छत्तीसगढ़

नकली उत्पादों का गढ़, जीएसटी और कस्टम चोरी

Nilmani Pal
23 Oct 2025 11:28 AM IST
नकली उत्पादों का गढ़, जीएसटी और कस्टम चोरी
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नकली सामानों के कारोबार में अवैध पाकिस्तानियों, बांग्लादेशियों का एकाधिकार

देशद्रोह कर जनता के जानमाल से खिलवाड़ करने वाले कारोबारियों के खिलाफ खुलासे का अभियान चलता रहेगा

नेपाल से दानापुर/राजेंद्र नगर, पटना से हो रहेे छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में सप्लाई

रायपुर में धरपकड़ के कारण रायगढ़-अंबिकापुर में माल उतर कर सडक़ मार्ग से राजधानी में खपाया जा रहा

नेपाल का माल होने बिक्री अच्छी होती है, असली नकली की जांच भी नहीं होती

वजीराबाद-जाफराबाद और दिल्ली के आसपास क्षेत्रों में नकली माल धड़ल्ले से बन रहा

एक्सपायरी डेट की कास्मेटिक तथा एफएमसीजी सामान, मशीन से नई तारीख डाल देने से जनता के स्वास्थ्य को खतरा, कैंसर होने की संभावना

रायपुर (जसेरि)। जीएसटी चोरी का नया तरीका कारोबारियों ने ढूंढ लिया है। अब वो ब्रांडेड उत्पाद के मिलते जुलते नाम के नकली उत्पाद बनाने वाली कंपनी से सांठगांठ कर सरकार की आंखों में धूल झोंककर करोड़़ों की कमाई कर जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे है। नकली उत्पाद को खपाने में पाकिस्तानियों और बांग्लादेशी तस्कर व्यापारियों का हाथ होना बताया जा रहा है। आसपास ब्रांडेड कंपनियों के नकली उत्पाद की फैक्ट्रियां चल रही धड़ल्ले से, स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़, ग्राहकों को सीधा जहर दे रहे हैं। काजू-बादाम, दवाइयां, इलेक्ट्रानिक्स और अन्य खाने-पीने की नकली वस्तुओं के जद में शहरी और ग्रामीण बाजार फूड एंड ड्रग सेप्टी विभाग को राजनीतिक रसूखदारों और छुटभैया नेताओं के संरक्षण के चलते यह कारोबार फलफूल रहा है । नामीकंपनियों के प्रतिनिधियों की शिकायत पर कोई सुनवाई नहीं, नकली उत्पाद ने ले लिया कुटीर और गृह उद्योग की तरह चल रहा है जिस पर किसी का नियंत्रण नहीं है।

1 लाख करोड़ से ज्यादा की चपत

नकली उत्पादों से जीडीपी को 1 लाख करोड़ से ज्यादा की चपत - नकली उत्पादों की खरीद-फरोख्त से बीते साल अर्थव्यवस्था को 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ। 2019-20 में जालसाजी या नकली उत्पाद बनाने-बेचने की घटनाओं में भी 30 फीसदी इजाफा हुआ। एक रिपोर्ट के अनुसार महामारी में नियमित और संगठित आपूर्ति सेवाओं पर असर की वजह से नकली उत्पादों को पांव पसारने का ज्यादा मौका मिला है। सबसे ज्यादा प्रभावित 10 क्षेत्रों में मुद्रा, एफएमसीजी, शराब, फार्मा, दस्तावेज, कृषि, इन्फ्रा, ऑटोमोटिव, तंबाकू, लाइफस्टाइल और कपड़ा है। नकली उत्पादों ने सिर्फ लग्जरी श्रेणी में ही सेंध नहीं मारी है, बल्कि रोजमर्रा के इस्तेमाल की चीजों के बीच भी गहरी पैठ बना ली है। जीरा, सरसों तेल, घी, हेयर ऑयल, साबुन, दवाओं आदि के नकली उत्पाद धड़ल्ले से बिक रहे हैं।

बीमारी की जड़ है नकली उत्पाद

डाक्टरों की माने तो बाजार में मिलने वाले नकली खाद्य पदार्थ बीमारी का सबसे बड़ा स्रोत है। नकली वस्तुओं के सेवन से तरह-तरह की बीमारी भी हो रही मसलन गैस, एसिडिटी, कब्ज, साँस लेने में तकलीफ, पीलिया, कैंसर, ब्लड प्रेशर और मत्वपूर्ण हार्ट अटैक जैसी गंभी बीमारियों से लोग जूझ रहे हैं लेकिन इसके बावजूद प्रशासन कुम्भकर्णी नींद में सोया हुआ है। जिम्मेदार विभाग अपनी जिम्मेदारी भी गंभीरता से नहीं निभा रहे हैं। देखा गया है कि तिल्दा नेवरा, भाटापारा के आसपास प्राय: हर दूसरे घर में नकली सामानों के उत्पदन के साथ पैकेजिंग भी हो रही है और नगर पालिका प्रशासन हो या अन्य जिम्मेदार विभाग सब जांच के नाम पर चक्कर लगाकर अपनी कर्तव्य की इतिश्री कर रहे हैं। नकली प्रोडक्ट उत्पाद करने वाले लोगों द्वारा ब्रांडेड कंपनियों के नकली उत्पादों के नकली व अमानक जहरीले उत्पादों से आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है।

धड़ल्ले से हो रही नकली उत्पाद की सप्लाई

जनता से रिश्ता ने पिछले अंक में नकली उत्पादों के बारे में समाचार प्रकाशित किया था। राजधानी में आसपास के छोटे शहरों और कस्बों में निर्मित बड़े ब्रांड के नकली उत्पाद धड़ल्ले से सप्लाई हो रहे है। तिल्दा-नेवरा, भाटापारा, दुर्ग, भिलाई, चकरभाटा सहित राजधानी के आसपास नकली सामान बनाये जा रहे हैं। नकली काजू, बादाम के अलावा दवाइयां और अन्य खाने-पीने की वस्तुयें भी नकली तैयार की जा रही है। फूड एंड ड्रग सेफ्टी विभाग द्वारा भी नियमित चेकिंग नहीं की जा रही है जिसके चलते मार्केट नकली उत्पाद से अटा पड़ा है। शिकायत करने पर सम्बंधित जगह पर छापेमारी की जाती है, लेकिन वह भी औपचारिकता निभाने के रूप में होती है। जबकि नियमित रूप से चेकिंग करना फूट एंड ड्रग सेफ्टी विभाग की जिम्मेदारी का हिस्सा है। पुलिस विभाग में भी नकली सामानों की जांच करने के लिए अलग से विंग नहीं है, जो नकली माल की जांच करे। आम लोगों के साथ ब्रांडेड कंपनियों के प्रतिनिधियों द्वारा की गई शिकायत के आधार पर जांच के नाम पर खानापूर्ति हो रही हैं। क्योंकि पुलिस अपना मूल काम कानून व्यवस्था पर ध्यान रखे या इन नकली सामान बेचने वालों की खबर ले। देखा ये भी जा रहा है कि नकली उत्पाद की फैक्ट्रियां छुटभैये नेताओं की होती है या ये फैक्ट्री वाले इन छुटभैये नेताओं से नज़दीकी बना कर रखते हैं ताकि समय पर ये इन अवैध गतिविधियों को संचालित करने में इनकी मदद करें। छोटे शहरों के छुटभैये नेता अपने शहर के मुख्यमंत्री से कम नहीं होते, चाहे वह पार्षद हो या वार्ड का छोटा-मोटा नेता क्यों ना हो। इन्ही के संरक्षण में या ये खुद इन कामों को संचालित करते हैं। जिनके गिरेबान तक स्थानीय पुलिस के हाथ पहुंचने में ही कांपने लगते हैं।

असली नकली की पहचान करना मुश्किल

किसी भी बड़ी कंपनी की पहचान उसका लोगो होता है। ऐसे में अगर आप कोई कंपनी का प्रोडक्ट खरीद रहे हैं तो उस कंपनी के लोगो को ध्यान से देखें। क्योंकि, कोई भी कंपनी अपने लोगो को इस तरह बनाती है जिसे कॉपी करना आसान नहीं होता है। अगर आप कंपनी के लोगो के हर बारीकियों पर ध्यान से देखेंगे तो आपको उस प्रोडक्ट के असलियत के बारे में पता चल जाएगा। आप किसी भी प्रोडक्ट को खरीदने से पहले उस प्रोडक्ट के पैकेजिंग पर जरूर ध्यान दें। क्योंकि, बड़ी कंपनियों अपने पैकेजिंग पर खासा ध्यान रखती हैं। राजधानी सहित समूचे छत्तीसगढ़ में ब्रांडेड कंपनियों के नकली उत्पाद धड़ल्ले से बिक रहे हैं। न सिर्फ नकली प्रोडक्ट बिक रहे बल्कि इन नकली उत्पादों का निर्माण व पैकेजिंग भी छत्तीसगढ़ विभिन्न शहरों में ही हो रहा है। राज्य के खाद्य एवं औषधि व उपभोक्ता संरक्षण विभाग की उदासीनता से खाद्य पदार्थों से लेकर ब्रांडेड कंपनियों के इलेक्ट्रानिक्स, फैब्रिक्स, कास्मेटिक वस्तुओं के नकली उत्पाद राज्य में आसानी बेचे व बनाए जा रहे हैं।

भाटापारा-बिलासपुर नकली उत्पाद का मुख्य केंद्र

राज्य के रायपुर, तिल्दा, भाटापारा, चकरभाठा, भिलाई-दुर्ग, रायगढ़, चांपा, धमतरी, बिलासपुर में नकली उत्पाद बनाने के कुटीर उद्योग चल रहे हैं। कई फैक्ट्रियां भी हैं जहां ब्रांडेड कंपनियों के हूबहू प्रोडक्ट तैयार और पैकेजिंग किए जाते हैं। संबंधित विभाग यदाकदा कार्रवाई कर गोदामों में दबिश देती है तब कहीं नकली उत्पाद जब्त होते हैं, लेकिन व्यापारिक संगठनों और राजनीतिक दलों के छुटभैये नेताओं के दबाव में मामले दबा दिए जाते हैं। जिससे नकली उत्पाद बनाने और बेचने वालों के हौसले बुलंद हैं। नकली व प्रतिबंधित दवाएं भी धड़ल्ले से बिक रही राजधानी में प्रतिबंधित दवाओं का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। विभिन्न अस्पतालों के आसपास ऐसी दवाएं बिना डॉक्टर के पर्चे के बेची जा रही है। हालांकि, रसीद मांगने पर दवाएं नहीं दी जाएंगी। वहीं, यह सब जानते हुए भी प्रशासन चुप्पी साधे हुए है। जनता से रिश्ता ने शुरू से ही नकली सामानों के अलावा शराब, गांजा, भांग, चरस और नशीली वस्तुओं के खिलाफ मुहिम चलाया हुआ है। ब्रांडेड कंपनियों के नाम से नकली वस्तुओं के उत्पादन और बिक्री करने वालों के खिलाफ पुलिस अब छत्तीसगढ़ तमाम डुप्लीकेट कंपनियों की कुंडली खंगालने का काम शुरू कर दिया है। उसके बावजूद नकली सामानों का कारोबार कम होने का नाम नहीं ले रहा है।देश की नामचीन और बड़ी कंपनियों के नाम पर नकली उत्पाद का राजधानी रायपुर गढ़ बन चुका है। सारे नकली सामान आसपास के इलाके से ही यहाँ लाया जाता है, यहां पर सक्रिय सिंडिकेट बड़ी कंपनियों के उत्पादों के हू-ब-हू नकली उत्पाद तैयार कर प्रदेश भर के बड़े बाजारों से लेकर गांव-कस्बों में इसे सस्ते दाम पर खपाया जा रहा है। दुकानदार जहां मोटे कमीशन के लालच में ये सामान बेच रहे हैं, वहीं नकली से अनजान ग्राहक भी कम कीमत पर सामान पाकर खुश हैं। दरअसल रायपुर में पिछले साल हिंदुस्तान यूनिलीवर कंपनी के क्रीम व चायपत्ती का जखीरा मिलने के बाद यह साबित हो गया। छत्तीसगढ़ में नकली खाद्य सामग्री, कास्मेटिक से लेकर सारा घरेलू सामान आसानी से खपाया जा रहा है। करोड़ों-अरबों का कारोबार रायपुर समेत प्रदेश भर में ब्रॉडेड कंपनी के नाम पर नकली सामान खपाने का कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है। अकेले रायपुर में हर महीने करोड़ों के इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण, कास्मेटिक, खाद्य सामग्री, कपड़े समेत अन्य सामान खपाया जा रहा है।

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