छत्तीसगढ़

चैन खो जाने का इंतजार जरूरी तो नहीं, ये तमाशा सरेआम जरुरी तो नहीं

Nilmani Pal
26 Sept 2025 12:28 PM IST
चैन खो जाने का इंतजार जरूरी तो नहीं, ये तमाशा सरेआम जरुरी तो नहीं
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ज़ाकिर घुरसेना/कैलाश यादव

मुसीबत नाम ही है पीछा नहीं छोड़ने की। लगता है हर इंसान के साथ मुसीबत का चोली दामन का सम्बन्ध हो गया है, ये बात अलग है कि कुछ मुसीबत को खुद लाते हैं कुछ मजबूरी में मुसीबत को गले लगा लेते हैं। बड़े अधिकारी अपने मातहत को नौकरी का धमकी देकर मुसीबत में डाल देते हैं तो बड़े अंजाम से अनजान होकर मुसीबत से दोस्ती कर लेते हैं बाद में पछताते हैं। ऐसा ही मामला एक हजार करोड़ के घोटाले का है। जनता में खुसुर फुसुर है कि इस घोटाले में शामिल सभी अधिकारी रिटायर होकर घर बैठ गए हैं, नौकरी में रहते ही क्यों जाँच नहीं हुआ इनके खिलाफ। अब क्या फायदा जब ये पद में हैं ही नहीं, खैर देर आए दुरुस्त आए के तर्ज पर कार्रवाई तो हो रही है अब जनता यह जानने के उत्सुक है कि और कौन कौन शामिल थे इस घोटाले में। घोटाला करने वाले अधिकारी सोच रहे होंगे कि रिटायरमेंट के बाद चैन की बंशी बजाते हुए जीवन गुजरेंगे लेकिन भला हो आरटीआई एक्टिविस्ट का जिसने चैन की बंशी की जगह धुमाल और डीजे बजवा दिया।

जहां चाह वहां राह

जुगाड़ टेक्नालाजी ऐसा टेक्नालाजी है जिससे बड़े बड़े काम आसान हो जाते हैं बशर्ते अच्छे काम हो तो ठीक है वर्ना अपने फायदे के लिए तो दोनों पार्टी उतावले रहते ही हैं। दरअसल अभी हाल में ही तीन नए मंत्री बनने के बाद उनके बैनर पोस्टर और फ्लेक्स से उनका शहर अटा पड़ा था , ऐसा मंजर देखकर उनको भी लगा कि क्या से क्या हो गया , जनता में खुसुर फुसुर है कि इसे ही जुगाड़ टेक्नालाजी बोला गया है अभी से ठेकेदार और दूसरे धंधे वाले अभी से जुगाड़ में लग गए हैं देखते हैं आगे होता है क्या ?

जीएसटी से किसको फायदा

अभी हाल में प्रधानमंत्री जी ने जीएसटी में कुछ कमी किया है जिसका फायदा आम जनता और व्यापारियों को भी मिलेगा ऐसा शासन का कहना है। प्रदेश में सरकार खुद चेक करने बाजारों में पहुंच रही है की जनता को फायदा मिल रहा है की नहीं, सही बात भी है जनता को फायदा तो जनता भी फायदा देगी , दूसरी तरफ कांग्रेसी भी बाजारों में निकल पड़े हैं कि जीएसटी कम होने से क्या फर्क पड़ा है , अब देखना होगा कि क्या जनता वाकई खुश है या और कुछ बात है।

युक्तियुक्तकरण के तर्ज पर उच्च शिक्षा विभाग में सर्जरी

युक्तियुक्तकरण के तर्ज पर उच्च शिक्षा विभाग में सर्जरी होने वाला है। उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि शिक्षक-छात्र अनुपात में सर्जरी की जाएगी। कहीं शिक्षक ज्यादा हैं, कहीं शिक्षक कम हैं। ऐसे में विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इसलिए यह कदम उठाना जरूरी है। बाकी खाली पदों में भर्ती की जाएगी। अभी 700 पदों में भर्ती के लिए स्वीकृति मिल चुकी है। जनता में खुसुर-फुसुर है कि युक्तियुक्तकरण का हाल स्कूल शिक्षा विभाग झेल चुका है। जो सोर्स वाले है और मंत्रियों के समर्थकों के खास है उनको युक्तियुक्तकरण का फार्मूला प्रभावित नहीं कर सका। अब मंत्री जी कितना युक्तियुक्तकरण कर पाते है यह तो सिस्टम में काम करने वाले ही हालात बयां कर सकते है। कालेजों में व्याख्याता कुलपति की तरह काम करते है। उनको कौन बोलेगा कि फलां कालेज में छात्रों के अनुपात में व्याख्याताओं की संख्या कम है, कम से कम अपनी नैतिक जिम्मेदारी समझ कर जहां प्रोफेसर कम है वहां पढ़ाने के लिए सहमति पत्र देकर सरकार के युक्तियुक्तकरण को सफल बनाने में योगदान देने आगे आए तो कालेजों की शिक्षा व्यवस्था पटरी पर आ सकती है नहीं तो युक्तियुक्तकरण भी राजनीतिक महत्वाकांक्षा का शिकार हो सकता है।

स्कूल है या जेल

रायपुर के सुंदर नगर स्थित कृष्णा किड्स एकेडमी अपने अजीबो-गरीब कारनामों से हमेशा सुर्खियों रहता ही है कभी फीस को लेकर तो कभी बच्चों को प्रताड़ना को लेकर कोई न कोई कारनामा कर देता है कि उसकी किरकिरी होने से बच नहीं सका है। एक हैरतअंगेज मामला सामने आया है जिससे स्कूल की अनुशासन तार-तार हो गई है। यहां की एक महिला टीचर पर 6 साल की बच्ची को अगरबत्ती से जलाने का गंभीर आरोप लगा है। परिजनों की शिकायत के बाद स्कूल प्रबंधन ने तत्काल प्रभाव से आरोपी टीचर को नौकरी से निकाल दिया है। लेकिन परिजनों की मांग है कि आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। वहीं इस मामले के शिकायत मिलने के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी स्कूल पहुंचकर मामले की जांच कर रहे है। जनता में खुसुर-फुसुर है कि पहले तो स्कूल प्रबंधन से पूछा जाए कि क्या बच्चों को पढ़ाने के नाम पर क्या करना बाकी है। स्कूलों में अभिभावक बच्चों को बड़ी उम्मीद से इसलिए भेजते है ताकि बच्चा पढ़ लिखकर अच्छा इंसान बने, क्योंकि शिक्षक को देश का भविष्य विधाता कहा जाता है। यहां तो सारी मानवीय हदें पार कर बच्चों को जेल से भी बदतर व्यवहार कर अगरबत्ती से जलाकर क्या बनाना चाहते है ये तो वहीं जाने।

एजेंडा के रूप में स्वीकार तो नहीं किया जा रहा

पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कोरबा कलेक्टर अजीत बसंत को हटाने की मांग पर सीएम विष्णुदेव साय ने कहा है कि पूर्व गृहमंत्री की शिकायत की जांच होगी। इसके बाद निर्णय लिया जाएगा। सीएम साय ने मीडिया से चर्चा में कहा कि पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं। उनके पत्र पर जांच करा रहे हैं। ननकीराम कंवर ने आरोप लगाया था कि कलेक्टर हिटलर प्रशासक की तरह काम कर रहे हैं और उनके खिलाफ सैकड़ों भ्रष्टाचार के मामले हैं। उन्होंने कलेक्टर को तीन दिन के भीतर नहीं हटाने पर शासन-प्रशासन के खिलाफ धरने पर बैठने की चेतावनी भी दी थी। जनता में खुसुर-फुसुर है कि भाजपा को कांग्रेस की नजर लग गई है। भाजपा वाले कांग्रेस पर अंतरकलह का आरोप लगाते रहे, लेकिन अब वरिष्ठ भाजपा नेता की पीड़ा को सिर्फ जांच के नाम पर मामले को लटकाय़ा जा रहा है। एैसा तो कांग्रेस शासनकाल में होता था, अंतरकलह को अब पार्टी का एजेंडा के रूप में स्वीकार तो नहीं किया जा रहा है।

शराब में नशा पैमाना नाचने वाले करेंगे ..

छत्तीसगढ़ शराब घोटाले मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए ईओडब्ल्यू ने चैतन्य बघेल को 13 दिन की पुलिस रिमांड पर अपने हवाले कर लिया है। चैतन्य बघेल अब 6 अक्टूबर तक ईओडब्ल्यू रिमांड पर रहेंगे, इस दौरान जांच टीम उनसे कड़ी पूछताछ करेगी। इससे पहले कस्टम मिलिंग घोटाले में गिरफ्तार दीपेन चावड़ा को भी 29 सितंबर तक पुलिस रिमांड पर सौंपा गया है।जनता में खुसुर-फुसुर है कि नशा शराब में होती तो नाचती बोलत अब पुरानी हो गई है अब तो शराब में घोटाला करने वाले लोग भी ईओडब्ल्यू और ईडी के इशारे पर नाचने लगे है। यही तो नशा का नय़ा स्वरूप है. बिना पिए नशा होना जाना शराब नाम की तासीर है।

वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में घोटाला

पिछले दिनों वन विभाग में चालक भर्ती का विज्ञापन निकाला गया था जिसमें प्रदेश के बेरोजगारों ने अप्लाई किया था लेकिन उन्हें क्या मालूम कि किसे रखना है ये तो पहले से तय हो चुका है।जिसमें वन विभाग के अधिकारी द्वारा अपने चहेते को लगभग फाइनल कर लिया गया है ऐसा आरोप दूसरे अभ्यर्थी लगा रहे हैं। इस संबंध में लगातार शिकायत करने के बाद भी कोई कार्रवाई रायपुर डिवीजन द्वारा नहीं किया गया। इस मामले की शिकायत सीएमओ आफिस तक होने के बाद भी कोई संज्ञान नहीं लिया गया। इससे साफ जाहिर होता है कि विभाग बैठे बड़े अधिकारी अपनी मनमानी से विभाग का संचालन कर अपने चहेतों को उपकृत करना चाहते है। जबकि योग्यता के मामले में अन्य योग्य़ अभ्यर्थी है उनका हक मार कर परदेशियों, बाहरी, आपराधिक मामले के आरोपी, और फर्जी प्रमाणपत्र धारकों को प्रश्रय दे रहे है। प्रधान वन संरक्षक कार्यालय हमेशा अपने अजीबो-गरीब कारनामें से सुर्खियों में रहा है। अब वाहन चालक जैसे चतुर्थ श्रेणी पद पर भी अतिक्रमण कर अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने के खेल खेल रहे है। जबकि उसके खिलाफ फर्जी प्रमाण पत्र होने का पुख्ता सबूत शिकायत कर्ता के पास उपलब्ध है। जनता में खुसुरफुसुर है कि ये परिवर्तन विभाग है भाई जलवायु परिवर्तन हो न हो ईमान परिवर्तन जरूर हो जाता है।

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