छत्तीसगढ़
पर्यावरण प्रदूषण मामले में हाईकोर्ट सख्त, स्वतंत्र निरीक्षण के आदेश
Shantanu Roy
20 May 2026 6:48 PM IST

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छग
Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में पर्यावरण प्रदूषण, जल स्रोतों के दूषित होने और सुरक्षा मानकों के कमजोर क्रियान्वयन को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने स्वतः संज्ञान लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। कोर्ट ने प्रदेश की तीन बड़ी डिस्टिलरी के स्वतंत्र निरीक्षण के लिए दो अधिवक्ताओं को कोर्ट कमिश्नर नियुक्त किया है।
हाईकोर्ट ने अधिवक्ता वैभव शुक्ला और अपूर्वा त्रिपाठी को भाटिया वाइन मर्चेंट्स प्राइवेट लिमिटेड, वेलकम डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड और छत्तीसगढ़ डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड का निरीक्षण करने की जिम्मेदारी सौंपी है। इन कोर्ट कमिश्नरों को पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन और वास्तविक स्थिति का स्वतंत्र रूप से आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं। डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि पर्यावरणीय मानकों के पालन को लेकर लगातार गंभीर चिंताएं सामने आ रही हैं, विशेषकर औद्योगिक इकाइयों से जुड़े मामलों में। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर नियमित निगरानी जरूरी है और किसी भी तरह की लापरवाही को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण बोर्ड ने अदालत को बताया कि भाटिया वाइन मर्चेंट्स और छत्तीसगढ़ डिस्टिलरीज में किए गए निरीक्षणों के दौरान परिसर के बाहर अनुपचारित अपशिष्ट जल के निर्वहन की कोई स्थिति नहीं पाई गई। बोर्ड ने यह भी कहा कि इन इकाइयों में निगरानी प्रणाली के मापदंड निर्धारित सीमा के भीतर पाए गए हैं। हालांकि, वेलकम डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड को लेकर बोर्ड की रिपोर्ट अधिक गंभीर रही। रिपोर्ट में बार-बार नियमों के उल्लंघन की बात कही गई है, जिसमें निष्क्रिय अपशिष्ट जल उपचार प्रणाली, दूषित जल का निर्वहन, क्षतिग्रस्त लैगून, अत्यधिक उत्सर्जन और ऑनलाइन निगरानी डेटा में विसंगतियां शामिल हैं। इस स्थिति को देखते हुए नवंबर 2025 में संबंधित इकाई पर 54.60 लाख रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया था और बंद करने के निर्देश भी जारी किए गए थे।
हाईकोर्ट ने सभी शपथपत्रों और उपलब्ध रिकॉर्ड का अध्ययन करने के बाद कहा कि केवल विभागीय रिपोर्ट पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है और स्वतंत्र तथ्यात्मक सत्यापन आवश्यक है। इसी आधार पर कोर्ट कमिश्नरों की नियुक्ति की गई है। डिवीजन बेंच ने निर्देश दिया है कि नियुक्त दोनों अधिवक्ता पर्यावरण संरक्षण बोर्ड के अधिकारियों के साथ मिलकर संबंधित डिस्टिलरी का निरीक्षण करेंगे। उन्हें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि इकाइयों द्वारा किए जा रहे अनुपालन दावों की वास्तविक स्थिति क्या है।
कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि 30 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए, जिसमें सभी पर्यावरणीय पहलुओं का तथ्यात्मक विवरण शामिल हो। इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। इस आदेश को राज्य में पर्यावरण नियंत्रण और औद्योगिक इकाइयों की जवाबदेही के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के स्वतंत्र निरीक्षण से पर्यावरणीय मानकों के पालन में पारदर्शिता बढ़ेगी। फिलहाल मामला हाईकोर्ट की निगरानी में है और सभी संबंधित पक्षों को आदेशों के पालन के निर्देश दिए गए हैं।
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