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Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य आयुर्वेदिक, यूनानी एवं प्राकृतिक चिकित्सा परिषद के चुनाव की प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं की मुख्य आपत्ति चुनाव कराए जाने को लेकर नहीं है, बल्कि बैलेट पेपर की डिजाइन, मतदान की गोपनीयता और चुनाव सामग्री की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी हुई है। अदालत ने चुनाव प्रक्रिया को जारी रखने की अनुमति देते हुए याचिका का निराकरण कर दिया।
जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ में डॉ. सुरेंद्र मिश्रा सहित तीन पंजीकृत आयुर्वेदिक चिकित्सकों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं ने परिषद के चुनाव की प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर सवाल उठाते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाने का आधार नहीं बनता है। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव के दौरान यदि कानून या निर्धारित नियमों के विपरीत कोई कृत्य अथवा चूक सामने आती है तो संबंधित पक्ष सक्षम प्राधिकारी के समक्ष जाकर उचित कार्रवाई की मांग कर सकता है।
बैलेट पेपर के सीरियल नंबर पर जताई आशंका
याचिकाकर्ताओं की प्रमुख आपत्तियों में बैलेट पेपर की डिजाइन शामिल थी। उनका कहना था कि बैलेट पेपर पर सीरियल नंबर मौजूद होने के कारण मतदाता की पहचान किए जाने की संभावना पैदा हो सकती है। उन्होंने इसे मतदान की गोपनीयता से जोड़ते हुए चुनाव प्रक्रिया में पर्याप्त सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने की मांग की थी। याचिकाकर्ताओं ने मतदान के बाद बैलेट पेपर को सुरक्षित रखने की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि मतदान पूरा होने के बाद बैलेट पेपर किस अधिकारी को प्राप्त हुए, उन्हें कहां और किस तरीके से सुरक्षित रखा गया तथा इस पूरी प्रक्रिया का सत्यापन योग्य रिकॉर्ड होना चाहिए। इससे चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतपत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।
रिटर्निंग ऑफिसर की भूमिका पर भी सवाल
याचिका में रिटर्निंग ऑफिसर की भूमिका को लेकर भी आपत्ति जताई गई। याचिकाकर्ताओं के अनुसार रिटर्निंग ऑफिसर स्वयं एक पंजीकृत आयुर्वेदिक चिकित्सक हैं और परिषद के चुनाव में मतदाता भी हैं। इसी आधार पर उनकी भूमिका को लेकर सवाल उठाया गया था। बताया गया कि हाईकोर्ट में याचिका दायर करने से पहले भी याचिकाकर्ताओं ने अपनी आपत्तियां संबंधित अधिकारियों के सामने रखी थीं। रिटर्निंग ऑफिसर के साथ ही आयुष विभाग के अधिकारियों को भी चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी चिंताओं से अवगत कराया गया था।
आपत्ति पर कदम उठाए जाने की दी जानकारी
मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता आरएस मरहास ने अदालत को बताया कि एक याचिकाकर्ता की ओर से प्रस्तुत की गई आपत्ति पर आवश्यक कदम पहले ही उठाए जा चुके हैं। वहीं राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता आनंद दादस्या ने पक्ष रखते हुए कहा कि परिषद का चुनाव संबंधित अधिनियम और निर्धारित नियमों के अनुसार ही कराया जाएगा। दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत के इस आदेश के बाद राज्य आयुर्वेदिक, यूनानी एवं प्राकृतिक चिकित्सा परिषद के चुनाव की प्रक्रिया फिलहाल जारी रह सकेगी। साथ ही अदालत ने नियमों के उल्लंघन की स्थिति में सक्षम प्राधिकारी के समक्ष उचित कार्रवाई की मांग करने का रास्ता भी खुला रखा है।
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