छत्तीसगढ़
माओवादियों का ऐतिहासिक आत्मसमर्पण, 103 नक्सलियों ने छोड़ा हथियार
Shantanu Roy
2 Oct 2025 7:16 PM IST

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छग
Bijapur. बीजापुर। छत्तीसगढ़ में नक्सल उन्मूलन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए आज बीजापुर जिले में 103 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया। इसे प्रदेश के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा आत्मसमर्पण माना जा रहा है। समर्पण करने वाले नक्सलियों में संगठन के कई बड़े नेता और पदाधिकारी शामिल हैं। इन सभी पर कुल 1 करोड़ 6 लाख 30 हजार रुपये का इनाम घोषित था। समर्पण करने वाले माओवादियों को शासन की नवीन पुनर्वास नीति के तहत 50-50 हजार रुपये का चेक प्रोत्साहन राशि स्वरूप दिया गया। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें समाज की मुख्यधारा में वापस स्वागत करते हुए उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
आत्मसमर्पण में शामिल बड़े माओवादी नेता
इस बड़े आत्मसमर्पण में संगठन के कई वरिष्ठ और प्रभावशाली पदाधिकारी शामिल हैं –
डीव्हीसीएम – 01
पीपीसीएम – 04
एसीएम – 04
प्लाटून पार्टी सदस्य – 01
डीएकेएमएस अध्यक्ष – 03
सीएनएम अध्यक्ष – 04
केएएमएस अध्यक्ष – 02
एरिया कमेटी पार्टी सदस्य – 05
मिलिशिया कमांडर/डिप्टी कमांडर – 05
जनताना सरकार अध्यक्ष – 04
पीएलजीए सदस्य – 01
सीएनएम सदस्य – 12
जनताना सरकार उपाध्यक्ष – 04
डीएकेएमएस उपाध्यक्ष – 01
जनताना सरकार सदस्य – 22
मिलिशिया प्लाटून सदस्य – 23
जीपीसी – 02
डीएकेएमएस सदस्य – 04
भूमकाल मिलिशिया सदस्य – 01
कुल मिलाकर 49 इनामी माओवादी समेत 103 नक्सलियों ने हथियार छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का फैसला लिया।
माओवादियों की घटती ताकत : आंकड़ों से तस्वीर साफ
आंकड़े बताते हैं कि बस्तर और दक्षिण छत्तीसगढ़ में नक्सल संगठन की पकड़ तेजी से कमजोर हो रही है।
01 जनवरी 2025 से अब तक –
421 माओवादी गिरफ्तार
410 माओवादी आत्मसमर्पण
137 माओवादी मुठभेड़ों में मारे गए
01 जनवरी 2024 से अब तक –
924 माओवादी गिरफ्तार
599 माओवादी आत्मसमर्पण
195 माओवादी मारे गए
ये आंकड़े साफ दर्शाते हैं कि पिछले दो वर्षों में नक्सल संगठन लगातार कमजोर हुआ है और बड़ी संख्या में उनके कार्यकर्ता व नेता आत्मसमर्पण कर समाज की ओर लौट रहे हैं।
आत्मसमर्पण के प्रमुख कारण
माओवादियों के आत्मसमर्पण के पीछे कई अहम कारण सामने आए हैं –
विकास कार्यों की गति – सुदूरवर्ती इलाकों में सड़क निर्माण, बिजली, स्वास्थ्य सुविधाएं और शिक्षा की पहुंच ने आदिवासी समाज को नक्सली विचारधारा से दूर किया।
संगठन से मोहभंग – आंतरिक मतभेद, विश्वास की कमी और अपेक्षित बदलाव न मिलने से कई माओवादी निराश हुए।
शीर्ष नेताओं का मारा जाना या समर्पण – संगठन में लगातार बड़े नेताओं की मौत या आत्मसमर्पण ने शेष कैडर का मनोबल तोड़ा।
अनिश्चित भविष्य और शोषण – संगठन के भीतर क्रूर व्यवहार और शोषण से तंग आकर कार्यकर्ता बाहर आने को मजबूर हुए।
सुरक्षा बलों की सक्रियता – डीआरजी, बस्तर फाइटर, एसटीएफ और सीआरपीएफ की विभिन्न बटालियनों की संयुक्त कार्रवाई ने संगठन पर दबाव बनाया।
सुरक्षाबलों का योगदान
आत्मसमर्पण प्रक्रिया में डीआरजी, बस्तर फाइटर, एसटीएफ, केरिपु 22, केरिपु 85, केरिपु 168, केरिपु 199, केरिपु 222 और कोबरा 201, 202, 206, 210 बटालियनों की विशेष भूमिका रही।
पुनर्वास नीति : नई जिंदगी की ओर कदम
छत्तीसगढ़ शासन की नवीन पुनर्वास नीति ने माओवादियों को नई राह दिखाई है।
समर्पण करने वालों को ₹50,000 की प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
उन्हें शिक्षा, रोजगार और पुनर्स्थापन की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
परिवार और समाज से जुड़ने के लिए विशेष पहल की जाती है।
पुलिस अधीक्षक की अपील
बीजापुर के पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेंद्र कुमार यादव ने माओवादियों से अपील की कि वे शासन की पुनर्वास नीति का लाभ उठाकर शांतिपूर्ण और सम्मानजनक जीवन जिएं। उन्होंने कहा- “सरकार की पुनर्वास नीति माओवादियों को आकर्षित कर रही है। आत्मसमर्पण करने वालों के परिजन भी चाहते हैं कि वे सामान्य जीवन जिएं और समाज के साथ कदम से कदम मिलाकर चलें। इसलिए मैं बाकी माओवादियों से भी अपील करता हूं कि वे भ्रामक विचारधाराओं को त्यागकर मुख्यधारा से जुड़ें।
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