छत्तीसगढ़
समोसे बेचने वाला विकी भू-माफिया कांग्रेस शासनकाल में रातों-रात कैसे बना?
Shantanu Roy
27 March 2025 8:05 PM IST

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कल तक रायपुर की सड़कों में समोसा बेचने वाला अब शहर का सबसे बड़ा नामचीन बिल्डर बनने की ओर
Raipur. रायपुर। कभी शहर की सड़कों पर समोसे बेचने वाला विकी अब छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा भू-माफिया बनने की राह पर है। आरोप है कि कांग्रेस शासनकाल में उसने छोटे नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों के काले धन को निवेश कर बेहद महंगी संपत्तियां खरीदीं। बताया जा रहा है कि सेजबहार, छछानपैरी, कांदुल, टाटीबंध, मुजगहन समेत रायपुर के कई इलाकों में उसने अनाप-शनाप बाजार दर से ज्यादा कीमत पर ज़मीनों का अधिग्रहण किया है। अब इन मामलों को भी सीबीआई को जांच करनी चाहिए कि हज़ारों करोड़ों की बेनामी संपत्ति इन बिल्डरों के पास रहती है तो इसके पीछे किसका हाथ होता है? सीबीआई को इन बिल्डरों के आय से अधिक बेनामी संपत्ति मामलें में जांच करना चाहिए और सभी की बेनामी संपत्ति को कुर्क करके सील कर देना चाहिए। बेनामी संपत्ति के मालिक कांग्रेस के तत्कालीन शासन के नेता और IAS - IPS अधिकारी गण है इसकी पुख्ता जानकारी विकी समोसा वाले के यहां मिलेगी। सट्टा-जुआ शराब एवं सभी तरह का 2 नंबर की बड़ी रकम विकी समोसे वाले के द्वारा रायपुर शहर के चारो तरफ बेतहाशा बेनामी सम्पतियों और जमीनों में उपयोग की गई है। क्या सीबीआई (CBI), EOW और ED की जांच का सबसे सुगम रास्ता बनेगा विकी समोसे वाला? सूत्रों के अनुसार विकी समोसे वाले का दावा है कि वो सभी मीडिया घरानों और समाचर पत्रों के मालिकों को अपने जेब में रखता है सिवाय जनता से रिश्ता समाचार पत्र को छोड़कर।
सूत्रों के अनुसार, इस खेल में कई IAS और IPS अधिकारी भी शामिल हैं, जिन्होंने अपने अवैध पैसे को विकी के ज़रिए रियल एस्टेट में निवेश किया। कांग्रेस शासनकाल में उसे राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण मिला, जिससे वह एक साधारण स्ट्रीट फूड विक्रेता से शहर के सबसे प्रभावशाली बिल्डरों में शामिल हो गया। विकी न केवल रियल एस्टेट में बड़ा नाम बन चुका है, बल्कि वह अब मीडिया में भी स्पॉन्सर्ड खबरों के माध्यम से अपनी छवि चमकाने का प्रयास कर रहा है। आरोप हैं कि उसने अपने अवैध कारोबार को छुपाने के लिए स्थानीय मीडिया संस्थानों में मोटा पैसा लगाया है, जिससे उसके खिलाफ कोई भी नकारात्मक खबर न चले। अब सवाल उठ रहा है कि क्या प्रशासन इस मामले की जांच करेगा? और क्या नेताओं और अधिकारियों के साथ मिलीभगत से फल-फूल रहे इस भू-माफिया पर कोई कार्रवाई होगी?
महादेव ऐप सट्टा घोटाले में CBI का बड़ा एक्शन, छत्तीसगढ़ के IPS अफसरों पर शिकंजा
महादेव ऐप सट्टा घोटाले में CBI की देशभर में 60 स्थानों पर छापेमारी के बाद बड़ी कार्रवाई देखने को मिल रही है। छत्तीसगढ़ में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के करीबी माने जाने वाले कई पुलिस अधिकारी जांच के दायरे में आ चुके हैं। CBI की जांच के तहत छत्तीसगढ़ कैडर के चार IPS अधिकारी– आनंद छाबड़ा (2001 बैच), आरिफ शेख (2005 बैच), प्रशांत अग्रवाल (2007 बैच) और अभिषेक पल्लव (2013 बैच) के बंगलों पर छापेमारी की गई।
सूत्रों के अनुसार, इन अधिकारियों के खिलाफ सट्टा कारोबार से जुड़े डिजिटल सबूत मिले हैं। जांच एजेंसियों को संदेह है कि पुलिस तंत्र में बड़े अधिकारियों के संरक्षण में महादेव ऐप का कारोबार वैध तरीके से फल-फूल रहा था। CBI की कार्रवाई से छत्तीसगढ़ शासन और पुलिस विभाग की छवि प्रभावित हो रही है। सरकार के भीतर भी इन IPS और ASP स्तर के अधिकारियों के निलंबन की मांग जोर पकड़ रही है। मंत्रालय और पुलिस मुख्यालय के गलियारों में चर्चा है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत भ्रष्ट अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है।
CBI ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के दोनों OSD मनीष बंछोर और आशीष वर्मा के ठिकानों पर भी छापा मारा। साथ ही, निलंबित पूर्व उप सचिव सौम्या चौरसिया के घरों से मिले भ्रष्टाचार से जुड़े दस्तावेजों की भी नए सिरे से जांच हो रही है। CBI को IPS आरिफ शेख और उनकी पत्नी, 2001 बैच की IAS अधिकारी शम्मी आबिदी के खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़े कई अहम सबूत मिले हैं। मुंबई और पुणे में शेख आरिफ के रिश्तेदारों के नाम पर फाइव स्टार होटल और रियल एस्टेट में बड़े निवेश की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा, पुलिस अधिकारियों के रिश्तेदारों के नाम पर कृषि भूमि और अन्य संपत्तियों में किए गए निवेश की भी जांच जारी है। CBI ने राजनांदगांव में ASP अभिषेक माहेश्वरी के ठिकानों पर भी छापेमारी की।
बताया जाता है कि पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार में वह महादेव ऐप के संचालन में तकनीकी सहायता और फोन टेपिंग जैसे कार्यों में शामिल थे। CBI ने प्रेस नोट जारी कर कहा है कि छापेमारी में आपत्तिजनक डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्य जब्त किए गए हैं। एजेंसी ने यह भी संकेत दिया है कि जांच जारी है और जल्द ही और गिरफ्तारियां संभव हैं। इस हाई-प्रोफाइल मामले में केंद्र सरकार की ओर से भ्रष्टाचार पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है, जिससे प्रदेश में भ्रष्ट अधिकारियों और राजनेताओं के गठजोड़ पर गहरी चोट पड़ सकती है। छत्तीसगढ़ में महादेव ऐप सट्टा घोटाले से जुड़े मामलों में CBI द्वारा देशभर में 60 से अधिक स्थानों पर छापेमारी की गई है। इस कार्रवाई में कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, ASP स्तर के अधिकारियों और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से जुड़े लोगों के नाम सामने आए हैं। इस छापेमारी के बाद राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया है।
पुलिस मुख्यालय से लेकर मंत्रालय तक मचा हड़कंप
CBI की कार्रवाई के बाद छत्तीसगढ़ पुलिस और प्रशासन की छवि पर गहरा असर पड़ा है। पुलिस मुख्यालय और मंत्रालय में निलंबन की मांग जोर पकड़ रही है। इस मामले में फंसे ASP स्तर के दोनों अधिकारियों को तत्काल निलंबित किए जाने की चर्चा चल रही है। कई वरिष्ठ अधिकारी भी इस कार्रवाई से चिंतित हैं और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत सख्त कदम उठाने की संभावनाएं जताई जा रही हैं। CBI की छापेमारी को केंद्र सरकार के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का हिस्सा माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से दिए गए अपने भाषणों में महादेव ऐप सट्टा, शराब और अन्य घोटालों में लिप्त लोगों को जेल भेजने का वादा किया था। अब CBI ने उन बड़े मगरमच्छों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है, जो प्रशासनिक तंत्र और कानून का दुरुपयोग कर रहे थे।
CBI जांच में क्या खुलासा हुआ?
CBI की जांच में चार वरिष्ठ IPS अधिकारी – 2001 बैच के आनंद छाबड़ा, 2005 बैच के आरिफ शेख, 2007 बैच के प्रशांत अग्रवाल और 2013 बैच के अभिषेक पल्लव के नाम प्रमुख रूप से सामने आए हैं। इनके आवासों पर छापेमारी के दौरान मिले डिजिटल सबूतों से यह स्पष्ट हुआ कि पुलिस तंत्र के भीतर ही महादेव ऐप सट्टा कारोबार को सुरक्षा प्रदान की जा रही थी। पुलिस के इन आला अधिकारियों पर आरोप है कि वे अवैध सट्टे पर रोक लगाने के बजाय मोटी रकम बतौर प्रोटेक्शन मनी ले रहे थे।
इसके अलावा, CBI ने राजनांदगांव में ASP अभिषेक माहेश्वरी के ठिकानों पर भी छापा मारा। जांच में पता चला है कि पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार में क्राइम ASP रहे माहेश्वरी को महादेव ऐप के संचालन में तकनीकी सहायता, अवैध फोन टेपिंग और विरोधियों को निशाना बनाने की जिम्मेदारी दी गई थी।
भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग
सूत्रों के अनुसार, यदि इन अधिकारियों को जल्द निलंबित नहीं किया गया तो जांच प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। सरकार के भीतर भी यह चर्चा हो रही है कि यदि दोषी अधिकारी अपने पदों पर बने रहते हैं, तो वे सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं। CBI द्वारा EOW (आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा) के सहयोग से कई प्रभावशाली आरोपियों के ठिकानों पर दबिश दी गई। इस कार्रवाई को बीजेपी सरकार की भ्रष्टाचार विरोधी नीति के तहत उठाए गए महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनके करीबी भी जांच के घेरे में
CBI ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनके दोनों OSD (विशेष कर्तव्य अधिकारी) मनीष बंछोर और आशीष वर्मा के ठिकानों पर भी छापा मारा। सूत्रों के अनुसार, CBI को इनके परिसरों से कई चौंकाने वाले डिजिटल सबूत हाथ लगे हैं। इसके अलावा, राज्य प्रशासनिक सेवा की निलंबित तत्कालीन उप सचिव सौम्या चौरसिया के ठिकानों पर भी छापेमारी की गई। पहले से ही विभिन्न एजेंसियों के पास सौम्या चौरसिया से जुड़े भ्रष्टाचार के कई दस्तावेजी प्रमाण मौजूद थे। CBI ने इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए IPS अधिकारियों के बंगलों पर दबिश दी।
बेनामी संपत्तियों की जांच शुरू
CBI को मिली जानकारी के अनुसार, IPS आरिफ शेख और उनकी पत्नी, IAS शम्मी आबिदी के खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़े कई अहम सबूत मिले हैं। बताया जा रहा है कि मुंबई और पुणे में इनके परिजनों के नाम पर फाइव स्टार होटल और रियल एस्टेट में बड़े निवेश की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा, बीते 5 वर्षों के भीतर ही शेख आरिफ के साले एवं अन्य करीबी नाते-रिश्तेदारों के नाम पर बड़ी मात्रा में चल-अचल संपत्ति, कृषि भूमि और अन्य व्यापारों में निवेश किया गया था। CBI ने प्रेस नोट जारी कर कहा है कि तलाशी के दौरान आपत्तिजनक डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्य जब्त किए गए हैं। एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया कि छापेमारी अभी जारी है और आगे भी कई बड़े नामों का खुलासा हो सकता है।
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