छत्तीसगढ़

हाईकोर्ट में चैतन्य बघेल की याचिका पर सुनवाई जारी, ईडी अपना पक्ष पेश करेगी

Shantanu Roy
26 Aug 2025 6:28 PM IST
हाईकोर्ट में चैतन्य बघेल की याचिका पर सुनवाई जारी, ईडी अपना पक्ष पेश करेगी
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Bilaspur. बिलासपुर। बिलासपुर। प्रदेश में हुए शराब घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल की याचिका पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में सुनवाई जारी है। आज याचिकाकर्ता पक्ष की बहस पूरी हो गई है और अब आगामी सुनवाई में ईडी (Enforcement Directorate) अपना पक्ष रखेगा। मामले की अगली सुनवाई 2 सितंबर 2025 को निर्धारित की गई है। चैतन्य बघेल ने अपनी गिरफ्तारी और हिरासत को असंवैधानिक बताते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्हें 18 जुलाई 2025 को भिलाई से
ईडी
ने गिरफ्तार किया था। इससे पहले चैतन्य ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी गिरफ्तारी को चुनौती दी थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया और हाईकोर्ट में अपील करने का निर्देश दिया। अब सिंगल बेंच में जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा इस मामले की सुनवाई कर रहे हैं।
सुनवाई से पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कस्टोडियल रिमांड समाप्त होने पर 23 अगस्त को चैतन्य बघेल को कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने उन्हें तीसरी बार 14 दिन की न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा। अब इस मामले में 6 सितंबर को अगली सुनवाई तय की गई है। ईडी के अनुसार, 21 जुलाई को जारी प्रेस नोट में बताया गया कि चैतन्य बघेल को PMLA, 2002 के तहत गिरफ्तार किया गया था। शराब घोटाले की जांच भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत की गई। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि प्रदेश के खजाने को भारी नुकसान हुआ और लगभग 2,500 करोड़ रुपये की अवैध कमाई (POC) घोटाले से जुड़े लाभार्थियों की जेब में पहुंचाई गई।
ईडी की जांच में यह भी पता चला कि चैतन्य बघेल को 16.70 करोड़ रुपये की POC प्राप्त हुई थी। उन्होंने इसे अपने रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में निवेश किया और ठेकेदार को नकद भुगतान किया। उन्होंने त्रिलोक सिंह ढिल्लों के साथ मिलकर योजनाबद्ध तरीके से फ्लैट खरीद और नकदी लेन-देन किया। बैंकिंग ट्रेल के अनुसार, त्रिलोक सिंह ढिल्लों के खातों में शराब सिंडिकेट से भुगतान प्राप्त हुआ। इसके अलावा, उन पर आरोप है कि शराब घोटाले से उत्पन्न 1,000 करोड़ रुपये से अधिक POC को संभालने में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के तत्कालीन कोषाध्यक्ष को धन हस्तांतरित करने के लिए अन्य सहयोगियों के साथ समन्वय किया। ईडी द्वारा की गई जांच में यह भी सामने आया कि धनराशि को आगे निवेश और
बघेल परिवार
के सहयोगियों को सौंपा गया। इस मामले में पहले ही कई उच्च पदस्थ अधिकारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा, अरविंद सिंह, त्रिलोक सिंह ढिल्लों, अनवर ढेबर, ITS अरुण पति त्रिपाठी और पूर्व मंत्री व वर्तमान विधायक कवासी लखमा शामिल हैं। ईडी की जांच अभी जारी है और आगामी सुनवाई में सभी पक्षों के सबूत और दस्तावेज़ पेश किए जाएंगे। न्यायालय के फैसले का राज्य की राजनीति और भ्रष्टाचार के मामलों पर व्यापक असर पड़ने की संभावना है।
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