छत्तीसगढ़

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: रिटायर कर्मचारी की GPF से 6 माह बाद वसूली का आदेश रद्द

Shantanu Roy
7 Feb 2026 8:49 PM IST
हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: रिटायर कर्मचारी की GPF से 6 माह बाद वसूली का आदेश रद्द
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Bilaspur. बिलासपुर। बिलासपुर हाई कोर्ट जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की सिंगल बेंच ने रिटायर कर्मचारियों के लिए राहतपूर्ण फैसला सुनाया है। छत्तीसगढ़ के पामगढ़ निवासी लक्ष्मीनारायण तिवारी, जो छत्तीसगढ़ के ससहा में शासकीय उच्चतर माध्यमिक स्कूल में व्याख्याता के पद पर कार्यरत थे, ने रिटायरमेंट के 12 साल बाद उनके सामान्य भविष्य निधि (GPF) से वसूली आदेश जारी किए जाने को चुनौती दी। लक्ष्मीनारायण तिवारी 31 जनवरी 2011 को 62 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर सेवानिवृत्त हुए थे। सेवानिवृत्ति के 12 वर्ष बाद कार्यालय महालेखाकार, रायपुर ने उनके GPF खाते में ऋणात्मक शेष दर्शाते हुए वसूली आदेश जारी किया। इस आदेश को चुनौती देते हुए तिवारी ने अधिवक्ता अभिषेक पांडेय एवं ऋषभदेव साहू के माध्यम से हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की।

सुनवाई के दौरान अधिवक्ता अभिषेक पांडेय ने जबलपुर हाई कोर्ट के एक फैसले तथा छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट बिलासपुर द्वारा पारित न्याय दृष्टांतों का हवाला दिया। इनमें डीआर. मण्डावी बनाम छ.ग. शासन एवं अन्य और हृदयनारायण शुक्ला बनाम छ.ग. शासन एवं अन्य के मामले शामिल हैं, जिनमें स्पष्ट रूप से यह स्थापित किया गया है कि सेवानिवृत्ति के बाद सामान्य भविष्य निधि से वसूली के लिए 6 माह की समयसीमा निर्धारित है। अधिवक्ता पांडेय ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा पेंशन नियम, 1976 के नियम 65 का हवाला देते हुए बताया कि किसी भी शासकीय अधिकारी या कर्मचारी के GPF में ऋणात्मक शेष होने पर, वसूली केवल सेवानिवृत्ति की तिथि से छह माह के भीतर ही की जा सकती है। इसके बाद GPF राशि से किसी भी प्रकार की वसूली का प्रावधान नहीं है।

हाई कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई के बाद कार्यालय महालेखाकार, रायपुर द्वारा लक्ष्मीनारायण तिवारी के खिलाफ जारी वसूली आदेश को रद्द कर दिया। इस फैसले से न केवल तिवारी को राहत मिली है, बल्कि सभी रिटायर कर्मचारियों के लिए भी यह एक अहम उदाहरण बन गया है कि रिटायरमेंट के छह माह बाद GPF से किसी भी प्रकार की वसूली नहीं की जा सकती। हाई कोर्ट के इस निर्णय से सरकारी कर्मचारियों को उनके भविष्य निधि अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि नियमों का उल्लंघन कर वसूली करना अनुचित और अवैध है। यह फैसला कर्मचारियों में विश्वास और सुरक्षा की भावना बढ़ाने के साथ-साथ प्रशासनिक अनुशासन को भी मजबूती प्रदान करता है। अधिवक्ता पांडेय ने कहा कि यह फैसला कर्मचारी वर्ग के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगा और भविष्य में किसी भी गैरकानूनी वसूली के प्रयासों पर रोक लगायेगा। साथ ही, यह कर्मचारियों को अपने GPF अधिकारों के प्रति जागरूक भी करेगा।
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