छत्तीसगढ़

जोरा दि माल में पार्किंग रसीद के नाम पर अवैध वसूली जारी

Shantanu Roy
24 May 2026 10:18 PM IST
जोरा दि माल में पार्किंग रसीद के नाम पर अवैध वसूली जारी
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हाईकोर्ट आदेश की अनदेखी
Raipur. रायपुर। राजधानी रायपुर के जोरा दि माल में बिलासपुर हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद पार्किंग शुल्क वसूली को लेकर गंभीर अनियमितता सामने आई है। आरोप है कि हाईकोर्ट के निर्णय के बाद भी यहां पार्किंग की रसीद देकर सरेआम अवैध वसूली की जा रही है, जिससे आम नागरिकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। जानकारी के अनुसार, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में आने वाले ग्राहकों से पार्किंग के नाम पर निर्धारित शुल्क से अधिक राशि वसूले जाने की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। कई लोगों का कहना है कि उनसे बिना स्पष्ट नियम बताए पार्किंग शुल्क लिया जाता है और बदले में केवल रसीद थमा दी जाती है।

इस मामले में पार्किंग में काम करने वाले कर्मचारियों ने भी खुलकर अपनी परेशानी बताई है। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें रोजाना लोगों की शिकायतें सुननी पड़ती हैं, लेकिन मैनेजमेंट इस पूरे मामले पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। कर्मचारियों के अनुसार, जब ग्राहक सवाल उठाते हैं तो स्थिति विवाद की बन जाती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद पार्किंग व्यवस्था में पारदर्शिता नहीं है और नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है।



कई बार शिकायत करने के बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। लोगों का कहना है कि पार्किंग के नाम पर मनमाने तरीके से पैसे वसूले जा रहे हैं, जिससे आम उपभोक्ता परेशान हैं। खासकर त्योहारों और भीड़भाड़ के समय स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है। इस पूरे मामले में प्रबंधन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। कर्मचारियों के बयान के अनुसार, उन्होंने कई बार इस समस्या की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि हाईकोर्ट के आदेश का सख्ती से पालन कराया जाए और पार्किंग व्यवस्था को पारदर्शी बनाया जाए। लोगों का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक स्थानों पर पार्किंग शुल्क को लेकर स्पष्ट नियम और निगरानी जरूरी है, ताकि उपभोक्ताओं का शोषण रोका जा सके। वहीं, नियमों की अनदेखी करने वालों पर सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है। फिलहाल इस मामले को लेकर लोगों में आक्रोश बना हुआ है और प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग तेज हो गई है।
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