्रांडेड दवाइयों के लिखने एवं खरीदने पर प्रतिबंध लगाया गया है उसके बाद भी कर्मचारी राज्य बीमा सेवाए रायपुर के द्वारा केन्द्र व राज्य के आदेशों की अवहेलना करते हुए कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार करने के लिए बांडेड दवा खरीद कर आपूर्ति की जा रही है। यह पूरा खेल सिर्फ कमीशनखोरी के लिए हो रहा है।

पूरे प्रदेश में 40 से ज्यादा अस्पताल व डिस्पेंसरियां

कर्मचारी राज्य बीमा सेवाएं रायपुर के अंतर्गत करीब 40 डिस्पेंसरियां पूरे प्रदेश में हैं जिनका काम पंजीकृत श्रमिकों एवं उनके परिवार वालों को मुफ्त स्वास्थ्य सुविधाएं एवं दवाइयां उपलब्ध कराना है इस सुविधा के लिए ब्रांडेड दवाइयां खरीदी प्रतिवर्ष लगभग पचास सौ करोड़ से ज्यादा की खरीदी जाती हैं। जो जेनेरिक दवाइयों से 60 से 70 प्रतिशत ज्यादा महंगी होती हैं। जबकि छत्तीसगढ़ सरकार में पदस्थ डाक्टरों को ब्रांडेड दवाइयां लिखने पर रोक लगा दी गई है। उसके बाद भी कर्मचारी राज्य बीमा सेवाए रायपुर के द्वारा ब्रांडेड दवाइयां खरीदकर प्रतिवर्ष 50 करोड़ से अधिक का भ्रष्टाचार किया जा रहा है। डाक्टर भी रोक के बावजूद ब्रांडेड दवा ही प्रिसक्राइव कर रहे हैं। कर्माचारी राज्य बीमा सेवाएं के अधिकारी-कर्मचारी दवा निर्माता कंपनियों से सांठगांठ कर सरकार को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। जबकि प्रदेश में दवा खरीदी करने के लिए राज्य सरकारी की संस्था सीजीएमसससी है जो कि जेनेरिक दवाओं का ही टेंडर कर सरकार की संस्थाओं को सप्लाई करती है बावजूद ईएसआईसी के अधिकारी कमीशनखोरी के लिए इस संस्था के माध्यम से दवा खरीदने की जगह सीधे दवा कंपनियों से दवाइयां खरीद रहे हैं।

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