हाउसिंग बोर्ड के घोटालों पर पर्दा, अफसरों ने मिटाए सबूत

लोक आयोग में 5 साल से प्रकरण लंबित, पेश ही नहीं हो रहे कमिश्नर
भ्रष्टाचार पर कार्रवाई नहीं होना सरकार में ब्यूरोक्रेट्स सरकार को गुमराह करने का सबसे बड़ा उदाहरण
भूपेश सरकार में सभी भ्रष्ट अधिकारियों को प्रमोशन के साथ मिला मलाई वाली जगह
फाइल चोरी होने की सूचना पुलिस को देना का अधिकारी किसके पास और अभी तक क्यों नहीं दिया गया?
भ्रष्ट अधिकारी सर्वोच्च पदों पर आसीन, जनता और सरकार को लगा रहे चूना
1000 करोड़ के तालपुरी घोटाले में शामिल चार अधिकारी ही सर्वेसर्वा
विभागीय जांच में दोषी पाए जाने के बाद भी आज तक नहीं हुई कार्रवाई
अपने प्रभाव से जांच रिपोर्ट दबाए, सरकार और विभाग भी कुछ नहीं बिगाड़ पा रहे
भ्रष्टाचार के प्रमाण मिलने के बाद भी लगातार प्रमोट हुए, आयुक्त को भी कर रहे गुमराह
हाउसिंग बोर्ड की संपत्ति को डिसमेंटल के कगार पर लाने वाले अधिकारी ही सर्वेसर्वा
जांच को प्रभावित करने कई बार हाऊसिंग बोर्ड के रिकार्ड शाखा में लगा चुके है आग
लोक आयोग लगातार कार्रवाई के लिए कागज भेज रहा है जिसे मु यालय में बैठ कर भ्रष्ट अधिकारी दबा रहे हैं और अपनेआप को बचाने में कामयाब हो रहे हैं
जांच प्रतिवेदन तालपुरी घोटाले का जिसमें तीनों भ्रष्ट अधिकारियों पर सीधी कार्रवाई की अनुशंसा की गई थी वो फाइल और जांच प्रतिवेदन हाउसिंग कार्यालय से चोरी/गायब होना बताया जा रहा
भूपेश सरकार की कार्यकाल में सभी भ्रष्ट अधिकारियों को हाउसिंग बोर्ड के पुराने कर्मकांड और भ्रष्टाचार के घोटालों का जि मेदार होने काबजूद उसी जगह पर बैठाकर सभी सबूतों को नष्ट कराया गया, लेकिन जनता से रिश्ता के पास सभी हुए भ्रष्टाचार के सबूत सूचना के अधिकार के तहत मिल चुका था, लोक आयोग के बाद हाईकोर्ट तक भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लडऩे का सिलसिला जारी रहेगा
रायपुर/भिलाई (जसेरि)। हाउसिंग बोर्ड के कई बड़े प्रोजेक्ट में हजारों करोड़ के भ्रष्टाचार के मामलों में कई बड़े अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच में दोष सिद्धी पाये जाने के बाद कार्रवाई की अनुशंसा की गई थी तथा जि मेदार अधिकारियों से घोटाले की राशि की वसूली करने का भी स्पष्ट आदेश था लेकिन कार्रवाई तो दूर जांच प्रतिवेदन ही गायब कर दिए गए। जांच को 10 साल से ज्यादा हो गए और भ्रष्ट अधिकारी प्रमोशन पर प्रमोशन लेते हुए उच्च से उच्च पद पर आसीन होकर अपने काले कारनामो पर परदा डालते रहे। खबर है कि जांच प्रतिवेदन और जांच की संपूर्ण फाइलें विभागीय तौर पर गायब कर दी गई है. जनता से रिश्ता ने पिछले 6, 7 सालों में विभिन्न हाउसिंग प्रोजेक्टस के संपूर्ण दस्तावेज हाउसिंग बोर्ड से सूचना के अधिकार के माध्यम से निकलवाए और उसी के आधार पर मु यमंत्री से लेकर लोकायुक्त, सीबीआई व प्रधानमंत्री कार्यालय तक शिकायत की गई थी।
उसके उपरांत लोक आयोग में परिवारवाद शपथ पत्र के साथ दायर किया गया था. पिछले 5 साल से लोकआयोग हाउसिंग बोर्ड से और शासन से जवाब पर जवाब मांग रहा है लेकिन किसी भी अधिकारी ने अभी तक संबंधित भ्रष्टाचार के प्रकरण में किसी भी प्रकार का प्रतिवेदन या जवाब प्रस्तुत नहीं किया है। विभागीय जानकारी प्राप्त नहीं होने के कारण लोक आयोग में हजार करोड़ से ज्यादा का भ्रष्टाचार का पूरा प्रकरण बिना आदेश के चल रहा है और पेशी पर पेशी हो रही है और भ्रष्टाचारी अधिकारी बचे हुए हैं। विभागीय तौर पर सेटिंग कर अपने पद प्रतिष्ठा को दिन प्रतिदिन बढ़ा रहे हैं. हद तो तब हो गई जब इन अधिकारियों को कांग्रेस की भूपेश सरकार के समय दो-दो बार प्रमोशन भी मिल गया जिसका परिणाम यह हुआ की जिन्होंने जहां चोरी की उसी स्थान का वह प्रमुख बनकर फाइलों के साथ खिलवाड़ करते रहे और अपने गुनाहों के सबूत को नष्ट करते गए। वर्तमान में भी जांच के लिए जो समिति बनाई गई है उसमें भी वही अधिकारी शामिल हैं जो या तो इनके भ्रष्टाचार में प्रत्यक्ष रुप से शामिल रहे या उन्हें प्रोत्साहित करते रहे। जांच समिति विभाग से न होकर बाहरी विभाग के अधिकारियों की होती तो सच सामने आने की संभावना बनती लेकिन ऐसा ना कर कर विभागीय अधिकारियों को लेकर भ्रष्टाचार की जांच समिति बनाई गई। इतना ही नहीं जांच समिति को किसी प्रकार के दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हें, जब दस्तावेज विभाग में उपलब्ध नहीं है असली फाइलें गायब है प्रोजेक्ट की सभी असली फाइल और जांच प्रतिवेदन चोरी होना बताया जा रहा है तो उसकी आज तक एफआईआर दर्ज क्यों नहीं कराई गई। संबंधित जि मेदार अधिकारी के खिलाफ अपराध दर्ज नहीं कराया गया और ना विभाग ने ही इसे संज्ञान में लिया। हाउसिंग बोर्ड के इतिहास में तालपुरी घोटाला, हिमालयन हाइट्स घोटाला, अभिलाषा परिसर बिलासपुर का घोटाला वो चर्चित घोटाले हैं जिसका हाउसिंग बोर्ड पारदर्शिता से जांच कराए तो कई बड़े अधिकारी जेल के सलाखों के भीतर होंगे। इन भ्रष्टाचारों की जनता से रिश्ता के पास संपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध है जिसके आधार पर लोक आयोग ने केस दर्ज कर सभी भ्रष्ट अधिकारियों को जांच के दायरे में लिया। लोक आयोग में जांच अंतिम चरण में है। लोक आयोग में हाउसिंग बोर्ड के कमिश्नर को व्यक्तिगत उपस्थिति होने के लिए कई अवसर दिए लेकिन किसी भी अवसर पर हाउसिंग बोर्ड के कमिश्नर लोक आयोग की अदालत में उपस्थित नहीं हुए। इसी से पता चलता है कि भ्रष्ट अधिकारियों के भ्रष्टाचार की जड़े कितनी मजबूत है और वह किस तरीके से अपने से बड़े कमिश्नरों और अपने बड़े अधिकारियों को अपने अधीन रखते हैं और पूरी जांच को प्रभावित कर रहे हैं। इन घोटालों में प्रदेश की जनता की 1500 करोड़ से ज्यादा की राशि इन भ्रष्ट अधिकारियों ने डकार हैं। इन्हें सजा नहीं मिलना सरकार में व्यूरोक्रेट्स के नियंत्रण का सबसे बड़ा उदाहरण है।
सालों से एक ही जमे इन भ्रष्ट अधिकारियों को दो महीने पहले ही दूसरे कार्यालयों में स्थानांतरित किया गया है. इन अफसरों को दुर्ग, बिलासपुर और जगदलपुर में नवीन पदस्थाना मिली है। एच.के. जोशी अपर आयुक्त को प्रक्षेत्र दुर्ग एवं मु यालय नवा रायपुर से प्रक्षेत्र नवा रायपुर एवं मु यालय नवा रायपुर भेजा गया है। अपर आयुक्त अजीत सिंह पटेल प्रक्षेत्र रायपुर एवं नवा रायपुर को प्रक्षेत्र बिलासपुर, एम.डी. पनारिया अपर आयुक्त प्रक्षेत्र बिलासपुर प्रक्षेत्र-दुर्ग, एस.के. भगत अपर आयुक्त को प्रक्षेत्र जगदलपुर को प्रक्षेत्र रायपुर और एच.के. वर्मा अपर आयुक्त को मु यालय, नवा रायपुर प्रक्षेत्र में नवीन पदस्थापना मिली है।





