छत्तीसगढ़

फर्जी GST मामले में ओम किरण इस्पात उद्योग के पार्टनर हरीश वाधवानी गिरफ्तार

Shantanu Roy
16 Jun 2026 10:31 PM IST
फर्जी GST मामले में ओम किरण इस्पात उद्योग के पार्टनर हरीश वाधवानी गिरफ्तार
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छग
रायपुर। रायपुर में Directorate General of GST Intelligence (DGGI) रायपुर जोनल यूनिट ने फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) से जुड़े करोड़ों रुपये के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए ओम किरण इस्पात उद्योग के पार्टनर हरीश वाधवानी को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के अनुसार आरोपी पर आरोप है कि उसने बिना वास्तविक माल की खरीद के केवल कागजी बिलों के आधार पर करीब 7 करोड़ रुपये का अवैध टैक्स लाभ प्राप्त किया।
जांच में यह भी सामने आया कि यह पूरा नेटवर्क उन कंपनियों के जरिए चलाया जा रहा था, जो दस्तावेजों में सक्रिय थीं, लेकिन वास्तविक रूप से कोई कारोबार नहीं कर रही थीं। इन फर्जी कंपनियों के माध्यम से इनपुट टैक्स क्रेडिट जनरेट कर उसका उपयोग अन्य लेन-देन में किया जा रहा था। DGGI की जांच में यह पैटर्न लंबे समय से चल रही कर चोरी की ओर इशारा करता है।
सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी हरीश वाधवानी पिछले लगभग 5 महीने से फरार था। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने अलग-अलग अदालतों में अग्रिम जमानत की याचिका भी दायर की, लेकिन उसे राहत नहीं मिली। मामला आगे बढ़ते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां से भी उसकी याचिका खारिज कर दी गई। इसके बाद DGGI टीम ने तकनीकी और खुफिया इनपुट के आधार पर उसे रायपुर से गिरफ्तार कर लिया।
जांच एजेंसी ने यह भी बताया कि इस प्रकरण में पहले भी कार्रवाई हो चुकी है। लगभग 5 महीने पहले आरोपी के भाई संतोष वाधवानी को 14 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी के एक अलग मामले में गिरफ्तार किया गया था। अब दोनों मामलों को जोड़कर जांच की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क की गहराई और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका सामने आ सके।
Directorate General of GST Intelligence के अधिकारियों के अनुसार जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि कई फर्जी फर्मों के जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट लिया गया था, जिनमें से कई का जीएसटी पंजीकरण बाद में रद्द या निलंबित कर दिया गया। यह भी संदेह है कि इन फर्जी कंपनियों का उपयोग केवल कागजी लेन-देन के लिए किया जा रहा था, जबकि असल में कोई माल की आपूर्ति नहीं हुई।
यह कार्रवाई अतिरिक्त महानिदेशक सुजीत मलिक के नेतृत्व में की गई है। अधिकारियों का कहना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति या कंपनी तक सीमित नहीं हो सकता। इसमें एक संगठित नेटवर्क की संभावना है, जिसकी जांच की जा रही है।
DGGI ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े अन्य व्यापारियों, फर्जी फर्म संचालकों और बिचौलियों पर भी कार्रवाई की जा सकती है। जांच एजेंसी अब बैंक लेन-देन, जीएसटी रिटर्न और डिजिटल रिकॉर्ड्स का विश्लेषण कर पूरे फर्जीवाड़े की कड़ी जोड़ने में जुटी है।
फिलहाल आरोपी को न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई के लिए प्रस्तुत किया जा रहा है और मामले की विस्तृत जांच जारी है।
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