छत्तीसगढ़

भारतीय रेलवे में ऐतिहासिक सुरक्षा सुधार, रेल दुर्घटनाओं में 90% तक कमी

Shantanu Roy
18 April 2026 12:24 AM IST
भारतीय रेलवे में ऐतिहासिक सुरक्षा सुधार, रेल दुर्घटनाओं में 90% तक कमी
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New Delhi. नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने पिछले एक दशक में सुरक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधार दर्ज किए हैं, जिससे रेल यात्राएं पहले से कहीं अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बन गई हैं। बेहतर ट्रैक व्यवस्था, विश्वस्तरीय रखरखाव, उन्नत मॉनिटरिंग सिस्टम और बड़े पैमाने पर तकनीकी सुधारों ने देशभर में रेल दुर्घटनाओं को काफी हद तक कम कर दिया है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि “सुरक्षा केवल तकनीकी मानक नहीं, बल्कि जन-विश्वास का विषय है।” रेलवे मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2014 के बाद से सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है, जिसके परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं।
गंभीर रेल दुर्घटनाओं (कॉन्सीक्वेंशियल ट्रेन एक्सीडेंट्स) में 2014-15 की तुलना में 2025-26 तक लगभग 89 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। वहीं, कॉन्सीक्वेंशियल एक्सीडेंट इंडेक्स 0.11 से घटकर 0.01 पर पहुंच गया है, जो वैश्विक स्तर पर भी अत्यंत बेहतर माना जा रहा है। रेल मंत्रालय ने बताया कि रेल फ्रैक्चर में 92 प्रतिशत और वेल्ड फेलियर में 93 प्रतिशत तक की कमी आई है। इसका प्रमुख कारण 60 किलोग्राम भारी रेल, लॉन्ग वेल्डेड पैनल, आधुनिक अल्ट्रासोनिक फ्लॉ डिटेक्शन और नियमित ट्रैक मॉनिटरिंग है। इससे ट्रैक की मजबूती बढ़ी है और दुर्घटनाओं का खतरा काफी कम हुआ है।
सुरक्षा सुधारों में ‘कवच’ प्रणाली को सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है। यह स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है, जो सिग्नल मिस होने या ओवरस्पीड की स्थिति में स्वतः ट्रेन को नियंत्रित कर देता है। कवच 4.0 को दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा जैसे प्रमुख मार्गों पर लागू किया जा चुका है। कोहरे और कम दृश्यता वाले क्षेत्रों में सुरक्षा के लिए 30,000 से अधिक जीपीएस आधारित फॉग सेफ्टी डिवाइस लगाए गए हैं, जो लोको पायलटों को रियल टाइम जानकारी प्रदान करते हैं। इससे कोहरे में होने वाली दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है।
मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है और देशभर में 14,000 से अधिक रोड ओवरब्रिज और अंडरपास बनाए गए हैं। इससे सड़क और रेल दोनों स्तरों पर सुरक्षा में बड़ा सुधार हुआ है। रेलवे ने रोलिंग स्टॉक में भी बड़े बदलाव किए हैं। 2014 से अब तक 42,600 से अधिक एलएचबी कोच तैयार किए गए हैं, जो दुर्घटना की स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में 1,674 इंजनों और 6,677 एलएचबी कोच का निर्माण किया गया। इसके अलावा, लगभग 4,000 रेलवे स्टेशन अब पूरी तरह डिजिटल हो चुके हैं, जिससे संचालन और निगरानी प्रणाली अधिक मजबूत हुई है।
रेलवे सुरक्षा बजट भी 2013-14 के ₹39,200 करोड़ से बढ़कर 2025-26 में ₹1,17,693 करोड़ और 2026-27 के लिए ₹1,20,389 करोड़ तक पहुंच गया है। यह तीन गुना से अधिक वृद्धि सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने को दर्शाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इन सुधारों के चलते भारतीय रेलवे अब दुनिया के सबसे सुरक्षित रेल नेटवर्कों में शामिल हो चुका है। अश्विनी वैष्णव ने कहा कि रेलवे का लक्ष्य केवल विस्तार नहीं, बल्कि हर यात्री की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि अब प्रणाली ऐसी बन चुकी है जो दुर्घटनाओं पर प्रतिक्रिया देने के बजाय उन्हें रोकने पर केंद्रित है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा सुधारों का सबसे बड़ा प्रभाव यह है कि अब हादसों की संख्या में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है, जिससे करोड़ों यात्रियों का भरोसा भारतीय रेल पर और मजबूत हुआ है।
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