छत्तीसगढ़
फर्जी डिग्री और नौकरी के मामले में अंतरराज्यीय गिरोह का खुलासा, मुख्य आरोपी गिरफ्तार
Shantanu Roy
8 April 2026 6:19 PM IST

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Raipur. रायपुर। कमिश्नरेट पुलिस ने पोस्ट ऑफिस में नौकरी लगाने और फर्जी मेडिकल डिग्री बनाने के नाम पर अंतरराज्यीय धोखाधड़ी करने वाले गिरोह का खुलासा किया है। अब तक इस मामले में कुल 06 आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। पुलिस ने बताया कि मुख्य आरोपी सुनील प्रताप, निवासी नई दिल्ली, को गिरफ्तार किया गया है। उसके कब्जे से 01 मोबाइल फोन और फर्जी दस्तावेज जब्त किए गए हैं। मामले की शुरुआत दिनांक 17 फरवरी 2026 को प्रार्थी संजय निराला द्वारा रिपोर्ट दर्ज कराने से हुई थी। रिपोर्ट में आरोप था कि भुनेश्वर बंजारे, नरेश मनहर, हीरा दिवाकर, राकेश रात्रे और अन्य लोगों ने प्रार्थी और उसके रिश्तेदारों को पोस्ट ऑफिस के विभिन्न पदों में नौकरी लगाने और फर्जी सर्टिफिकेट बनाने का झांसा देकर कुल 2 करोड़ 34 लाख रुपये की धोखाधड़ी की।
प्रकरण में थाना सिविल लाइन में अपराध क्रमांक 96/2026 दर्ज किया गया था। इसमें धारा 318(4), 335, 336(2), 338(3), 340(1), 340(2), 3(5), 111 बी.एन.एस. के तहत कार्यवाही की गई। प्रारंभिक जांच और गिरफ्तारी के बाद पहले चार आरोपी भुनेश्वर बंजारे, नरेश मनहर, हीरा दिवाकर, राकेश रात्रे के साथ-साथ साक्षी सिंह और अंकित तिवारी को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने बताया कि साक्षी सिंह से पूछताछ के दौरान अन्य संलिप्त आरोपियों के संबंध का पता चला। दिल्ली में छापेमारी के दौरान साक्षी सिंह को पकड़कर पूछताछ की गई, जिसमें उसने सुनील प्रताप के साथ मिलकर डी. वाई. पाटिल विद्यापीठ, पुणे की फर्जी एमबीबीएस और बीएएमएस डिग्री बनाने की जानकारी दी।
इसके बाद पुलिस ने सुनील प्रताप को 7 अप्रैल 2026 को गिरफ्तार किया। उसके कब्जे से घटना में प्रयुक्त मोबाइल फोन और फर्जी दस्तावेज जब्त किए गए। पूछताछ में पता चला कि गिरोह ने विभिन्न राज्यों से लगभग 30 लोगों के लिए फर्जी मेडिकल डिग्री बनाई। मुख्य आरोपी सुनील प्रताप, पिता स्व. सुभाष चंद्र, उम्र 40 वर्ष, निवासी RZ G-352, पालम कालोनी, द्वारका, थाना पालम साउथ वेस्ट, नई दिल्ली है। पुलिस ने बताया कि मामले की जांच अभी भी जारी है और अन्य संलिप्त आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं। पुलिस ने कहा कि इस गिरोह ने नौकरी और मेडिकल डिग्री के नाम पर लोगों को आर्थिक रूप से ठगा और उनके भरोसे का फायदा उठाया। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में यह भी सामने आया कि फर्जी डिग्री बनाने की पूरी योजना सुनील प्रताप द्वारा बनाई गई थी।
पुलिस ने बताया कि इस मामले में अब तक की गई गिरफ्तारी और जब्ती से लोगों के बीच जागरूकता बढ़ेगी और भविष्य में ऐसी धोखाधड़ी रोकने में मदद मिलेगी। अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि किसी भी अनधिकृत संस्था या व्यक्ति द्वारा नौकरी या डिग्री के नाम पर धोखाधड़ी की जानकारी मिलने पर तुरंत पुलिस को सूचित करें। उन्होंने कहा कि इस मामले में सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और जांच के दौरान नए तथ्य सामने आने पर अन्य राज्यों में भी आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इस प्रकार, रायपुर पुलिस की तत्परता और समन्वित प्रयास से अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश हुआ है, जिसने लोगों को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुँचाया। अब तक गिरफ्तार आरोपी और उनके कब्जे से जब्त दस्तावेज इस फर्जीवाड़े की गहराई को उजागर कर रहे हैं। पुलिस का मानना है कि मामले में और भी आरोपियों की पहचान की जाएगी और उन्हें कानून के कटघरे में लाया जाएगा।
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