
इस तरह की चर्चा जोरों पर...
भ्रष्टचार की जांच करने से भाजपा सरकार व नगर निगम को आखिर कौन रोक रहा...
चर्चा जवाहर बाजार में जोरों से है कि पूर्व महापौर ने लेआउट के विपरीत दुकानों का अतिरिक्त निर्माण किया और सामने की कई दुकाने अपने परिवार वालों के नाम पर अलाट करवाया
दुकानों को किराये पर देकर तगड़ा किराया वसूल रहे
वास्तविक दुकानदारों को पीछे का दुकान दिया गया
जिसने इसका विरोध किया उन व्यापारियों को डराया धमकाया गया
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में राजधानी में निर्मित बस स्टाप, शौचालय निर्माण में हुई भारी गड़बड़ी व भ्रष्टाचार की भी जनता ने की जांच की मांग।
नगर निगम और राज्य शासन पूर्व कांग्रेसी महापौर के शासन काल में हुए भ्रष्टाचार की सुगमता से जांच करने पर ही पता चलेगा कि पूर्व महापौर ने कितना और कैसे भ्रष्टाचार किया
इसी तरह की शिकायतें 2023 के उपरांत लगातार अब तक सामाजिक कार्यकर्ता और संगठन विभिन्न स्तरों में आवेदन देकर शिकायत कर चुके हैं
राजधानी में एक मात्र फायर स्टेशन को भी विलोपित करने का आरोप, 24 घंटे आगजनी से जनता के बचाव हेतु फायर गाडिय़ां (ब्रिगेड) खड़े रखने के स्थान को भी नहीं बख्शा
माल में लगाए जाने वाले एसक्लीलेटर को निरस्त कर दुकान बना दी गई। अत्याधुनिक सुविधान नहीं होने के कारण उपरी मंजिलों में कारोबार ठप
रायपुर (जसेरि)। कांग्रेस के पूर्व महापौर ने अपने पद प्रतिष्ठा का दुरुपयोग करते हुए जवाहर बाजार मार्केट में लेआउट के विपरीत जाकर दुकानों का निर्माण कराया है जबकि जवाहर बाज़ार शासन की महत्वाकांक्षी योजना थी रायपुर शहर की सबसे महत्वपूर्ण मालवीय रोड स्थित जवाहर बाज़ार जो पुराना सब्ज़ी बाज़ार व फ्रूट बाज़ार के रूप में प्रख्यात है उसको तोडक़र नया जवाहर बाज़ार बनाने की महत्वाकांक्षी योजना रायपुर शहर के लिए महत्वपूर्ण योजनाओं में से एक थी दुकानों को मनमाने ढंग से भी अपने रिश्तेदारों और दोस्तों को दिए जाने की शिकायत राज्य शासन से की गई थी लेकिन तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने शिकायतों को कचरे के ढेर में डाल दिया।
लेआउट भी बदला गया/नियम विपरीत निर्माण किया
लेआउट बदलने के आधिकार सिर्फ राज्य शासन को ही है वह भी डाउन एण्ड कंट्री प्लानिंग के नक्से के अनुसार प्लानिंग मार्केट की समूचित पार्किंग और आने जाने के लिए मार्ग, सिढ़ी, लिफ्ट एसक्लीलेटर को बिना नुकसान पहुंचाए तभी संभव हो सकता है। लेकिन जवाहर बाजार के प्रकरण में सभी नियम को ताक में रखते हुए निमय विपरीत अवैध दुकानों का निर्माण किया गया।
मालवीय रोड स्थित जवाहर बाज़ार का लेआउट किसके इंतज़ार में बदला गया लेआउट बदलने के लिए टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से उन प्रस्ताव राज्य शासन हो जाता है लेकिन जवाहर बाज़ार के लिए और बदले में ऐसा नहीं हुआ जहाँ पब्लिक के लिए एक्सेलेटर लगना था वहां पर तीन दुकान अतिरिक्त निर्माण किया गया फिर वही तीन दुकान को अपने रिश्तेदार के नाम पर आबंटित कर दिया गया है भ्रष्टाचार का इससे बड़ा उदाहरण कहीं और हो नहीं सकता। जीता जागता पुख्ता प्रमाण के तौर पर दुकान आज दिख रही है।
भाजपा सरकार से उम्मीद
भाजपा सरकार आने के उपरांत आम जनता ने यह सोचा था न के पूर्व कांग्रेसी महापौर के भ्रष्टाचार के काले कारनामे उजागर होंगे और और पूर्व महापौर के रिश्तेदार की दुकानों को निरस्त किया जाएगा और उच्च स्तरीय जाँच कराकर शासन और नगर निगम अलग अलग तरह की जाँच कर पूर्व की महापौर या जो भी अधिकारी उक्त भ्रष्टाचार में लिप्त होगा को जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाए लेकिन दो साल होने को है पूर्व महापौर के खिलाफ़ किसी भी प्रकार की जाँच नगर निगम या राज्य सरकार ने संज्ञान लेकर अभी तक शुरू नहीं की जो एक चर्चा का विषय है। नगर निगम में भ्रष्टाचार के लिए बदनाम पूर्व कांग्रेस के महापौर के कारण कांग्रेस पार्टी रायपुर की चारों सीटों के अलावा पूरे प्रदेश में तो बदनामी के कारण हार का सामना करना पड़ा।
दूसरा भ्रष्टाचार का प्रकरण फायर स्टेशन गायब
उसी प्रकार पूर्व महापौर ने रायपुर शहर के फ़ायर स्टेशन जो फ़ायर ब्रिगेड चौक परस्थिति को तोडक़र नया निर्माण अपने कार्यकाल में कराया वो भी नियम विपरीत लिए ले आउट को बदला गया और जहाँ पर शहर के लिए आगजनी से बचाव के लिए आम जनता सुविधा हेतु फ़ायर ब्रिगेड का अमला और फ़ायर ब्रिगेड की गाडिय़ां हमेशा 24 घंटे तैनात रहती है शहर की जनता के लिए सुरक्षा के लिए अति आवश्यक सेवा में से एक है जो होना अनिवार्य था लेकिन भ्रष्टाचार के चरम सीमा को पार करते हुए पूर्व महापौर ने फ़ायर स्टेशन को वहाँ से जिस पर गाड़ी रखने की जगह हेतु लेआउट में सुरक्षित रखा गया था उसको बदल कर वहां पर अपने रिश्तेदार के लिए जगह बना ली है और कैफे और जिम खोला गया जिसमें बड़े बड़े नेताओं ने उद्घाटन के समय शिरकत की लेकिन किसी ने यही सोचा यह शहर की सुरक्षा के साथ कितना बड़ा खिलवाड़ और अन्याय किया गया भाजपा सरकार से जनता यह उम्मीद करती थी नगर पालिक निगम राज्य सरकार और केंद्र सरकार जब तीनों जगह भाजपा की सरकार है अब क्या तक़लीफ़ है क्यों जाँच नहीं की जा रही है, अवैध रूप से निर्माण को बेदख़ल क्यों नहीं किया जा रहा है कौन रोक रहा है बेदख़ल करने से ये सवाल शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है ये नियम विपरीत फ़ायर स्टेशन को विलोपित कर जिम बनाना ग़ैरक़ानूनी ढंग से निर्माण कर अपने रिश्तेदार को आबंटित करना जैसे यह अपराध भ्रष्टाचार की चरम सीमा को पार करते हैं।





