छत्तीसगढ़

झीरम घाटी हमला: NIA कोर्ट का फैसला, 10 दोषियों को मृत्युदंड

Shantanu Roy
16 Sept 2026 4:45 PM IST
झीरम घाटी हमला: NIA कोर्ट का फैसला, 10 दोषियों को मृत्युदंड
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छग
Jagdalpur. जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमला मामले में जगदलपुर स्थित NIA की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने मामले में दोषी पाए गए 10 आरोपियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। हालांकि, यह सजा तब तक लागू नहीं होगी, जब तक छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा इसकी पुष्टि नहीं की जाती। यह फैसला 25 मई 2013 को हुए उस हमले के मामले में आया है, जिसमें कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले को निशाना बनाया गया था। इस हमले में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, बस्तर टाइगर के नाम से चर्चित महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल समेत 29 लोगों की मौत हुई थी।NIA की विशेष अदालत में इस मामले में कुल 11 आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई चल रही थी। इनमें से एक आरोपी की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है। अदालत ने बचे हुए 10 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।
दोषी ठहराए गए आरोपियों में शामिल हैं—
प्रमिला मोडियम
चैतू लेकाम उर्फ मुन्ना
सुमित्रा उर्फ सुमित्रा पुनेम मोडियम
मुक्का मांडवी
कोसा कवासी उर्फ कोसाराम
आयता मरकाम
मदकामी देवा
जोगा मदकामी
बनजामी सन्ना उर्फ चमरू उर्फ डेंगा
महादेव नाग
25 मई 2013 को हुआ था हमला
झीरम घाटी हमला वर्ष 2013 में छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव से पहले हुआ था। उस समय कांग्रेस पार्टी प्रदेश में परिवर्तन यात्रा निकाल रही थी। 25 मई 2013 को सुकमा में आयोजित कार्यक्रम के बाद कांग्रेस नेताओं का काफिला जगदलपुर की ओर लौट रहा था। काफिले में बड़ी संख्या में नेता और कार्यकर्ता शामिल थे। झीरम घाटी पहुंचने के दौरान नक्सलियों ने रास्ता रोककर हमला कर दिया था।
हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं समेत बड़ी संख्या में लोग मारे गए थे। यह घटना छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और सुरक्षा इतिहास की सबसे चर्चित घटनाओं में शामिल रही है। हमले के दौरान नक्सलियों ने कांग्रेस नेताओं को निशाना बनाया था। तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश पटेल की मौत हुई थी। वहीं सलवा जुडूम आंदोलन के संस्थापक माने जाने वाले महेंद्र कर्मा की भी हत्या कर दी गई थी। पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल भी इस हमले में गंभीर रूप से घायल हुए थे और बाद में उनका निधन हो गया था।
लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया
झीरम घाटी मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने की थी। मामले की सुनवाई के दौरान कई गवाहों के बयान दर्ज किए गए और विभिन्न साक्ष्यों को अदालत के सामने रखा गया।करीब 13 साल बाद अदालत का फैसला आया है। दोषियों को सजा सुनाए जाने के बाद अब आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत मृत्युदंड की पुष्टि हाईकोर्ट से होनी होगी।
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