सैंया भये कोतवाल तो डर काहे का, मै तो नाचूंगी दे-दे के ताल अब डर काहे का

ज़ाकिर घुरसेना/ कैलाश यादव
पिछले दिनों श्री रावतपुरा मोडिकल कालेज को मान्यता दिलाने के नाम पर 6 रिश्तखोरों को सीबीआई ने गिरफ्तार किया है। जनता के सोचने में एक बात सामने आ रही है कि क्या सभी मान्य़ता प्राप्त मेडिकल कालेज पैसे से खरीदे मान्यता वाले होते है। जो लाखों देकर करोड़ों अरबों की कमाई का जरिया बनता है। भारतीय छात्र नीट पास किए बिना यूक्रेन, रूस,ईरान सहित दूसरे देशों में मेडिकल की पढ़ाई के लिए जाते है और कम पैसे में एमबीबीएस की डिग्री लेकर आते हैं आखिर एैसा क्यों है। हालांकि पब्लिक इन सब बातों को समझती है शिकायत करने पर भी कोई कार्रवाई नहीं होती और शिकायत किससे करें? उनके लिए तो सैंया भये कोतवाल तो डर काहे का है। वो तो भला हो सीबीआई अफसरों का जिन्होंने इतने बड़े-बड़े लोगों के गिरेबान में हाथ डाला। अब इनको ये भी बोलना पड़ रहा है मै तो नाचूंगी दे-दे के ताल अब डर काहे का। इसी तरीके से नैक टीम भी रिश्वत लेते पकड़ाई थी। जिनका काम निजी और सरकारी विवि को ग्रेड देना होता है। वहां भी ग्रेड के मुताबिक बोली लगती है एप्लस है तो अलग रेट उससे नीचे है तो अलग रेट इसके मेंबर भी जिसमें बड़े-बड़े प्रोफेसर शिक्षाविद शामिल थे जिन्हें घूस लेने के आरोप में जेल भेजा गया था। जनता में खुसुर -फुसुर है कि जेल को सुधार गृह बोला जाता था, जो अब सार्थक होगा क्योंकि अभी तक जेल में गुंडे बदमाश जाते थे लेकिन अब डाक्टर , प्रोफेसर ,अधिकारी भी जेल की शोभा बढ़ा रहे हैं जो विभिन्न आरोपों में कैद बंदियों को शिक्षित करेंगे। उन्हें भी डाक्टर प्रोफेसर और अधिकारी बनाएंगे।
सट्टा के पैसे से शादी ईडी बने बाराती
सट्टा के पैसे से शादी करने की सूचना मिलते ही ईडी वाले बाराती बनकर पहुंच गए। मामला बिगड़ते देख बाराती भाग गए । दूल्हा भी दुल्हन को छोडक़र भाग निकला। महादेव ऑनलाइन सट्टा एप मामले में रायपुर की ईडी टीम ने बड़ी कार्रवाई की है. बुधवार को जयपुर के कूकस स्थित फाइव स्टार होटल फेयर माउंट में हुई एक भव्य शादी में ईडी ने छापेमारी की है. इस शादी में करीब 200 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे थे और दुबई से लेकर भिलाई-रायपुर तक के 250 से ज्यादा मेहमान पहुंचे थे। ईडी ने वहां अय्याशी कर रहे 3 मेहमानों को गिरफ्तार कर सब रंग में भंग कर दिया, और दूल्हे को फरार होना पड़ा। जनता में खुसुर-फुसुर है कि हराम के पैसे से शादी करोगे तो ईडी वाले बाराती तो बनेंगे ही। ईडी आजकल महादेवों की पूजा में पूरी तरह तल्लीन है। ताकि कोई महादेव ईडी को चकमा देकर मानसरोवर न निकल जाए। जयपुर में सौरभ अहूजा की शाही शादी थी. सौरभ और उसका साथी हनी अहूजा पहले भोपाल में मामूली हालात में रहते थे. लेकिन महादेव सट्टा नेटवर्क से जुडऩे के बाद दोनों ने दुबई में कारोबार संभालना शुरू किया. किराए के मकान में रहने वाला सौरभ मंगलवार को शाही ढंग से 200 करोड़ खर्च कर शादी कर रहा था। इस दौरान ईडी ने दबिश दी। सौरभ को भनक लगते ही उसने हड़बड़ी में 7 फेरे लिए और वहां से फरार हो गया।
दुल्हन से भी हुई पूछताछ
ईडी ने दुल्हन से भी पूछताछ की है. जानकारी के अनुसार ईडी को महादेव सट्टा की जांच के दौरान मनी लॉन्डरिंग में कारोबारी सौरभआहूजा का लिंक मिला। सट्टेबाजी में गिरफ्तार आरोपियों से सौरभ का लेन-देन था। उसे हवाला के माध्यम से मोटी रकम मिली।
नगर निगम ने भ्रष्टाचार में संलिप्त अधिकारियों को दिखाया बाहर का रास्ता
नगर निगम के टैक्स वसूली विभाग में वर्षों से जमें 10 सहायक राजस्व अधिकारियों का तबादला करने के बाद निगम आयुक्त विश्वदीप द्वारा जारी आदेश में इसी विभाग के पूरे 93 अधिकारी-कर्मचारियों को इधर उधर कर दिया गया है। यह अपने तरह का पहला अवसर है जब टैक्स वसूली के लिए वार्डो की भौगोलिक स्थिति के जानकार पूरे अमले का तबादला कर दिया गया है। इस आदेश को लेकर निगम भी बुधवार को दिनभर चर्चा होती रही। इन सबके बीच नगर निगम में इस साल का राजस्व वसूली टारगेट 400 करोड़ से अधिक कर दिया गया है। जनता में खुसुर-फुसुर है कि नगर निगम एक तरह का ऐसा संस्थान है जो मरे में जान छिडक़ता है और जिंदे को मार डालता है। नगर निगम की महिमा अपरमपार है। भ्रष्ट अधिकारियों को ट्रांसफर करके महापौर औऱ आयुक्त ने ठीक नहीं किया है वो तो वहां जाकर फिर से अपनी दुकान खोल लेंगे उन्हें भ्रष्टाचार करने से कोई रोक नहीं सकता। नगर निगम में तो सैकड़ों काम होते है, निगम को जो शुल्क मिलता है उससे सही अधिक शुल्क ये अधिकारी टेबल के नीचे लेते है। महापौर और आयुक्त कोई भी हो इनको कोई फर्क नहीं पड़ता। ये तो वर्षो से जमे हुए अजगर है जो जहां भी रहेंगे सांस लेंगे और छोडेंगे लोगों को नुकसान ही पहुंचाएंगे।
सांसद हो तो बृजमोहन जैसा ....
जनता के साथ अन्याय होने पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल अपने आप को रोक नहीं पाते है। 4 जून से 27 जून के बीच आयोजित ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में कई अभ्यर्थियों ने निर्धारित समय-सीमा में सफलतापूर्वक परीक्षा शुल्क का भुगतान तो कर दिया, लेकिन व्यापम की तकनीकी विफलता (सर्वर एरर) के कारण वे फॉर्म अंतिम रूप से सबमिट नहीं कर पाए। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि व्यापम कार्यालय इन अभ्यर्थियों की शिकायतों को नजऱअंदाज़ कर रहा है और अब तक न तो उन्हें समाधान मिला है और न ही कोई आधिकारिक जवाब। तकनीकी समस्याओं से परेशान अभ्यर्थियों ने सांसद बृजमोहन अग्रवाल से संपर्क कर अपनी आपबीती बताई जिस पर सांसद अग्रवाल ने इसे सुशासन तिहार और नागरिक-हितकारी शासन की मूल भावना के खिलाफ करार दिया। उन्होंने व्यापम अध्यक्ष को पत्र में लिखा है कि, जो अभ्यर्थी समय पर फीस जमा कर चुके हैं, उन्हें परीक्षा से वंचित करना पूरी तरह से अन्यायपूर्ण होगा। उन्होंने सुझाव दिया है कि इन अभ्यर्थियों को एक या दो दिन का अतिरिक्त समय देकर फॉर्म को ऑफलाइन या ऑनलाइन भरने का अवसर प्रदान किया जाए। जनता में खुसुर-फुसुर है कि व्यापम आबकारी विभाग का इस तरह का ढर्रा बहुत पुराना है, पहले भी परीक्षा आयोजित कर रद्द् कर अपने लोगों को भर्ती करने का रिकार्ड बना चुके है। जब भी आबकारी विभाग की परीक्षा व्यापम के माध्यम से होती है पता नहीं क्यों व्यापम के कदम लडख़ड़ा जाते है। जनता भली भाति समझती है जिससे बच्चों का बहुत नुकसान भी होता है।
मारो...मारो....
रेलवे स्टेशन रायपुर में पदस्थ मुख्य वाणिज्य निरीक्षक ठाकुर नाग ने रेलवे इंजीनियर हीरा लाल और दो ठेकेदारों पर गाली-गलौज, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने का गंभीर आरोप लगाया है। इस संबंध में जीआरपी रायपुर थाना में मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच शुरू कर दी गई है।ये रेलवे ठेकेदार है रेल की पटरियों को चबा जाने की क्षमता रखते है तो मुख्य. वाणिज्य निरीक्षक किस खेत की मूली है। जनता में खुसुर-फुसुर है कि रेलवे ठेकेदार रेलवे के भगवान होते है। उससे बड़े -बड़े अधिकारी पंगा लेने से कतराते है। रेलवे के ठेकेदारों की ऊपर तक पहुंच होती है, ऊपर से ही टेंडर मंजूर करवाते है तो लोकल जोनल अधिकारियों क्या सुनेंगे। जिस तरह जंगल सफारी में अलग-अलग जानवरों का बाड़ा होता है वैसे ही रेलवे भी किसी जंगल सफारी से कम नहीं है। बस फर्क है कि यहां इंसान ही जानवर की तरह व्यवहार करने लगते है तो लोगों को जंगल सफारी का आनंद मिल जाता है।





