छत्तीसगढ़

निलंबित एसडीएम तुलसीदास मरकाम को हाईकोर्ट से अंतरिम राहत

Shantanu Roy
31 Jan 2026 9:43 PM IST
निलंबित एसडीएम तुलसीदास मरकाम को हाईकोर्ट से अंतरिम राहत
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Gariaband. गरियाबंद। छत्तीसगढ़ में सियासी और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचाने वाले उरमाल ओपेरा विवाद मामले में निलंबित एसडीएम तुलसीदास मरकाम को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने निलंबन आदेश पर अंतरिम राहत देते हुए राज्य सरकार से 10 दिनों के भीतर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की गई है। गौरतलब है कि 16 जनवरी 2026 को बस्तर संभाग आयुक्त महादेव कावरे ने डिप्टी कलेक्टर एवं एसडीएम तुलसीदास मरकाम को अश्लील डांस कार्यक्रम से जुड़े विवाद के बाद निलंबित करने का आदेश जारी किया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए तुलसीदास मरकाम ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
हाईकोर्ट ने निलंबन आदेश पर उठाए सवाल
29 जनवरी को हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना कि निलंबन से पहले याचिकाकर्ता का पक्ष सुने बिना कार्रवाई की गई है। तुलसीदास मरकाम की ओर से दलील दी गई कि वे राज्य सरकार के अधीन अधिकारी हैं और उनके खिलाफ बिना सुनवाई के कमिश्नर स्तर से कार्रवाई नियमों के विपरीत है। कोर्ट ने इस दलील को गंभीरता से लेते हुए निलंबन आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया।
अंतरिम राहत के बाद कुर्सी पर वापसी
हाईकोर्ट से राहत मिलने के अगले ही दिन तुलसीदास मरकाम मैनपुर स्थित अनुविभागीय कार्यालय पहुंचे और पुनः कार्यभार संभाल लिया। इसके बाद उन्होंने कमिश्नर और कलेक्टर को संबोधित करते हुए एक पत्र लिखा, जिसमें हाईकोर्ट में दायर याचिका क्रमांक और अंतरिम राहत की जानकारी दी गई। यह पत्र कार्यालय में बैठकर लिखा गया, जिसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई। कई लोगों ने इसे अपने मोबाइल स्टेटस में भी लगाया।
सोशल मीडिया में वायरल हुई वापसी
एसडीएम तुलसीदास मरकाम की वापसी को लेकर सोशल मीडिया पर अलग ही माहौल देखने को मिला। कई शुभचिंतकों और समर्थकों ने अधिकारी की तस्वीरें साझा करते हुए “ये तो ट्रेलर है, पिक्चर अभी बाकी है” जैसे संवाद और गानों के साथ पोस्ट वायरल किए। इससे प्रशासनिक गलियारों में चर्चाओं का दौर और तेज हो गया है।
प्रशासन और राजनीति में हलचल
उरमाल ओपेरा प्रकरण पहले ही राजनीतिक तूल पकड़ चुका है। अब हाईकोर्ट से मिली राहत और उसके बाद कार्यालय में वापसी ने इस मामले को और संवेदनशील बना दिया है। जानकारों का मानना है कि राज्य सरकार द्वारा पेश किए जाने वाले जवाब के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि निलंबन आदेश टिकेगा या रद्द किया जाएगा। फिलहाल, हाईकोर्ट की अंतरिम राहत ने तुलसीदास मरकाम को बड़ी प्रशासनिक और कानूनी संजीवनी दे दी है, जबकि राज्य सरकार के लिए यह मामला अब प्रतिष्ठा से भी जुड़ता नजर आ रहा है।
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