छत्तीसगढ़

मुझे मालूम है उसका ठिकाना फिर कहां होगा, परिंदा आसमां छूने में जब नाकाम हो जाए

Nilmani Pal
18 July 2025 11:39 AM IST
मुझे मालूम है उसका ठिकाना फिर कहां होगा, परिंदा आसमां छूने में जब नाकाम हो जाए
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कैलाश यादव/ज़ाकिर घुरसेना

कलेक्टर बड़ा या पूर्व मंत्री ..या हेकड़ी

14 जुलाई को जयसिंह अग्रवाल ने अपने फेसबुक अकाउंट से एक तस्वीर साझा की थी, जिसमें ननकीराम कंवर खड़े नजर आ रहे हैं, जबकि कलेक्टर अजीत वसंत और राज्यपाल रमेन डेका बैठे हुए दिख रहे हैं। इस पोस्ट में जयसिंह अग्रवाल ने लिखा कि छत्तीसगढ़ के वरिष्ठतम आदिवासी नेता का अपमान बहुत ही कष्टप्रद है। छत्तीसगढ़ के वरिष्ठतम आदिवासी नेता, पूर्व मंत्री ननकीराम कंवर खड़े हैं, जबकि राज्यपाल रमेन डेका के साथ कलेक्टर बैठे हुए हैं। यह जान और सुनकर अत्यंत पीड़ा हुई। पूर्व मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयसिंह अग्रवाल को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट करने को लेकर कलेक्टर ने एक नोटिस जारी किया। जिसके बाद नोटिस को लेकर जयसिंह अग्रवाल ने कलेक्टर पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि मैं उनका चपरासी नहीं हूं। न ही उनका मातहत अधिकारी हूं जो उनकी बात मानूंगा। वहीं कलेक्टर ने कहा कि जिले में कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी कलेक्टर की होती है। जनता में खुसुर-फुसुर है कि सरकार चली गई पर हेकड़ी नहीं गई है। कांग्रेस सरकार में इसी तरह की हेकड़पन करने के कारण जनता ने सारी हेकड़ी निकाल दी।उसके बाद भी कांग्रेसियों की अकड़ नहीं गई है। कांग्रेस का सत्ता से बेदखल होने में उनके ही लोगों का हाथ है, जिसके कारण पांच साल में कांग्रेस सत्ता से रूखसत हो गई। लेकिन उनके नेता आज भी अपने को किसी मंत्री से कम नहीं मानते। ठशन औऱ टशन यथावत है। ऊपर से जयसिंह अग्रवाल ने कलेक्टर की ओर से जारी नोटिस को लेकर मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि कलेक्टर को आदेश देने का अधिकार नहीं है। मैं न तो कलेक्टर का चपरासी हूं और न मैं कोई कलेक्टर का मातहत अधिकारी हूं। दूसरी बार पद में बैठे लोगों को यह भी मालूम रहकता है कि पद विहीन व्यक्ति की क्या स्थिति होती है इसी बात पर मशहूर शायर डा. बशीर बद्र की एक शेर याद आती है कि मुझे मालूम है उसका ठिकाना फिर कहां होगा, परिंदा आसमां छूने में जब नाकाम हो जाए ।

कागज-कागज में खेल की उल्टी गंगा बहने लगी

मैनपाट में उल्टा पानी में सभी ने कागज की नाव चलते देखा, जिसका असर अब पूरे प्रदेश के स्कूलों में दिखाई देने लगा है। कागज पर कागज का खेल वो उल्टा पानी की तरह नाव बनकर रफ्तार से बहने लगा है। सरकार खेल को प्रोत्साहन देने के लिए बड़े -बड़े जतन कर रही है पर उनके अधिकारियों की मति फिर गई है। मामला है सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों के खेलने के लिए 40 करोड़ की स्पोर्ट किट सप्लाई की है। मजेदार बात ये है कि यह किट उन स्कूलों को भी सप्लाई कर दी गई जहां स्टूडेंट के खेलने के लिए प्ले ग्राउंड ही नहीं है। जनता में खुसुर-फुसुर है कि वाह सरकार के अधिकारी क्या काम्बिनेशन किया है। जिन स्कूलों में कोर्ट नहीं वहां बास्केटबाल वालीबाल , जहां मैदान नहीं वहां फुटबाल -क्रिकेट किट बांट कर अपनी पीठ थपथपा रही है। ये सब कुछ मैनपाट में बह रही उल्टा पानी का असर तो नहीं है। सरकार को पता करना चाहिए की मैनपाट प्रशिक्षण शिविर में जिन अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई थी वो खेल औऱ शिक्षा विभाग के तो नहीं थे, जो स्कूलों में भी उल्टी गंगा बहाने की कोशिश कर रहे हैं।

जेम पोर्टल या जीम पोर्टल ...

प्रदेश में इन दिनों 32 हजार में एक जग सप्लाई करने का मामला चर्चा में है। उस दुकान का अता-पता कही नहीं है। जग सप्लाई का कोटेशन देने वाली फर्म का नाम श्रीराम सेल्स एंड सप्लायर है। श्री राम सेल्स ने आदिवासी विकास विभाग को कटेशन में जो जीएसटी 22 एएफएचएफएस8638 ई-1 जेडवी नंबर दिया था, वह जीएसटी नंबर पूरी तरह से सही पाया गया जो एक पार्टनर शिप फर्म है। जनता में खुसुर-फुसुर है कि हर जगह जीम पोर्टल का खेल चल रहा है। जिस भी विभाग में खाने पाने को मिल जाए तुरंत फर्जीवाड़ा कर सरकार को चूना लगाने वाले गिरोह सक्रिय 32 हजार वाला जग का मामला अभी ठंडा नहीं हुआ है और नया मामला जेम पोर्ट के माध्यम से पांच टीवी खरीदने 9 लाख 99 हजार 5 सौ रुपए का कोटेशन आ गया है। जबकि बाजार में इससे 5 गुना कम रेट पर अच्छी कंपनी का टीवी मिल रही है।

रेत डंपिंग की सूचना दें हम कार्रवाई करेंगे ..

रेत को लेकर पूरे प्रदेश में हाहाकार मचा हुआ है। वहीं रेत माफिया न सरकार की सुन रहे न मंत्री की न अधिकारी की। समझ में नहीं आ रहा है कि सरकार कौन चला रहा है। वहीं अधिकारी ये बयान जारी कर रहे है कि माइनिंग अधिकारी लगातार कार्रवाई कर रहे है यदि आपके पास कोई जानकारी हो तो बताएं कार्रवाई की जाएगी। दो माह पहले पिथौरा रोड जाना हुआ वहां आरंग के आसपास रेत का पहाड़ देख कर सहसा यकीन नहीं हुआ कि पहाड़ के भी पेड़ उगते है। क्योंकि यहां समतल जमीन थी। नजदीक जाकर देखने पर पता चला कि ये पहाड़ कुदरत का बनाया नहीं बल्कि मानव निर्मित रेत के पहाड़ थे. अब अधिकारी बोल रहे है कि पहाड़ दिखाओ्ं हम कार्रवाई करेंगे। क्या जनता के चश्मा और अधिकारी के चश्मे में फर्क होता है क्या। जनता में खुसुर-फुसुर है कि सरकार बड़े अधिकारियों सरकार के सुचारू संचालन के लिए जिम्मेदारी देती है, तो वो क्यों आमजनता से जानकारी बताने की अपील कर रहे है। क्या वो देख नहीं सकते या हरिय़ाली वाला चश्मा लगा रखा जिसमें सब कुछ हरा ही हरा दिखाई दे रहा है। एैसे में तो सरकार नया विधेयक लाकर जनप्रतिनिधियों को निगम, मंडल, आयोग की तरह कलेक्टर कमिश्नर मनोनीत कर सकती है। जिससे वो आन द स्पाट जाकर डंपिंग क्षेत्र में जाकर पार्टी के लिए तगड़ा फंड इकट्ठा कर सकती है। जिस भी पार्टी की सरकार होगी वो अपने हिसाब से कलेक्टर कमिश्नर मनोनीत कर सकती है। रेत माफियाओ्ं ने समानांतर सरकार बनाकर सरकार के अधिकारियों बटईदार बना लिया है एैसा लगता है जिसके कारण जो कुछ हो रहा है वो दिखाई ही नहीं दे रहा है।

जय हो छत्तीसगढ़ महतारी की, नारी सशक्तीकरण की धूम विदेशों में

छत्तीसगढ़ की महिला सशक्तिकरण का डंका विदेशों में बज रहा है। एक बहू ने गोल्डमेडल जीता तो दूसरा तरफ एक बेटी ने जापान में गोल्डमेटल जीत कर छत्तीसगढ़ महतारी की गोद को सोने से भर दिया है। बधाई दोनों बेटियों को, हमारे छत्तीसगढ़ एैसी सैकड़ों बहू-बेटियां है जो ओलिंपिक में भी हाथ आजमा सकती है। रायपुर की नमी राय पारेख ने गोल्ड मेडल जीतने के बाद खुशी जाहिर करते हुए कहा कि गोल्ड मेडल लाकर मैं बहुत खुश हूं। अब यहाँ भी गोल्ड मेडल जीतकर मैं गौरवान्वित महसूस कर रही हूं। मैं एक बहू होकर गोल्ड मेडल लाई हूं, तो बेटियां तो और भी बेहतर कर सकती हैं। वहीं की बेटी रंजीता कोरेटी ने ताइपे (ताईवान) में आयोजित एशियन कैडेट जूडो चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत और छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया है। छत्तीसगढ़ राज्य बाल कल्याण परिषद बालगृह बालिका कोण्डागांव की रंजीता ने कई देशों के खिलाड़ियों को पराजित करते हुए यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रंजीता को बधाई देते हुए कहा कि यह न केवल कोण्डागांव जिले बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ राज्य के लिए अत्यंत गर्व का क्षण है। उन्होंने कहा कि रंजीता जैसी बेटियां राज्य की उम्मीद और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा है, जो यह सिद्ध कर रही है कि छत्तीसगढ़ की बेटियां अब वैश्विक मंच पर अपनी अलग पहचान बना रही है। जनता में खुसुर-फुसुर है कि सरकार को चाहिए छत्तीसगढ़ में बहू-बोटियों के पास जो प्रतिभा है उसे वैश्विक पटल पर सामने लाने के लिए एैसी योजना बनाए कि स्कूल में पढ़ाई के दौरान एैसी विलक्षण प्रतिभा को चिन्हित कर उन बच्चियों को भरपूर संरक्षण दे और जिस फील्ड में च्ची को महारत हासिल है उस पर फोकस करे तो खेल के क्षेत्र में पंजाब-हरियाणा को पछाड़ने की ताकत छत्तीसगढ़ की बहू-बेटियों में है।

मेरी आशिकी तेरी आशिकी ..किसकी आशिकी ....

छत्तीसगढ़ में डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलीजेंस की टीम ने छापा मारा है। रायपुर, दुर्ग, भिलाई और राजनांदगांव जिले में रेड कार्रवाई जारी है। डीजीजीआई की टीम आशिकी पान मसाला की निर्माण फैक्ट्री समेत डिस्ट्रीब्यूटर्स के ठिकानों पर जांच कर रही है। करीबन 60 करोड़ की टैक्स चोरी और फर्जी बिलिंग से जुड़ी शिकायतों पर डीजीजीआई की टीम ने छापेमार कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस कार्रवाई में बोगस बिल, इलेक्ट्रानिक डिवाइज, पेन ड्राइव, हार्ड डिस्क, फैक्स मशीन समेत कई अहम दस्तावेज जब्त किए गए हैं। जनता में खुसुर-फुसुर है कि ये पान मसाला वाले भी आशिकी करते है इसलिए अपने गुटखे कानाम आशिकी रखे है। ताकि सभी को आसक्त कर सके। दिल्ली से 9 सदस्यीय टीम पहुंची है, जो अलग-अलग ठिकानों पर जांच कर रही है. राजनांदगांव स्थित आशिकी पान मसाला के फ्रेंजाइजी नरेश मोटलानी, छत्तीसगढ़ डिस्ट्रीब्यूटर विश्वनाथ काबरा के ठिकानों पर डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलीजेंस की टीम दस्तावेजों को खंगाल रही है।

मोदी की गारंटी अब नइ सहिबो बदल के रहिबो

राज्य सरकार के खिलाफ नाराज़गी जताते हुए छत्तीसगढ़ के शासकीय कर्मचारियों और अधिकारियों ने नवा रायपुर स्थित इंद्रावती भवन संचालनालय के सामने जोरदार प्रदर्शन किया। यह आंदोलन छत्तीसगढ़ अधिकारी-कर्मचारी फेडरेशन के बैनर तले आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में राज्य के विभिन्न विभागों से आए कर्मचारी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार से केंद्र के अनुरूप महंगाई भत्ता दिए जाने, लंबित एरियर्स का भुगतान, पुरानी पेंशन योजना बहाल करने समेत 11 सूत्रीय मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। जनता में खुसुर-फुसुर है कि अधिकारी कर्मचारी सरकार के आंख-कान नाक होते है, इनका इस तरह आंदोलन कामकाज को प्रभावित कर सकता है। जब सरकार सबका साथ सबका विकास को लेकर काम कर रही है तो इन कर्मचारियों का तो हक बनता है कि इनकी सभी मांग पूरी हो ताकि आने वाले चुनाव में भी इनको याद रहे मोदी की गारंटी अब नइ सहिबो बदल के रहिबो।

अब तो वादा पूरा कर दो सरकार ...

एनएमएच संविदा कर्मचारियों ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि कोविड काल में हमें कोरोना वॉरियर्स कहकर ताली और थाली बजवाई गई, लेकिन आज वही कर्मचारी अपनी मांगों के लिए सड़कों पर हैं और अपने लिए खुद ताली और थाली बजाने पर मजबूर हैं। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि अगर मांगें नहीं मानी गईं तो राज्यभर में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होंगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।जनता में खुसुर-फुसुर है कि पिछले 20 वर्षों से मांगें लंबित है जिसके लिए संघ ने सौंपे 100 से अधिक ज्ञापन सौंपे हैं। एनएमएच कर्मचारी पिछले दो दशकों से अपने नियमितीकरण, सेवा शर्तों में सुधार, समान कार्य-समान वेतन जैसी मांगों को लेकर लगातार ज्ञापन, आंदोलन और अनुनय-विनय कर रहे हैं। “मोदी की गारंटी” और अन्य चुनावी वादों के बावजूद आज तक कोई ठोस पहल नहीं की गई। उन्होंने बताया कि अब तक 100 से अधिक ज्ञापन मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और उच्च अधिकारियों को सौंपे जा चुके हैं, लेकिन परिणाम शून्य ही रहा है।

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