छत्तीसगढ़

देशद्रोह कर रहे हवाला कारोबारी, तीन हजार करोड़ पार

Nilmani Pal
15 Dec 2025 11:38 AM IST
देशद्रोह कर रहे हवाला कारोबारी, तीन हजार करोड़ पार
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क्यों नहीं हो रही देशद्रोही हवाला कारोबारियों पर कार्रवाई, पुलिस-ईडी-आयकर विभाग-डीआरआई की आंख बंद

रायपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ में ऐसे हवाला कारोबारियों का फैला जाल, पुलिस की क्या मजबूरी, सीधी कार्रवाई से क्यों बच रही

हवाला देशद्रोही कारोबार का सीधा संबंध दो नंबर के पैसे को एक नंबर में करना

रायपुर से मुंबई पटना, कानपुर, गोरखपुर, दिल्ली, सूरत, अहमदाबाद, कोलकाता, बैंगलोर से हज़ारों करोड़ का हवाला ट्रांजेक्शन

हवाला के पैसों का लेनदेन बैंकों और जांच

एजेंसियों के सामने बेखौफ लेनदेन, जांच का विषय

छत्तीसगढ़ का हवाला देशद्रोही कारोबार

तीन हजार करोड़ पार, तस्करी के सामान के बदले बिहार होता है हवाला

जांच एजेंसी एनआईए, डीआरआई, आयकर विभाग, गृह विभाग के संज्ञान में नहीं

देश के साथ खुलेआम गद्दारी, सरकार को करोड़ों के राजस्व की हानि, नकली और

हानिकारक औषधि का कारोबार देश के साथ गद्दारी और अराजकता का माहौल भी पैदा कर रहे हवाला कारोबारी, देशद्रोह से भी ज्यादा खतरनाक कारनामा

छत्तीसगढ़ में हवाला कारोबार तीन हजार करोड़ से ज़्यादा का हुआ, नकली दवाईयां, तस्करी सामान, लोहे और कोयले का अवैध कारोबार

हवाला कारोबारियों के कारण राष्ट्र के साथ देशद्रोह हो रहा है। हवाला से जीएसटी को करोड़ों का नुकसान, सेंट्रल एक्साइज को भारी नुकसान, बैंकिंग प्रणाली में आर्थिक अनियमितता बढ़ रही। राज्य को सभी प्रकार के राजस्व की प्राप्ति में बढ़ती कठनाईयां। आयकर विभाग को वित्तीय वर्ष में होती है करोड़ों की कर चोरी। देश के साथ इस तरह की आर्थिक चोरी को सीधा कानून की दृष्टि से देशद्रोह के दायरे में देखा जा सकता है।

रायपुर (जसेरि) । हवाला कारोबार देशद्रोह के अंतर्गत आता है। देश के राजस्व में करारा झटका सिर्फ हवाला कारोबार से मिलता है। छत्तीसगढ़ में नकली दवाई, लोहा कारोबारी, सोने-चांदी के तस्कर, एफएमसीजी नेपाल के माध्यम से नकली और कम रेट के सामानों की आवक से लेन देने संपूर्ण रूप से हवाला से होता है। रायपुर में हवाला करने वाले के लगभग 25 ठिकाने और आफिस है। जनता से रिश्ता के पास पक्के सबूत उपलब्ध है। किसी भी जांच एजेंसी को आवश्यकता पडऩे पर संपूर्ण जानकारी साझा की जा सकती है। जिसमें हवाला कारोबारियों के नाम, सोना तस्करों के नाम, लोहा कारोबारियों के नाम, नेपाल से तस्करी करने वाले स्मगलरों के नाम तथा छत्तीसगढ़ में नकली दवाओं के कारोबारियों की संपूर्ण सूची उपलब्ध कराई जा सकती है।

दुनिया भर के सटोरियों का सबसे विश्वसनीय साधन नोट के टुकड़े पर किसी को भी भगतान कर देना है, इसके लिए बैंक में खाते ही जरूरत नहीं होती। हवाला कारोबार सीधा संबंध आन लाइन और आफ लाइन क्रिकेट सट्टा के रकम को संबंधित तक आसान तरीके से पहुंचाना होता है। जिसके दोनों पक्षों को कमीशन मिलता है। खासकर सटोरियों को अपने दो नंबर के पैसों को एक नंबर में करने लिए बिल्डर, व्यवहार में लाया जाता है। जिसे सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने वाले दबंग नेताओं के साथ पार्टनरशिप कर पैसा खपाते है। बाद में अधिकारियों के साथ सांठगांठ कर उस अवैध जमीन के आसपास किसानों से जमीन खरीद कर उस अवैध जमीन को पटवारी तहसीलदार को पैसा देकर फर्जी कमपनी के नाम आवंटित करवा कर वहां पर आलीशान बिल्डिंग तानकर सट्टा का अघोषित कार्यालय बनाकर सट्टा को संचालित कर रहे है। सट्टा का सारा पैसा नेपाल के तस्करी का माल की सुपारी गुटखा, स्टील, सीमेंट, लोहा उद्योग में लगाया जा रहा है। सटोरिए अपने दो नंबर के धंधे का अधिकांश भाग न बर 2 में करते हैं और नंबर दो का पूरा हिसाब किताब पैसे का लेन देन हवाला के माध्यम से होता है। रायपुर से मुंबई पटना, कानपुर, गोरखपुर, दिल्ली, सूरत, अहमदाबाद, कोलकाता, बैंगलोर से हज़ारों करोड़ का हवाला होता है। रायपुर में हवाला कारोबार के ऑफिसेस गंजपारा, फाफाडीह, सुंदरनगर, एमजी रोड, जेबीमॉल कॉ प्लेक्स, गुरु नानक चौक वाला प्रमुख रूप से हवाला कारोबारी हज़ारों करोड़ों का वारा न्यारा कर देश के साथ ग़द्दारी व देश के राजस्व की हानि कर रहे हैं।

क्या होता है हवाला का पैसा, कैसे होता इसका लेनदेन, नोट का एक टुकड़ा दिखाने पर करोड़ों रुपये इधर से उधर : हवाला का पैसा एक गलत वित्तीय प्रणाली के जरिए भेजा या हासिल किया जाने वाला धन होता है, इस तरह के मनी ट्रांजेक्शन को बैंकिंग सिस्टम या ऑफिशियल चैनलों से बाहर रहकर गुप्त रूप से ट्रांसफर किया जाता है। हवाला सिस्टम का उपयोग मु य रूप से टैक्स चोरी, काले धन को सफेद करने, गैर-कानूनी लेनदेन, या उन देशों में पैसे भेजने के लिए किया जाता है जहां बैंकिंग सुविधाएं सीमित होती हैं।

कैसे ट्रांसफर होता हवाला में लेनदेन : चूंकि, हवाला के पैसों का लेनदेन बैंक और जांच एजेंसियों को धोखा देकर किया जाता है इसलिए इसे काफी सीक्रेट तरीके से ट्रांसफर किया जाता है।

-हवाला का पैसा भेजने वाला अपने शहर में एक हवाला एजेंट (हवालदार) को नकद रकम देता है।

-फिर हवालदार, पैसे को फिजिकल रूप से ट्रांसफर नहीं करता, बल्कि अपने नेटवर्क के जरिए दूसरे शहर/देश में मौजूद हवालदार को सूचना देता है।

-उधर, दूसरे देश में मौजूद यह हवालदार, बिना किसी औपचारिक रिकॉर्ड के उसी राशि को प्राप्तकर्ता को दे देता है।

इस पूरे प्रोसेस के बाद, ये लोग अपने बीच बैलेंस सेटल करने के लिए विभिन्न गैर-पारंपरिक तरीकों का इस्तेमाल करते हैं।

मु य रूप से हवाला ट्रांजेक्शन के जरिए अपराधी मनी लॉन्ड्रिंग कर अवैध धन को वैध दिखाने के लिए करते हैं। कई बार हवाला के पैसों का इस्तेमाल आतंकवादियों को फंडिंग के लिए भी किया जाता है।

हवाला लेनदेन गैरकानूनी : भारत में हवाला लेनदेन पूरी तरह से गैरकानूनी है, और पकडऩे जाने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई होती है। हवाला से जुड़े अपराधों को रोकने के लिए कई कानून लागू किए गए हैं, जिनके तहत कड़ी सजा और जुर्माने का प्रावधान है। मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम, विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, जैसे कानून में हवाला के कारोबार को लेकर सजा का प्रावधान है।

अब क्रिकेट वर्ल्ड कप की तैयारी में जुटे, शुरू किया वाट्सएप चैनल : ईडी ने अब तक चार सटोरियों और हवाला से जुड़े एएसआइ चंद्रभूषण वर्मा, सतीश चंद्राकर, हवाला कारोबारी अनिल द मानी और सुनील द मानी को गिर तार कर जेल भेज दिया है। हालांकि ईडी और पुलिस दोनों महादेव बुक पोर्टल को अब तक बंद नहीं करा पाए हैं।

पूरे देश में सुर्खियों में बने महादेव आनलाइन सट्टा एप के मु य संचालक और इससे जुड़े बड़े खाईवाल इन दिनों पूरी राहत के साथ शुरू हो रहे क्रिकेट के विश्वकप में बड़ी कमाई करने के लिए तैयारी में जुटे हुए हैं। दरअसल, जब से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने महादेव एप की जांच शुरू की है, पुलिस ने प्रदेशभर में अपनी जांच बंद कर दी है। इसके पहले पुलिस रायपुर, भिलाई और दुर्ग से ही लगभग 500 ऐसे आरोपितों को गिर तार कर चुकी है, जो महादेव एप का पैनल और आइडी संचालित करते थे। सबसे बड़ी चुनौती एप को बंद करवाने की है।

साइबर एक्सपर्ट मोहित साहू का कहना है कि एप को बंद करना आसान नहीं है। यह प्ले स्टोर में नहीं है। यह एक वेबसाइड है, लिंक है, आइडी तैयार की जाती है। जितनी आइडी की जानकारी मिलती है कि पुलिस उसे ब्लाक करवा सकती है। यह इंस्टाग्राम, वाट्सएप और टेलीग्राम के माध्यम से संचालित होता है। जब तक मु य संचालक रवि उप्पल और सौरभ चंद्राकर नहीं पकड़े जाते तक तब इसे बंद करवा पाना संभव नहीं है।

इस मामले में ईडी ने अब तक चार आरोपितों एएसआइ चंद्रभूषण वर्मा, सतीश चंद्राकर, हवाला कारोबारी अनिल द मानी और सुनील द मानी को गिर तार कर जेल भेज दिया है। हालांकि ईडी और पुलिस दोनों महादेव बुक पोर्टल को अब तक बंद नहीं करा पाए हैं। महादेव आनलाइन सट्टा एप के मु य संचालक सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल के दुबई में होने की चर्चा है। दोनों के विरुद्ध गिर तारी वारंट जारी किया गया है।

महादेव बुक एप को लेकर पूर्व मु यमंत्री भी केंद्र सरकार पर तंज कस चुके हैं। उन्होंने सवाल उठाया था कि आखिर केंद्र सरकार महादेव बुक एप को बंद क्यों नहीं कर रही है? उन्होंने कहा था कि महादेव सट्टा एप वालों पर कार्रवाई हमने की। पैसे भी जब्त किए, आप (केंद्र) क्या कर रहे हैं?। सौरभ चंद्राकर की 200 करोड़ की शादी का वीडियो प्रसारित होने के बाद उसकी चर्चा पूरी दुनिया में और बढ़ गई है। ईडी ने महादेव एप से जुड़े लोगों से चार सौ 17 करोड़ की संपत्ति जब्त की है। इसके लिए कोलकाता, मुंबई, भोपाल सहित 39 अन्य जगहों पर छापा मार कर कार्रवाई की थी। वहीं छत्तीसगढ़ पुलिस ने दिल्ली, हरियाणा, झारखंड, भुवनेश्वर, ओडिशा, मप्र सहित अन्य जगहों से पैनल चलाने वालों को दबोचा है।

इंटरनेट मीडिया के माध्यम से बांटी जा रही आइडी : महादेव बुक के पोर्टल में केवल क्रिकेट में ही आनलाइन सट्टा नहीं लगाया जा रहा है, बल्कि फुटबाल, हाकी, कसिनो के अलावा कई आनलाइन जुआ खिलाने वाले गेम भी हैं। इसके जरिए बड़े पैमाने पर आनलाइन सट्टा और जुआ खिलाया जा रहा है। इंस्टाग्राम, वाट्सएप और टेलीग्राम के जरिए आनलाइन आइडी बेची जा रही है। इन पर जांच एजेंसियां रोक नहीं लगा पा रही हैं। प्रदेश में 600 से ज्यादा आइडी संचालित हैं।

राजधानी में बड़ा नेटवर्क : महादेव बुक और आनलाइन क्रिकेट सट्टे का रायपुर में भी बड़ा नेटवर्क सक्रिय था। शीमर्स क्लब के संचालक नितिन मोटवानी, युसूफ पुट्टी, कोचिंग सेंटर संचालक नवीन बत्रा, सागर जैन, मन्नू नत्थानी, सन्नी पृथ्वानी आदि सटोरियों के नाम सामने आए हैं। इनमें से कुछ सटोरियों से ईडी भी पूछताछ कर चुकी है।

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