छत्तीसगढ़
हेरोइन तस्करी के आरोपी को 6 वर्ष जेल और 60 हज़ार रुपये जुर्माने की सजा
Shantanu Roy
8 Oct 2025 10:50 PM IST

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छग
Raipur. रायपुर। रायपुर की विशेष न्यायाधीश एनडीपीएस पंकज कुमार सिन्हा की अदालत ने निशांत सिंह संधू (24 वर्ष, निवासी बालाजी ग्रीन सिटी, सोनडोंगरी) को एनडीपीएस धारा 21(बी) के तहत हेरोइन तस्करी के मामले में 6 वर्ष कठोर कारावास और 60,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। मामला 24 सितंबर 2023 की रात का है, जब थाना कबीर नगर पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि यदुवंशी चौक के पास एक युवक अवैध रूप से हेरोइन बेचने की कोशिश कर रहा है। सूचना मिलने पर पुलिस ने तत्काल मौके पर पहुंचकर निशांत सिंह संधू को पकड़ लिया।
तलाशी के दौरान आरोपी की मोटरसाइकिल के वाइजर से 15.10 ग्राम हेरोइन (चिट्टा) बरामद हुई। पुलिस ने हेरोइन को जप्त कर आरोपी को गिरफ्तार कर एनडीपीएस अदालत में पेश किया। अदालत में सरकारी पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक के.के. चंद्राकर ने कहा कि आरोपी के पास से मिली हेरोइन का कोई वैध लाइसेंस या दस्तावेज नहीं था। रासायनिक परीक्षण में यह पदार्थ हेरोइन पाया गया। दूसरी ओर, बचाव पक्ष की ओर से वकील सुश्री नूर अफरोज़ ने अदालत से अनुरोध किया कि यह आरोपी का पहला अपराध है, इसलिए सजा में नरमी बरती जाए।
दोनों पक्षों की दलीलों के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया और उसे 6 वर्ष के कठोर कारावास और 60,000 रुपये अर्थदंड से दंडित किया। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि अर्थदंड का भुगतान न करने की स्थिति में आरोपी को 6 माह अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इस निर्णय के साथ यह स्पष्ट संदेश गया है कि रायपुर में मादक पदार्थों की तस्करी के मामलों में कड़ी कार्रवाई की जाएगी। एनडीपीएस कानून के तहत न केवल अवैध मादक पदार्थों की तस्करी पर रोक लगाई जा रही है, बल्कि दोषियों के खिलाफ कठोर सजा सुनाकर सुनियोजित तस्करी नेटवर्क को कमजोर किया जा रहा है।
पुलिस ने मामले में यह भी बताया कि हेरोइन जैसी खतरनाक मादक वस्तु के अवैध व्यापार को रोकने के लिए लगातार निगरानी और विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। इस गिरफ्तारी और न्यायालय के निर्णय से स्थानीय स्तर पर अवैध मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल अन्य व्यक्तियों के लिए चेतावनी भी गई है। विशेष न्यायाधीश की अदालत ने सजा सुनाते समय कहा कि हेरोइन जैसी मादक वस्तु न केवल व्यक्ति बल्कि समाज के लिए भी अत्यंत हानिकारक है। ऐसे अपराधों में न केवल अपराधियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय होती है, बल्कि सामाजिक सुरक्षा और युवाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी कठोर कार्रवाई आवश्यक है। इस प्रकार, निशांत सिंह संधू को कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाए जाने से यह मामला एनडीपीएस कानून के तहत कानूनी सख्ती और न्यायिक प्रणाली की कार्यक्षमता का उदाहरण बन गया है।
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