छत्तीसगढ़

तेज रफ्तार कार ने बाइक को उड़ाया, दो युवक घायल

Nilmani Pal
21 Jan 2026 11:29 AM IST
तेज रफ्तार कार ने बाइक को उड़ाया, दो युवक घायल
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बिलासपुर। मंगलवार देर रात इंदु चौक पर एक भीषण सड़क हादसा हो गया। इस दुर्घटना में बाइक सवार दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मगरपारा चौक की ओर से आ रही तेज रफ्तार कार ने मंदिर चौक की दिशा से आ रहे बाइक सवार युवकों को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी तेज थी कि दोनों युवक सड़क पर दूर जा गिरे। हादसे के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। सूचना मिलते ही पुलिस और डायल 112 की टीम मौके पर पहुंची और घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया। फिलहाल घायलों की पहचान नहीं हो पाई है।

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मैक्स लाइफ इंश्योरेंस को देना होगा एक करोड़ से अधिक का हर्जाना

बिलासपुर जिला उपभोक्ता फोरम ने मैक्स लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के खिलाफ निर्णय सुनाते हुए उपभोक्ताके पक्ष में आदेश पारित किया है। बीमा कंपनी के खिलाफ एक करोड़ से अधिक का हर्जाना देने का आदेश दिया गया है। फैसले में बीमा कंपनी द्वारा मृत्यु दावा निरस्त किए जाने को सेवा में कमी माना गया है। जिला उपभोक्ता फोरम के सदस्य आलोक पाण्डेय ने बताया कि शिकायतकर्ता कौशल प्रसाद कौशिक ने अपनी पत्नी स्व. शैल कौशिक के नाम मैक्स लाइफ प्लेटिनम वेल्थ प्लान के अंतर्गत 1 करोड़ रुपए की जीवन बीमा पॉलिसी ली थी। उस पॉलिसी की शुरूआत 27 मई 2020 से हुई थी। वार्षिक प्रीमियम 10 लाख रुपए निर्धारित किया गया था। बीमा जारी करने से पहले बीमित महिला का समुचित चिकित्सीय परिक्षण भी कराया गया था। जिसमें उन्हें स्वस्थ बताया गया। 21 सितंबर 2020 को शैल कौशिक को कोविड 19 संक्रमण के चलते अपोलो हास्पिटल बिलासपुर में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान 11 अक्टूबर 2020 को उनकी मृत्यु हो गई। इसके पश्चात शिकायतकर्ता ने सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ बीमा कंपनी के समक्ष मृत्यु दावा प्रस्तुत किया। कंपनी ने यह कहते हुए दावा अस्वीकार कर दिया कि बीमित ने प्रस्ताव पत्र भरते समय अपनी पूर्व की गंभीर बीमारियों की जानकारी छिपाई थी।

बीमा कंपनी का दावा था कि वर्ष 2016 से बीमित महिला हृदय रोग, डायबिटीज एवं अन्य बीमारियों से पीड़ित थी। जो प्रस्ताव पत्र में उल्लेखित नहीं की गई। शिकायतकर्ता का कहना था कि बीमा कंपनी द्वारा स्वयं मेडिकल परिक्षण कराया गया था और उस समय किसी भी प्रकार की गंभीर बीमारी नहीं पाई गई थी। साथ ही मृत्यु का प्रत्यक्ष कारण कोविड – 19 संक्रमण था, न कि कोई कथित पूर्व बीमारी। दोनों पक्षों की दलीले सुनने और अभिलेखों का अवलोकन करने के बाद आयोग ने पाया कि बीमा कंपनी यह प्रमाणित करने में असफल रही कि कथित बीमारियां पॉलिसी जारी होने से 8 माह के भीतर सक्रिय थी। आयोग ने यह भी माना कि बिना ठोस आधार के दावा निरस्त करना उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत सेवा में कमी है। आयोग ने मैक्स लाइफ इंश्योरेंस कंपनी को निर्देश दिया है कि वह शिकायकर्ता को बीमा राशि एक करोड़ 9 प्रतिशत ब्याज और 25 हजार रुप मानसिक क्षतिपूर्ति व 5 हजार रुपए वादव्यय अदा करे।

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